कांकेर : सरकारी योजनाओं को लागू करना आसन नहीं होता, जिसके के लिये कई बार प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। वहीँ छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एसआईआर प्रक्रिया के तहत जिला प्रशासन की टीम जब आदिवासी परिवारों के पास पहुंची तो उन्होंने फॉर्म लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने न केवल एसआईआर बल्कि सरकार की अन्य योजनाओं का भी सामूहिक बहिष्कार कर दिया है। ऐसे में करीब 17 आदिवासी परिवार स्वीकृति के बाद न तो प्रधानमन्त्री आवास और न ही आबंटित सरकारी राशन ले रहे हैं। ऐसे में आदिवासियों के इस सामूहिक बहिष्कार से जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई है।
दरअसल, यह पूरा मामला सरोना तहसील के ग्राम पंचायत लेंडारा का है। यहाँ ग्राम स्तर पर कई बार बैठक कर समझाईश और संवाद की कोशिशें की गईं, लेकिन परिवार प्रशासन से किसी भी तरह की बातचीत को तैयार ही नहीं है। इस मामले में सामने आया है कि बीएलओ टीम के अनुसार, कई बार तो आदिवासी परिवार के लोग सीधे मुंह बात तक नहीं करते हैं। वहीं राशन दुकान संचालक रामकुमार यादव का कहना है कि पहले 4 परिवार ही राशन लेने से मना कर रहे थे, लेकिन नवंबर महीने से अन्य परिवार भी राशन नहीं लेने की बात कह रहे हैं। जिससे यहाँ प्रशासन के लिये मुसीबतें खड़ी हो गई है।
ग्राम पंचायत सचिव संतोष कुमार निषाद ने बताया है कि शासकीय योजनाओं के विरोध की जानकारी मिलने पर गांव में बैठक कराई गई। हालांकि इन परिवारों ने किसी भी मुद्दे पर जानकारी देने से इंकार कर दिया। अब तो आवास निर्माण से भी मना कर रहे हैं। ऐसे प्रशासन को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे? इस मामले में जिले के कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने कहा कि लेडारा गांव के कुछ ग्रामीण शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं ले रहे है और एसआईआर फॉर्म नहीं भर रहे हैं ऐसी जानकारी मिली है। उस गांव में एसडीएम, तहसीलदार,बीएलओ व कर्मचारियों को भेजकर ग्रामीणों से बात की जायेगी।



