फर्जी apk फाइल से मोबाईल हैक कर की लाखों की धोखाधड़ी, अलग – लग राज्यों से आरोपी गिरफ्तार।

रायपुर : तकनीकी दुनियां में लोगों को कई चीजों की जानकारी नहीं है, ऐसे में ठग इनका फायदा उठा लेते है। ऐसे ही रायपुर की साइबर पुलिस ने फर्जी APK फाइल के जरिए मोबाइल हैककर धोखाधड़ी करने वाले 6 अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों को सोमवार को गिरफ्तार किया है। ये सभी पकड़े गए साइबर आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से एपीके फाइल की बिक्री करते थे। आरोपियों को रायपुर की साइबर पुलिस ने दिल्ली, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश से गिरफ्तार किया है। इन्होंने लाखों रूपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है।

इस मामले में रायपुर रेंज के IG अमरेश मिश्रा ने बताया कि वॉट्सएप में फर्जी APK फाइल भेजकर पहले वे मोबाईल हैककर साईबर फ्रॉड को अंजाम देते थे। साईबर आरोपी धोखाधड़ी के लिए फर्जी RTOechallan.apk, PMkisanyojna.apk फाईल बनाते थे। इसी तरह की कई अन्य apk फाइल बनाकर लोगों को लगातार ठगा जा रहा है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी RTO E-चालान, इंश्योरेंस, PM किसान योजना, सभी बड़े बैंक, आयुष्मान कार्ड, PM आवास योजना नाम से फर्जी .APK बनाए जाने के साक्ष्य मिले हैं। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के नाम सौरभ कुमार चौधरी, आलोक सिंह, धरमजीत सिंह, चांद बाबू उर्फ चांद, मरूफ सिद्दीकी, मोहम्मद इरफान है। ये सभी 6 आरोपी मिलकर साईबर ठगी करते थे, ये सभी आरोपी 12वीं पास है।

  • सौरभ कुमार ड्राइफ्रूट सेल्समैन का काम करता था. बिहार के बांका जिला।
  • आलोक कुमार बिहार के अलवर का रहने वाला. सेल्समैन का काम करता था।
  • चांद बाबू शिवपुरी मध्य प्रदेश का रहने वाला. ठगी के कई मामलों में पहले से सक्रिय।
  • धरमजीत सिंह लोनावला महाराष्ट्र का रहने वाला. मुख्य रूप से हैकर था।
  • मोहम्मद इरफान आसनसोल पश्चिम बंगाल, मोबाइल दुकान संचालक।
  • मारूफ सिद्दीकी ठाणे महाराष्ट्र पैकर्स एंड मूवर्स का काम।

आरोपी धर्मजीत सिंह फर्जी APK (एंड्रॉइड पैकेज किट) को मैलिशियस कोड एम्बेड कर मोबाईल हैक करने के लिए बनाया था, जिसमें साईबर ठग नकली एंड्रॉइड ऐप का उपयोग करके लोगों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी चुराते थे। ये ऐप्स अक्सर विश्वसनीय संस्थानों जैसे सरकारी योजनाओं, बैंकों या बिजली बोर्डों के आधिकारिक ऐप के रूप में बनाये जाते थे, जिससे सामने वाला धोखे का शिकार हो जाता था।

इस फर्जी एपीके फाइल के तैयार हो जाने के बाद आरोपी धर्मजीत व्हाट्सअप और टेलीग्राम ग्रुप में लगभग 500 से ज्यादा लोगों को जोड़कर फर्जी एपीके फाइल बेचने अलग अलग तरीकों का उपयोग करता था। इन ग्रुप के जरिए हैकर विश्वसनीय संस्थानों जैसे सरकारी बैंक या सरकारी योजनाओं, बिजली बोर्डों के आधिकारिक ऐप के रूप में whatsapp ग्रुप में भेजते थे, जिसे क्लिक करने से फर्जी एपीके फाइल डाउनलोड हो जाती है और इसे इन्स्टॉल करते ही मोबाइल हैक हो जाता है। इसे जैसे इंस्टाल करते थे, लोगों को सीधा कनेक्ट हो जाता था।

जिसके बाद मोबाइल की सभी जानकारी और कंट्रोल हैकर के पास चली जाती है। मोबाईल का नियंत्रण मिलते ही हैकर पीड़ित के मोबाईल में दर्ज बैंकिंग जानकारी को हासिल कर राशि आसानी से अपने एकाउंट में ट्रांसफर कर लेते थे। इसके आतिरिक्त पीड़ित के कॉन्टेक्ट लिस्ट से सभी को फर्जी APK डाउनलोड करने सम्बन्धी मैसेज चला जाता है। जिससे अन्य लोग भी इसके शिकार होकर बड़ी राशि गवां देते हैं। इस तरह से इस ठगी को अंजाम दिया जाता था।

साईबर आरोपी सौरभ कुमार और आलोक मोबाइल हैक करने के बाद राशि को म्युल एकाउंट्स में लेते थे। चांद मोहम्मद के माध्यम से इरफान अंसारी आसनसोल और मारूफ सिद्दीकी ठाणे के पास भेजकर राशि लिया जाता था। वहीँ आरोपियों ने पीड़िता अर्चना भदौरिया के WhatsApp में RTOechallan.apk फाइल और पीड़ित महेश कुमार साहू के WhatsApp में PMkisanyojna.apk फाइल भेजा था, जिसे क्लिक करने से मोबाईल हैक कर दोनों पीड़ितों के खाते से 5 लाख 12 हजार रुपए एवं 12 लाख की धोखाधड़ी की गई थी। जिसकी रिपोर्ट पर थाना टिकरापारा और थाना राखी में मामला दर्ज किया गया था।

रायपुर पुलिस की जनता से अपील :

ऐसे मामलों को लेकर पुलिस ने कहा है कि मोबाईल पर आये किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें न ही उसको डाउनलोड या इनस्टॉल करें। मोबाईल पर एंटीवायरस का इस्तेमाल करें। एप्लीकेशन को केवल गूगल प्ले स्टोर से ही डाउनलोड करें। ऐप अनुमतियों की जांच करें। किसी भी ऐप को इंस्टॉल करते समय, ध्यान दें कि वह कौन सी अनुमतियां मांग रहा है। यदि कोई ऐप अनावश्यक अनुमतियां मांगता है, तो उसे इंस्टॉल न करें। एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करें। अपने डिवाइस पर एक प्रतिष्ठित एंटीवायरस ऐप इंस्टॉल करें जो संदिग्ध फाइलों और ऐप्स का पता लगा सके और उन्हें ब्लॉक कर सके। यदि किसी का मोबाइल हैक हो जाये तो तत्काल अपने सिम को मोबाईल से निकल दे और मोबाईल को फ्लाइट मोड पर करे दें। धोखाधड़ी की रिपोर्ट करें। यदि आप एपीके धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।