अंतागढ़ : कांकेर क्षेत्र में डेमोग्राफी काफी बदल गई है, यहाँ पहले हिन्दू किसी का विरोध नहीं करते थे, जिसके कारण धर्मान्तरण के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे थे, अब जहाँ हिन्दू विरोध करने लगा है तो माहौल लगातार खराब हो रहा है। ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे है, वहीँ अब फिर से कांकेर जिले के अंदरूनी वनांचल क्षेत्रों में मतांतरण को लेकर उपजा विवाद अब गंभीर सामाजिक तनाव का रूप लेता जा रहा है। यहाँ आमाबेड़ा क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़े तेवड़ा में एक मतांतरित बुजुर्ग के अंतिम संस्कार को लेकर शुरू हुआ विवाद गुरुवार को हिंसक झड़प में बदल गया। आक्रोशित भीड़ ने चर्च में तोड़फोड़ करते हुए आग लगा दी। इसके अलावा सरपंच के घर में भी तोड़फोड़ की। इस दौरान आदिवासी और ईसाई समाज के बीच हिंसक झड़प हुई। हालात बिगड़ने पर प्रशासन द्वारा दफनाए गए शव को बाहर निकलवाया गया। इसे कहां ले जाया गया है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। उग्र ग्रामीणों ने तीन से चार चर्च में तोड़फोड़ और आग लगाने की कोशिश भी की है। वहीँ क्षेत्रिय भीड़ के आगे पुलिस बेबस नजर आ रही है।
वहीँ मामले में बुधवार को घटना के दौरान दो पक्षों के बीच जमकर पथराव हुआ था, जिसमें कई पुलिसकर्मी और ग्रामीण घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। जिले में कफन दफन को लेकर ग्रामीण एक्शन मोड पर है। मतांतरितों की मौत के बाद गांव व जिले में कफन दफन को लेकर जबरदस्त तरीके से विरोध किया जा रहा है। इससे पहले चार व्यक्तियों के मौत के बाद उन्हें जिले से बाहर शासन प्रशासन द्वारा अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
अनुमति के बिना दफन, फिर उग्र विरोध :
विवाद की शुरुआत सरपंच रजमन सलाम के पिता चमरू राम (70 वर्ष) के निधन के बाद हुई थी। परिजनों के अनुसार मृतक आदिवासी समाज से थे, लेकिन उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था। आरोप है कि गांव में परंपरागत सहमति और अनुमति के बिना चुपचाप कफन-दफन कर दिया गया था। फिर इसकी जानकारी मिलते ही आदिवासी समाज उग्र हो गया और शव को बाहर निकालने की मांग पर अड़ गया, जिसके बाद मामला काफी गरम हो गया। वहीँ इस मामले में ग्रामीणों का कहना था कि मत परिवर्तन करने वाले व्यक्ति का अंतिम संस्कार गांव के पारंपरिक पूर्वजों के स्थल पर नहीं किया जा सकता है। इसी मुद्दे पर तनाव बढ़ता गया और बुधवार को प्रशासन की मौजूदगी में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गये, जिसके बीच जमकर विवाद खड़ा हुआ।
ग्रामीणों ने पुलिस पर किया हमला
बुधवार को सर्व आदिवासी समाज, ईसाई समुदाय और भीम आर्मी से जुड़े सैकड़ों लोग मौके पर एकत्र हुए। पहले तीखी बहस हुई, फिर पक्की कब्र तोड़ने की मांग को लेकर विवाद हिंसा में बदल गया था। वहीँ हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इसी दौरान पुलिस पर पथराव हुआ, जिसमें जवान घायल हो गए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मतांतरितों के अंतिम संस्कार को लेकर विरोध के चलते अब तक चार मामलों में शवों का अंतिम संस्कार जिले की सीमा से बाहर कराना पड़ा है। इनमें दुर्गूकोंदल के कोड़ेकुर्से, बेवरती और ग्राम कुरना के मामले शामिल हैं। आमाबेड़ा के अंदरूनी गांव बड़ेतेवड़ा आसपास जंगलों से घिरा हुआ है। एक समय बड़ेतेवड़ा गांव को लोग नहीं जानते थे मगर बुधवार को सर्व आदिवासी समाज, ईसाई समुदाय और भीम आर्मी से जुड़े लोग आमने-सामने होने से लोग जान गए है। अंदरूनी गांवों में भी मतांतरण का जाल फैल गया है।



