अंबिकापुर : राज्य में अश्लीलता का नंगा नाच लगातार सामने आने लगा है, गरियाबंद के बाद सूरजपुर जिला में अश्लील गीतों पर नृत्य करती युवतियों का वीडियो प्रसारित हुआ है। यह वीडियो पर्यटन स्थल कुमेली के वन विश्राम गृह का है। यह विश्रामगृह अय्याशी का अड्डा बन गया है। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो ने पूरे प्रकरण को उजागर कर दिया है। वीडियो में रेस्ट हाउस के भीतर लोग फर्श पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि उनके सामने अर्धनग्न युवतियां अश्लील गानों पर नृत्य करती दिखाई दे रही हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि सरकारी जगहों पर क्या ऐसे कृत्य जारी है? अगर हाँ तो इन पर कार्यवाही क्यूँ नहीं हो रही है अथवा इनकी जांच आज तक क्यूँ नहीं की गई, ये तो विडियो वायरल होने के बाद मामले खुल रहे है, लेकिन क्या ये कृत्य लम्बे समय से जारी रहे है?
पर्यटकों की सुविधा के लिए बना
यह रेस्ट हाउस सूरजपुर वनमंडल के रामानुजनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत कुमेली पर्यटन स्थल पर स्थित है, जो अपने आकर्षक जलप्रपात और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाए गए इस रेस्ट हाउस का इस तरह दुरुपयोग होना प्रशासनिक नियंत्रण पर सवाल खड़ा करता है। इस कृत्य के सामने आने के बाद ऐसी जगहों पर जांच की मांग भी उठने लगी है।
रात के समय अय्याशी की महफिल :
इस मामले में आरोप है कि रेस्ट हाउस में लंबे समय से रात के समय अय्याशी की महफिल सजती है। अश्लील नृत्य, शराबखोरी और जुए की गतिविधियां खुलेआम चलने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं और पूरी रात रेस्ट हाउस में जमावड़ा लगा रहता है। क्षेत्रवासियों के अनुसार यह सिलसिला पिछले तीन-चार वर्षों से जारी है। वीडियो प्रसारित होने के बाद रेस्ट हाउस की जिम्मेदारी को लेकर वन विभाग और वन विकास निगम एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। वन विभाग इसे वन विकास निगम का बताता है, जबकि निगम अधिकारी इसे वन विभाग के अधीन बता रहे हैं। इस प्रसारित विडियो ने मामले की पोल खोलकर रख दी है।
डिप्टी रेंजर की जिम्मेदारी :
हकीकत यह है कि रेस्ट हाउस वन विभाग के नियंत्रण में है और इसकी देखरेख की जिम्मेदारी डिप्टी रेंजर को सौंपी गई है। नियमित निगरानी के अभाव में रेस्ट हाउस का दुरुपयोग होने के आरोप अब खुलकर सामने आ रहे हैं। कुमेली पर्यटन स्थल पर मकर संक्रांति के अवसर पर विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में पर्यटन स्थल पर इस तरह की गतिविधियों का राजफाश प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। ऐसे कृत्यों से राज्य का नाम भी खराब होता है, इसलिये प्रशासन को ऐसी जगहों की जांच और निगरानी करनी चाहिये।



