इंदौर (म.प्र.) : कई बार ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके है, जिसमें भिखारियों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो चुके है, ऐसे ही अब इंदौर शहर में प्रशासन ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान चलाया है। इस दौरान कुष्ठ रोग से जूझ रहे 50 साल के एक भिखारी को भी बचाया गया है। वहीं शुरुआती जांच के दौरान पता चला है कि यह भिखारी तीन मकानों, एक कार और तीन ऑटो रिक्शा समेत लाखों रुपये की संपत्ति का मालिक है। बता दें कि प्रशासन ने इंदौर में भीख लेने के साथ ही भीख देने और भिखारियों से कोई सामान खरीदने तक पर कानूनी रोक लगा रखी है। वहीँ प्रशासन का दावा है कि शहर ‘भिक्षुकमुक्त’ है। जबकि सामने चौंकाने वाला मामला आया है।
कार से भीख मांगने जाता है भिखारी :
महिला और बाल विकास विभाग के अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया है कि आम लोगों की सूचना पर सराफा क्षेत्र से एक कुष्ठ रोगी को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराने के लिए बचाया गया है। उन्होंने बताया, ‘‘हमें पता चला है कि इस व्यक्ति के पास तीन पक्के मकान हैं। इनमें तीन मंजिलों वाला एक भवन भी शामिल है, भिखारी के पास बेहिसाब सम्पति की जानकारी मिली है। इसके अलावा, उसके पास तीन ऑटो रिक्शा भी हैं जिन्हें उसने किराये पर दे रखा है।’’ उन्होंने बताया कि इस व्यक्ति के पास एक कार भी है जिसमें बैठकर वह भीख मांगने जाता है और इसके लिए उसने चालक भी रखा हुआ है, जिसे वह वेतन भी देता है, लेकिन फिर भी वह भीख मांगता है।
सराफा क्षेत्र में दिया उधार :
इस मामले में दिनेश मिश्रा ने बताया, ‘’कुष्ठ रोग से जूझ रहा यह व्यक्ति पहियों के सहारे घिसटने वाली गाड़ी पर बैठकर भीख मांगता है।’’ दिनेश मिश्रा के मुताबिक, यह व्यक्ति 2021-22 से लगातार भिक्षावृत्ति कर रहा है। यह भी पता चला है कि उसने सराफा क्षेत्र में लोगों को चार से पांच लाख रुपये उधार दिए हैं, जिनसे वह दैनिक रूप से ब्याज भी वसूलता है। उन्होंने बताया है कि, “इस ब्याज से वह हर दिन 1,000 से 2,000 रुपये कमाता है। इसके अलावा, उसे रोजाना 400 रुपये से 500 रुपये भीख के तौर पर मिल जाते हैं।” मिश्रा के मुताबिक, इस व्यक्ति को एक आश्रय गृह में रखा गया है।
भिक्षुकमुक्त शहर है इंदौर :
वहीँ यह मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने बताया है कि इंदौर ‘भिक्षुकमुक्त शहर’ है और भिक्षावृत्ति की सूचना मिलने पर अभियान चलाकर भिखारियों का पुनर्वास किया जाता है। उन्होंने कहा कि सराफा क्षेत्र में भिक्षावृत्ति से बचाए गए व्यक्ति की संपत्तियों के बारे में प्रशासन को शुरुआती जानकारी मिली है और तथ्यों की जांच के बाद उचित कानूनी प्रावधानों के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। शहर में एक भी भिक्षुक नहीं रहेगा।
भिखारी के पास कितनी संपत्ति :
1 तीन पक्के मकान।
2 तीन मंजिला मकान – भगत सिंह नगर (16×45)।
3 शिवनगर में 600 स्क्वायर फीट का मकान।
4 अलवास में 1 BHK शासन द्वारा प्रदत्त मकान।
5 तीन ऑटो किराए पर।
6 एक डिज़ायर कार।
7 सराफा में ब्याज पर पैसा देने का काम।
पहले मिस्त्री का काम करता था :
भिक्षावृत्ति उन्मूलन के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ‘प्रवेश’ की अध्यक्ष रूपाली जैन ने कहा है कि कुष्ठ रोग से जूझ रहे इस व्यक्ति के मामले को मानवीय नजरिये से देखा जाना चाहिए क्योंकि उसने लाखों रुपये की कथित संपत्ति भीख मांगकर नहीं बनाई है। उन्होंने बताया है कि यह व्यक्ति कुछ साल पहले मकान बनाने वाले मिस्त्री के तौर पर काम करता था, लेकिन कुष्ठ रोग के कारण उंगलियों और पैरों को गंभीर नुकसान के बाद वह यह काम जारी नहीं रख सका और सामाजिक व पारिवारिक भेद-भाव का शिकार होने के बाद उसने सराफा क्षेत्र की मशहूर चाट-चौपाटी के पास रात के वक्त भीख मांगनी शुरू कर दिया, वह खाली बैठकर क्या करेगा यह सोचकर शायद उसने यह कदम उठाया हो, फिर भी उससे मिलकर आवश्यक कदम उठाये जायेंगे।



