महिला की हत्या के बाद भड़की हिंसा, आगजनी से 250 घर जलकर हुये खाक, हिंसा जारी, लगा कर्फ्यू।

पखांजूर : पखांजूर भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कांकेर जिले में स्थित एक कस्बा है, जो ओड़िशा बॉर्डर के मलकानगिरी से जुड़ा हुआ है, जो कोयलीबेड़ा ब्लॉक के अंतर्गत आता है और बंगाली शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए जाना जाता है। जो गांव कभी शांति और आपसी सौहार्द्र के लिए जाना जाता था, आज वह हिंसा और तबाही का प्रतीक बन गया है।बात हो रही है ओड़िशा के मलकानगिरि जिले के एमवी 26 गांव की, यहां एक महिला की हत्या के बाद हालात इतने बिगड़ गये कि पूरे गांव के 230-250 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। इस हिंसक घटना में पीढ़ियों से संजोई गई लगभग 60 वर्षों की मेहनत और पूंजी पूरी तरह जलकर राख हो गई है। वहीँ पीड़ित परिवारों के कच्चे–पक्के मकान, अनाज, कपड़े, जरूरी दस्तावेज और घरेलू सामान सब कुछ आग की भेंट चढ़ गया। इस अचानक हुई हिंसा ने सैकड़ों लोगों को खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर कर दिया है। लोग बेघर हो गये है।

घटना को लेकर मलकानगिरी ज़िले में लगातार दूसरे दिन भी तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जहां एमवी-26 क्षेत्र में हजारों की संख्या में भीड़ ने उत्पात जारी रखा, कई घरों में आगजनी की और ग्रामीणों को गांव छोड़ने पर भी मजबूर कर दिया। एक खबर के मुताबिक, जब सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम के बावजूद हालात काबू से बाहर हो गए, तो ज़िला प्रशासन ने एमवी-26 क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया, जबकि सोमवार शाम 6 बजे से पूरे ज़िले में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। यहाँ काफी बवाल हुआ।

यह हिंसा कोया जनजाति की एक महिला, लेक पोडियामी की कथित हत्या से शुरू हुई थी, जिसकी बिना सिर वाली लाश पिछले गुरुवार को पोटेरू नदी में मिली थी। जिसके बाद आदिवासी गांववालों ने बंगाली लोगों पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगाते हुए रविवार को एमवी-26 बस्ती के क्षेत्र पर एक संगठित हमला किया, जबकि पुलिस इस मामले में सुभारंजन मंडल नामक व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

खबरों के अनुसार, इस हादसे की जड़ पोडियामी और सुकुमार मंडल के बीच ज़मीन का आपसी झगड़ा था, जो उनके पति की मौत के बाद पिछले दस साल से उनकी ज़मीन पर बटाई पर खेती कर रहे थे। दोनों के बीच अक्सर विवाद चलता रहता था। जब उनका बेटा बड़ा हो गया, तो पिछले साल पोडियामी ने बटाई पर खेती खत्म करने और अपनी ज़मीन पर खुद खेती करने का फैसला किया। इस फैसले से पूरे साल दोनों पार्टियों के बीच तनाव बढ़ता गया।

वहीँ फिर 1 दिसंबर को पोडियामी धान की कटाई के लिए अपने खेत में गई, धान के तीन गट्ठर सुखाने के लिए ले गई और घर वापस नहीं लौटी। जब वह वापस नहीं आई, तो उसके बेटे ने उसी दिन गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, उसे शक था कि सुकुमार और उसके साथियों ने उनकी मां को अपहरण करके मार डाला है और सबूत मिटाने के लिए उसकी लाश नदी में फेंक दी है। जिसके बाद दुदामेटला के पास बालीघाट के रहने वालों ने गुरुवार को नदी में एक बिना सिर वाला शव दिखा और पुलिस को बताया। कपड़ों के आधार पर परिवार वालों ने शव की पहचान पोडियामी के रूप में की।

