हाईवे पर जबरन स्थापित की जा रही थी छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति, पुलिस ने किया जब्त, मजिस्ट्रेट के आदेश पर किसान मोर्चा को सौंपी गई।

महासमुंद : प्रशासन को धार्मिक सामाजिक भावना से ऊपर उठकर कार्य करना होता है, संविधान में सभी जाति धर्मों को बराबर का स्थान दिया जाता है, लेकिन जब किसी धर्म अथवा समाज विशेष की भावनाओं के बजाय प्रशासनिक नियमों का पालन करना जरुरी होता है तो ऐसे में कुछ लोग सामाजिक माहौल खराब करने लगते है, वहीँ बीते कुछ माह से राज्य में सामाजिक माहौल काफी बिगड़ गया है, तो वहीँ बीते दिनों छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति जब्त कर कौवाझर पंचायत में सुरक्षित रख दिया था। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने जब्त छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को वापस किसाना मोर्चा को सौंपी है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा 28 नवंबर को नेशनल हाईवे 53 पर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति स्थापित कर रहा था, जो कि कानून सम्मत नहीं माना गया था। वहीँ नेशनल हाईवे पेट्रोलिंग टीम द्वारा तुमगांव थाने में शिकायत के बाद प्रशासन ने छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति लगाने से मना किया था। इसका विरोध करने पर पुलिस ने बी एन एस की धारा 285 , 3(5) एवं 8- B राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति जब्त कर कौवाझर पंचायत में सुरक्षित रख दिया था।

इसके बाद 23 दिसंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले की सुनवाई की। उन्होंने आवेदक अनिल दुबे की जमानत मुचलका स्वीकार कर लिया और तुमगांव पुलिस को आदेशित किया कि जब्त छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को आवेदक को सुपुर्द किया जाये। इसी कड़ी में पुलिस ने नायब तहसीलदार की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ महतारी को सुपुर्द किया गया। छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा के सदस्यों ने बाजे-गाजे के साथ मूर्ति को लेकर गांव में घुमाया और खुशियाँ मनाई। वहीँ छत्तीसगढ़ महतारी छत्तीसगढ़ की भूमि का प्रतिक है, जिसे यहाँ रहने वाला हर व्यक्ति अपनी मातृभूमि के स्वरूप में देखता है, जैसे भारत माता है, वैसे ही छत्तीसगढ़ महतारी का पूरा सम्मान है, वहीँ प्रशासनिक तौर पर निवेदन किया गया है, कि क़ानूनी रूप से अनुमति लेकर ही किसी भी प्रकार की प्रतिमा स्थापित की जाये।