देखें विडियो : 6 महीने तक सिक्के जोड़ने के बाद बेटी को दीपावली पर स्कूटी दिलाने के लिये सिक्कों से भरी बोरी लेकर शोरूम पहुंचा किसान, फिर शोरूम ने कर दिया ये काम….।

जशपुर : भावनायें एक ऐसी चीज है, इन्सान को जीने के लिये एक साहस , रास्ता और खुशियाँ देती है। इन भावनाओं की कोई कीमत नहीं होती है, ये अनमोल होती है। मामला है छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक किसान अपनी बेटी का सपना पूरा करने के लिए 10-10 के सिक्कों को लगातार छै माह तक इकठ्ठा करता रहा और सिक्कों से भरी बोरी लेकर स्कूटी खरीदने शोरूम पहुंचा। किसान बजरंग राम भगत ने करीब छह महीने की मेहनत से यह रकम जुटाई थी, जिसके बाद शोरूम संचालक ने उसके साथ ऐसा काम कर दिया की आप भी दांतों तले उँगलियाँ दबा लेंगे। शोरूम संचालक ने किसान परिवार का सम्मान करते हुए न केवल स्कूटी बेची, बल्कि उपहार भी दिया। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। हालांकि त्यौहार पर हर व्यापारी उपहार तो देता ही है, लेकिन यहाँ का मामला कुछ और ही था।

दीपावली के दिन पहुंचे शोरूम :

जानकारी के अनुसार दीपावली के दिन, बजरंग राम भगत अपने पूरे परिवार के साथ जशपुर के एक बाइक शोरूम पहुंचे। उन्होंने शोरूम के कर्मचारियों से पूछा, ‘हम स्कूटी खरीदना चाहते हैं, इसके लिए सिक्के लेकर आए हैं, क्या हमें स्कूटी मिलेगी?’ शोरूम के संचालक आनंद गुप्ता को जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने किसान परिवार का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने तुरंत अपने कर्मचारियों को सिक्कों की गिनती के काम में लगा दिया। सभी ने ख़ुशी – ख़ुशी वो रकम गिनी।

40 हजार से अधिक कीमत के सिक्के :

कर्मचारियों ने करीब 40 हजार रुपये से अधिक के सिक्के गिने। बाकी की रकम नोटों में ली गई। सिक्के गिनने के बाद, शोरूम के स्टाफ ने किसान परिवार को स्कूटी की चाबी सौंपी। स्कूटी खरीदने के साथ-साथ, परिवार को स्क्रैच एंड विन का एक कार्ड भी दिया गया। इस कार्ड को स्क्रैच करने पर, बेटी चंपा भगत को मिक्सर ग्राइंडर का उपहार मिला। जिसको लेकर किसान परिवार ने ख़ुशी जताई। शोरूम संचालक ने उन्हें पर्याप्त सम्मान भी दिया।

गिफ्ट में मिला मिक्सर ग्राइंडर :

किसान परिवार स्कूटी और मिक्सर ग्राइंडर के साथ खुशी-खुशी घर लौटा। किसान परिवार का सिक्कों से भरी बोरी लेकर शोरूम पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। शोरूम संचालक आनंद गुप्ता ने इस बारे में कहा, परिवार का सपना पूरा हुआ, हमें भी खुशी हुई। उन्होंने आगे बताया, ‘केसरा गांव के किसान बजरंग राम भगत अपनी बेटी को स्कूटी दिलाने का सपना लिए पिछले छह महीने से 10-10 के सिक्के को इकट्ठे कर रहे थे। दीपावली के दिन स्कूटी खरीदने अपने पूरे परिवार के साथ शोरूम आए थे।’ उन्हें लग रहा था कि शायद शोरूम संचालक सिक्के ना लें, अगर नहीं लिये तो उनका सपना अधूरा रह सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पूरे घर ने मेहनत कर इकट्ठा किया पैसा :

किसान का नाम रामलाल यादव है, जो जशपुर के पास एक छोटे से गांव बसंतपुर के निवासी हैं। रामलाल बताते हैं, “हमारा परिवार खेती-बाड़ी पर निर्भर है. बेटी की शादी के बाद अब बेटे को पढ़ाई के लिए स्कूटी की जरूरत थी। पिछले 6 महीनों से हमने हर छोटे-मोटे काम में मेहनत की सब्जी बेचना, मजदूरी करना और घर का हर सदस्य योगदान दिया। नोट तो कम ही बचे थे, इसलिए सिक्के इकट्ठे होते गए। आखिरकार 40 हजार के सिक्के और बाकी नोट लेकर शोरूम पहुंचे।” रामलाल अपने पत्नी सुनीता, बेटे अजय और बेटी रानी के साथ शोरूम में हाजिर हुए। बोरे खोलते ही शोरूम में हलचल मच गई। सभी कर्मचारी वहां कौतुहल से देखने लगे।

10 और 20 के 2500 सिक्के थे :

शोरूम के मालिक आनंद गुप्ता ने इस घटना को ‘मेहनत का सम्मान’ बताते हुए कहा, “ऐसा समर्पण दुर्लभ है। हमारे कर्मचारियों ने दो घंटे से ज्यादा समय लगाकर सिक्के गिने। कुल 2,500 से अधिक 10-20 रुपये के सिक्के थे, जो बोरे में लाए गए थे। हमने स्कूटी की पूरी कीमत स्वीकार की और अतिरिक्त उपहार के रूप में परिवार को एक हेलमेट सेट व सर्विस वाउचर दिया। यह किसान परिवार हमारी प्रेरणा हैं।” गुप्ता ने बताया कि शोरूम में सीसीटीवी फुटेज में यह दृश्य कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। स्थानीय लोगों ने इसे ‘सिक्कों की जीत’ कहकर सराहा तो किसी ने इसे सच्ची मेहनत कहा।