मतदाता सूची से हटाये गये 58 लाख नाम, प. बंगाल में चुनाव से पहले सियासी बवाल मचने का अंदेशा, आने वाले तीन माह में होगा चुनाव।

कोलकाता (प. बंगाल) : अगले वर्ष 2026 में मार्च-अप्रैल के पास पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव के दौरान राजनीतिक हलचल मचाने वाली घटना सामने आ सकती है। वैसे तो चुनाव जल्द ही होने वाले है लेकिन उससे पहले, विशेष गहन संशोधन के बाद राज्य की मसौदा मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस सूची से कुल 58 लाख नाम हटा दिये गये हैं। इन नामों में से 24 लाख नाम “मृत”, 19 लाख “स्थानांतरित”, 12 लाख “लापता” और 1.3 लाख “डुप्लीकेट” के रूप में चिह्नित किए गए हैं। बता दें कि एसआईआर को लेकर सत्ताधारी ममता सरकार ने लगातार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को कटघरे में ला खड़ा किया है। वहीँ आपको बता दें कि SIR से लाखों फर्जी मतदाता हट गये है।

चुनाव आयोग देगा डिटेल जानकारी :

सूत्रों के अनुसार गिनती के बाद कुल 58 लाख 8 हज़ार 202 नाम छूटने वाले हैं। चुनाव आयोग इस बारे में और विस्तार में जानकारी दे सकता है। हालांकि, यह संख्या चुनाव आयोग सूत्र के शुरुआती जानकारी के तौर पर मिली है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, अब तक राज्य में मरे हुए वोटरों की संख्या 24 लाख 18 हज़ार 699 है। इसके अलावा 12 लाख 1 हज़ार 462 लोग नहीं मिले हैं। अगर संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) किसी वोटर के घर उसकी तलाश में तीन या उससे ज़्यादा बार जाता है, लेकिन उसके बाद भी वोटर नहीं मिलता है, तो उसे मिसिंग लिस्ट में डाल दिया जाता है। वहीँ वर्तमान में प. बंगाल की अनुमानतः जनसँख्या लगभग 18 करोड़ हो सकती है। जिसने अब ममता सरकार के माथे पर बल ला दिया है।

किसी को शिकायत हो तो कमीशन के पास जायें :

इसके अलावा, इस राज्य में कुल 19 लाख 93 हज़ार 87 वोटरों ने अपना पता बदल लिया है। उनके नाम एक से ज़्यादा जगहों की वोटर लिस्ट में थे। इस वजह से उनके नाम एक जगह छूट रहे हैं और बाकी जगहों पर भी छूट रहे हैं। कमीशन ने राज्य में कुल 1 लाख 37 हज़ार 575 वोटर्स को ‘फेक’ के तौर पर पहचाना है। उनके नाम भी ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं होंगे। इसके अलावा, 57 हज़ार 509 और लोगों को ‘अन्य’ लिस्ट में रखा गया है। उन्हें भी बाहर किया जायेगा। पश्चिम बंगाल में 16 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित कर दी गई है। अगर उस लिस्ट में कोई शिकायत या गलती है, तो कमीशन को बताया जाए। उसके आधार पर सुनवाई होगी। कमीशन सबूतों को सत्यापित करने के बाद अंतिम सूची तैयार करेगा। वहीँ अब जल्द ही बंगाल में होने वाले चुनावों में इसका बड़ा असर पड़ता दिखाई दे रहा है।