गरियाबंद : महासमुंद जिले की तरह अब गरियाबंद जिले में भी कक्षा चौथी के प्रश्न पत्र में ‘राम’ को लेकर पूछे गए सवाल ने प्रशासनिक सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामले को लेकर अब विवाद बढ़ रहा है, संभाग भर में लोकल परीक्षाओं के लिए प्रश्न पत्रों की छपाई एक ही प्रिंटिंग प्रेस से हुई है। अब सवाल यह है कि जिले को अलग-अलग राशि आबंटित किए जाने के बाद छपाई एक ही प्रिंटिंग प्रेस से क्यों की गई है? इसके जिम्मेदार एक डीईओ कैसे? इस पूरे मामले में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) की भूमिका सवालों के घेरे में है। वहीँ ऐसे मामले पहले भी आ चुके है, शिक्षा विभाग की पुस्तकों को लेकर पहले भी कई बार विवाद उत्पन्न हो चूका है, बच्चों को पढ़ाये जाने वाली किताबों में कई बार विवादास्पद पाठ्यक्रम आ चुके है।
अब महासमुंद के विवाद बाद गरियाबंद जिले में भी उसी कक्षा चौथी के प्रश्न पत्र में ‘राम’ के नाम को अपमानित करने का मामला सामने आया है, जिसके बाद आज विहिप और बजरंग दल ने शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर लिया है। बजरंग दल के नेता मोहित साहू ने सोशल मीडिया में गरियाबंद के तिरंगा चौक में दोपहर 2 बजे समस्त हिन्दू कार्यकर्ताओं को एकत्रित होने की अपील की है, इसमें कहा गया है कि राम के नाम को अपमानित करने वाले डीईओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग होगी। यह कृत्य क्या जानबूझकर किया गया है?
जिला पर नहीं, संभाग स्तर पर हुई है एक साथ छपाई :
यह मामला सामने आने के बाद पड़ताल की, जिसमें पता चला कि एक जैसे प्रश्न पत्र केवल महासमुंद और गरियाबंद में नहीं बल्कि पूरे रायपुर संभाग के पांच जिलों के लिए गये थे। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा बनाई गई कमेटी ने प्रश्न का चयन किया और संभाग स्तर पर लोकल परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों की छपाई का काम एक प्रिंटिंग प्रेस को दिया गया। संभाग का बजट 2 करोड़ का था, जिसकी छपाई दुर्ग के शुभम प्रिंटिंग प्रेस से हुई है, सवाल उठता है प्रश्नपत्र किसने तैयार किये थे?
स्थानीय स्तर पर तय होते हैं गाइड लाइन :
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के लोकल परीक्षाओं के संचालन का प्रावधान माध्यमिक शिक्षा मंडल के तय गाइड लाइन के मुताबिक स्थानीय स्तर पर करना होता है। छात्रों को संख्या के आधार पर वार्षिक और अर्धवार्षिक परीक्षाओं के प्रश्न पत्र सह उत्तर पुस्तिका की छपाई के लिए अलग-अलग बजट का प्रावधान है। वहीँ गरियाबंद में इसके लिए 18 लाख का प्रावधान है, वहीं बड़े जिले में 30 लाख से ज्यादा के बजट दिए गए, लेकिन जिला स्तर के बजाए संभाग स्तर पर छपाई कराई गई, इसके लिए डीपीआई को माध्यम मनाया गया। प्रश्न पत्र में सवाल की जवाबदारी इसी संस्थान की होती है। ऐसे में ‘राम’ के अपमान के दोषी अकेले डीईओ नहीं बल्कि डीपीआई के आला अधिकारी ही जवाबदार है। जिन पर कार्यवाही की जानी चाहिये।
तिल्दा में सेट हुआ पेपर, नांदगांव में हुई छपाई :
जानकारी के अनुसार, रायपुर संभाग में रायपुर, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, बलौदाबाजार सहित अन्य जिलों के लिए एक ही प्रश्नपत्र सेट किया गया था। इसे तिल्दा के शिक्षक ने सेट किया था, और इसकी छपाई राजनांदगांव के शुभम प्रिंटिंग प्रेस में हुई थी। प्रिंटिंग प्रेस के मालिक आदेश श्रीवास्तव ने बताया है कि जैसा प्रश्न पत्र तैयार कर दिया गया था, वैसा ही प्रिंट किया गया था, इसमें हमने कोई फेरबदल नहीं किया है, इसके जिम्मेदार हम नहीं है, तो वहीं गरियाबंद डीईओ जगजीत सिंह धीर ने बताया है कि गरियाबंद के अलावा अन्य 14 जिलों के लिए एक ही जगह से प्रश्न पत्र आया था। तो मामले में जिम्मेदार कौन होगा? अब ये सवाल सामने खड़ा है।
हिन्दू संगठन ने फूंका डीईओ का पुतला, प्राथमिकी दर्ज करने थाने में दिया ज्ञापन :
हिन्दू संगठनों ने शनिवार को शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए डीईओ का पुतला फूंका। इसके साथ डीईओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए थाने में ज्ञापन भी दिया है। इस मामले में संभाग स्तर पर जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई है। महासमुंद की तरह गरियाबंद जिले में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा में एक सवाल पूछा गया था कि “मोना के कुत्ते का क्या नाम है?” इस सवाल के चार विकल्पों में ‘राम’ का नाम भी शामिल किया गया था। इसे विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए डीईओ का पुतला जलाया है।
इसके पहले महासमुंद जिले में इसी सवाल पर हिन्दू संगठनों के विरोध-प्रदर्शन के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने संज्ञान लेते हुए डीईओ विजय कुमार लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। संचालनालय ने सवाल किया कि क्या कक्षा 4 के हिन्दी के प्रश्नपत्रों की तुलना कक्षा 4 के अन्य विषय प्रश्नपत्रों से यह ज्ञात नहीं हुआ था कि प्रश्नपत्र आपके द्वारा दिये गये प्रश्नपत्र की प्रति के अनुरूप मुद्रित नहीं है? इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया था कि 2 बार परीक्षा तिथियों में संशोधन होने की वजह से मुद्रण द्वारा प्राप्त सीलबंद पैकेट के प्रश्न पत्र से ही परीक्षा आयोजित की गई थी। इस पर संचालनालय ने माना कि अधिकारी ने प्रश्नपत्र उनके द्वारा दिये गये प्रश्न पत्र की प्रति के अनुरूप मुद्रित नहीं है, फिर भी उन्होंने सुधार के लिए कोई कार्यवाही नहीं की, इस आधार पर उन्हें दोषी पाया है।
अब जब फिर से गरियाबंद में भी यह मुद्दा उभर गया है, तो इसके बाद स्थानीय प्रशासन और लोक शिक्षण संचालनालय क्या कार्यवाही करता है, इस पर सबकी नजर लगी हुई है। इसके पहले ही गरियाबंद डीईओ जगजीत सिंह धीर ने बताया है कि गरियाबंद के अलावा अन्य 14 जिलों के लिए एक ही जगह से प्रश्न पत्र आया था। इस बयान से पूरा संचालनालय संदेह के दायरे में आ गया है, अब अगर कार्यवाही की जाती है तो बात दूर तलक जायेगी, अब इस मामले में प्रमुख रूप से किसे जिम्मेदार ठहराया जाता है, इसके लिए अब इंतजार करना पड़ेगा।