इसके बाद धनुष-बाण, कुल्हाड़ी और भाले से लैस भीड़ ने गांव में भारी तबाही मचाई, दर्जनों घर जलाए गए और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, हालांकि अधिकारी नुकसान के बारे में चुप्पी साधे हुए हैं। वहीँ आपको बता दें कि एमवी-26 में करीब 100 बंगाली परिवार रहते हैं। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार दोपहर सैकड़ों लोग आदिवासी समर्थक नारे लगाते हुए फिर से एमवी-26 में घुसे और कई घरों व संपत्तियों को निशाना बनाया। मामले में बताया गया है कि ये हमले पुलिस की मौजूदगी में भी हुए. दहशत में आए परिवार आगे की हिंसा के डर से गांव छोड़कर भाग गए।

मलकानगिरी के एसपी विनोद पाटिल पूरे दिन मौके पर मौजूद रहे और हालात पर नज़र रखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती का समन्वय करते रहे. डीजीपी वाई.बी. खुरानिया और राज्य पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शाम को मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायज़ा लिया। इस मामले में आदिवासी नेता बन्धु मुदुली ने आरोप लगाया कि कुछ बसाहटी लोग आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि कई बंगाली बिना वैध दस्तावेजों के गांव में रह रहे हैं और मांग की कि केवल उन्हीं बसाहटी लोगों को रहने दिया जाए जिनके पास सरकार द्वारा जारी ‘ग्रीन कार्ड’ हो। ऐसे में इन लोगों को क्षेत्र के लिये खतरा बताया गया।

हमले सुनियोजित, उच्चस्तरीय जांच की मांग : बंगाली समुदाय

उन्होंने दावा किया कि पोडियामी की हत्या भूमि विवाद के कारण हुई। उन्होंने मांग की कि मृतका पोडियामी के कब्जे वाली जमीन को आधिकारिक रूप से उसके नाम पर दर्ज किया जाये। दूसरी ओर, आसपास के गांवों के बंगाली निवासियों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और अपने घरों व संपत्तियों के नुकसान का विरोध करते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है। मलकानगिरी बंगाली समाज ने कलेक्टर सोमेश कुमार उपाध्याय को दिए गए ज्ञापन में ‘प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा उकसाए गए सुनियोजित हमले’ की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

समाज के अध्यक्ष गौरांग कर्मकार ने कहा कि समुदाय ने पहले भी कई बार प्रशासन को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बारे में चेताया था। उन्होंने कहा, ‘पहले कामवाड़ा पंचायत में भी ऐसी घटना हुई थी, लेकिन हमने हालात शांत कराए। इस बार हिंसा हद पार कर गई है।’ समाज ने प्रशासन से मांग की कि हिंसा भड़काने या उसमें शामिल सभी लोगों को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की है।

इसके साथ ही संगठन ने महिला की हत्या मामले में भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, इस ज्ञापन में कहा गया है कि, ‘हम प्रशासन से अनुरोध करते हैं कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लें और मलकानगिरी में शांति और सौहार्द्र बहाल करने के लिए कदम उठाएं।’ इसके साथ ही उपाध्याय ने कहा कि शांति बनाये रखने और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए बीएनएस की धारा 163 के तहत कर्फ्यू लगाया गया है और इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित की गई हैं। सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। प्रभावित परिवारों को भोजन और सुरक्षा देने के लिए गांव में सामुदायिक रसोई और अस्थायी आश्रय स्थल खोले गए हैं।

उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त घरों का आकलन किया जा रहा है और मूल्यांकन पूरा होने के बाद एसआरसी दिशानिर्देशों के अनुसार राहत दी जाएगी। राहत देने के प्रयास शुरू किये जा रहे है। इसी बीच, कलेक्टर ने बताया कि मृत महिला के कटे हुए सिर की तलाश के लिए ओडीआरएएफ और फायर सर्विस की टीमें तैनात की गई हैं, जिनका शव पहले पोट्टेरू नदी में मिला था। खोज अभियान में सहायता के लिए नदी के किनारे कैमरे लगाए गए हैं। मामले को लेकर पूरी सवाधानी बरती जा रही है।