स्कूल बैग खोने पर थाने पहुंची बच्ची ने पुलिस से कहा : ‘उसमें मेरा होमवर्क है’, फिर पुलिस ने भी 24 घंटे में ढूंढ़ निकाला।

शुजालपुर (म.प्र.) : हर आदमी अपने जीवन में कड़ी मेहनत करता है और उसके जीवन में बड़ी – बड़ी समस्यायें होती है, ऐसे में क्या कभी आपने सोचा है, कि स्कूल पढने वाले बच्चे की सबसे बड़ी समस्या क्या होती है? तो जान लीजिये स्कूली बच्चों के लिये उनका स्कूल बैग ही बहुत बड़ी संपत्ति होती है और होम वर्क कड़ी मेहनत और बड़ी परेशानी होती है। इसी समस्या को लेकर जिले में तीसरी कक्षा की एक बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन और मासूम जिद्द ने पुलिस को भी भावुक कर दिया। दरअसल मामला है बच्ची का बैग गुम हो गया था, जिसके कारण वो काफी परेशान थी, स्कूल बैग से ज्यादा उसका किया गया होमवर्क कीमती था, जिसको लेकर वह पुलिस के पास गई, इस गुम हुए स्कूल बैग को ढूंढ़ने के लिए पुलिस ने खास टीम बनाई और पूरी मुस्तैदी से तलाश कर 24 घंटे के अंदर बच्ची का बैग वापस दिलाया। यह मामला शुजालपुर मंडी क्षेत्र का है। यहां सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ने वाली तीसरी कक्षा की छात्रा चेरी नायक गुरुवार को अपनी मां पूजा, दादी कृष्णा और बुआ रंजना के साथ स्कूल गई थी।

स्कूल से लौटते समय बच्ची का बैग ऑटो में ही छूट गया था। वहीँ घर पहुंचने पर जब बैग नहीं मिला तो चेरी फूट-फूटकर रो पड़ी। उसे बैग की कीमत की चिंता नहीं थी, बल्कि इस बात की थी कि उसकी किताबें और वर्कबुक उसी में थीं और बिना बैग के उसकी पढ़ाई कैसे होगी। जिसको लेकर वह काफी दुखी और परेशान हो गई।

पिता के साथ थाने पहुंची पुलिस :

परिवार ने उसे नया बैग और किताबें दिलाने का भरोसा दिया, लेकिन चेरी (बच्ची) नहीं मानी। उसने बैग ढूंढ़ने के लिए पुलिस से मदद लेने की बात कही। इसके बाद बच्ची की जिद्द और परेशानी को देखते हुये पिता संदीप नायक और दादा अशोक नायक बच्ची को लेकर शुजालपुर मंडी थाने पहुंचे। यहां चेरी ने खुद अपनी परेशानी एसडीओपी निमिष देशमुख को बताई। बच्ची की आंखों में आंसू देखकर पुलिस ने तुरंत मदद का फैसला किया।

सीसीटीवी फुटेज से मिला बैग :

एसडीओपी देशमुख के निर्देश पर ट्रैफिक पुलिस की सहायता ली गई। ट्रैफिक एएसआई धर्मेंद्र परस्ते और हेड कॉन्स्टेबल सुनील गुर्जर को शहरभर के सीसीटीवी कैमरे खंगालने की जिम्मेदारी सौंपी गई। फुटेज में चेरी एक ऑटो में बैठती दिखाई दी, लेकिन ऑटो पर नंबर प्लेट नहीं थी, जिससे तलाश चुनौतीपूर्ण हो गई। इसके बावजूद पुलिस ने ऑटो के आगे लिखे नाम और ऊपर लगे लोहे के स्टैंड की पहचान के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। पूछताछ के दौरान ऑटो चालक की पहचान परवेज के रूप में हुई। पुलिस ने उससे संपर्क किया तो उसने बताया कि ऑटो में एक स्कूल बैग मिला था, लेकिन यात्री की पहचान नहीं होने पर वह बैग को घर पर सुरक्षित रखे हुए था। जिसको वापस लेने के लिये पुलिस ने काफी मशक्कत की।

ऑटो ड्राइवर ने लौटाया बैग :

शुक्रवार सुबह परवेज बैग लेकर थाने पहुंचा। पुलिस ने चेरी और उसके परिवार को बुलाया और बच्ची को उसका बैग सौंपा। बैग मिलते ही चेरी के चेहरे पर मुस्कान लौट आई और उसने पुलिसकर्मियों को धन्यवाद कहा। एसडीओपी निमिष देशमुख ने बताया कि बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन को देखते हुए पुलिस ने पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही की। परिवार की गुजारिश पर ऑटो चालक को समझाईश देकर छोड़ दिया गया कि भविष्य में ऐसा कोई सामान मिले तो तुरंत पुलिस के सुपुर्द करे। वहीँ लोगों ने पुलिस के इस कार्य की काफी सराहना भी की, इस घटना ने लोगों को भावविभोर कर दिया।