धमतरी में मड़ई मेले का आयोजन, मां अंगार मोती मंदिर में संतान सुख के लिए 1100 महिलाओं ने जमीन पर लेटकर मांगी ईच्छा।

धमतरी : विज्ञान की बुद्धि वाली दुनियां में लोग आस्था को नकारते है, लेकिन वो ये भूल जाते है कि यह विज्ञान भी भगवान की बनाई हुई दुनियां में ही काम करता है। ऐसे में हम ना विज्ञान का पक्ष ले सकते है और ना आस्था को गलत बता सकते है, लेकिन इतना तो जरुर कह सकते है कि आस्था से भी लोगों के काम बनते होंगे, तभी तो वो भगवान के प्रति श्रद्धा रखते है। ऐसे में धमतरी शहर से लगभग 14 किलोमीटर दूर गंगरेल बांध के किनारे वनों के बीचो बीच मां अंगार मोती मंदिर में मड़ई मेला का आयोजन किया गया था, जहाँ आस्था का संगम मिला। गंगरेल बांध के किनारे स्थित मां अंगारमोती मंदिर में दीपावली के बाद पहले शुक्रवार को हर साल की तरह इस साल भी जिले का पहला मड़ई मेला का आयोजन किया गया, जिसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचे। वहीं 1100 से अधिक सुहागिन महिलाओं ने संतान की कामना के लिए मां अंगार मोती परिसर में जमीन पर लेटकर अपनी माँ बनने की इच्छा मांगी। ऐसा माना जाता है कि यहाँ ईच्छा मांगने से माँ अंगार मोती महिलाओं को माँ बनने का आशीर्वाद देती है।

मां अंगार मोती मंदिर में जमीन पर लेटी महिलायें :

दरअसल, दीपावली के बाद पहले शुक्रवार को अंगार मोती मंदिर में मड़ई लगता है। इसे गंगरेल मड़ई भी कहते हैं। यहाँ मां अंगार मोती परिसर में काफी संख्या में महिलाओं पहुंची। ये वो महिलाएं है जिन्हें शादी के कई सालों बाद भी संतान की प्राप्ति नहीं हुई है। अपनी सूनी गोद हरी करने ये महिलाएं एक नारियल और नींबू, अगरबत्ती और फूल लेकर अंगार मोती मां के पास पहुंचती है। नि:संतान महिलाएं जमीन पर लेटकर संतान की मन्नत भी मांगते हैं. मां अंगारमोती अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए उनकी मनोकामना भी पूरी करती है।

लेटी हुई महिलाओं के ऊपर से गुजरे बैगा :

52 गांव के देव विग्रह इस दरबार में शामिल हुए। इस दौरान जमीन पर लेटी हुई महिलाओं के ऊपर से मंदिर के पुजारी और बैगा गुजरते हुए महिलाओं को आशीर्वाद देते हुए आगे बढ़े। ऐसा कहा जाता है कि जमीन पर लेटी हुई महिलाओं के ऊपर बैगाओं के गुजरने से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और मां अंगार मोती से मांगी गई ईच्छा जल्द पूरी होती है। माँ उनकी मनोकामना सिद्ध करती है।

49 सालों से चली आ रही ये परंपरा :

महिलाएं संतान प्राप्ति की इच्छा से मंदिर परिसर के रास्ते में लेटती हैं और मां अंगार मोती अपना आशीर्वाद देकर सुहागिन महिलाओं की सुनी कोख भर देती है। इस मड़ई मेले का आयोजन 1976 से लेकर अब तक चला आ रहा है। यहाँ आसपास के गाँवों के हजारों लोग जुटते है। गंगरेल मड़ई कि यह परंपरा पिछले 49 सालों से चली आ रही है। पहले यह मड़ई चंवर गांव में आयोजित होती थी, लेकिन गंगरेल बांध बनने के बाद चंवर गांव डूब गया। इसके बाद से ही हर साल की तरह दीपावली के बाद का पहला शुक्रवार को मां अंगार मोती परिसर में मड़ई मेले का आयोजन किया जाता है। जहाँ कई महिलायें अपनी मनोकामना लेकर पहुँचती है।

निसंतान दंपति को संतान सुख की प्राप्ति की मान्यता :

मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष जीव राखन लाल मरई ने बताया है कि धमतरी जिले के अलावा अन्य जिलों से भी यहां श्रद्धालु शामिल होते हैं और जमीन पर लेट कर अपनी मनोकामना भी मांगते हैं और मां अंगार मोती अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए उनकी मनोकामना भी पूरी करती है। यह यहाँ का अटूट विश्वास है।