रायपुर : छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख बड़ी बुनियादी ढांचा विकास योजना है, जिसका उद्देश्य राज्य में अच्छे और बेहतर राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे और इकोनॉमिक कॉरिडोर का जाल बिछाकर लॉजिस्टिक्स दक्षता और कनेक्टिविटी में सुधार करना है। इसके तहत प्रमुख रूप से राजधानी रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे (464 किमी) का निर्माण किया जा रहा है, जिससे यात्रा का समय घटकर 7-8 घंटे हो जायेगा, वहीँ इसमें चालीस करोड़ रूपये का घोटाला सामने आया है। अब भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने गिरफ्तार 3 लोकसेवकों के खिलाफ आज विशेष न्यायालय (एसीबी), रायपुर में प्रथम पूरक चालान पेश किया है। इसमें बताया गया है कि आरोपियों की वजह से शासन को 40 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।
इस घोटाले में दिनेश पटेल (तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा), लेखराम देवांगन (तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 24, ग्राम टोकरो) एवं बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी, ग्राम भेलवाडीह) को 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।वहीँ ब्यूरो में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 30/2025 में धारा 7 सी, 12 भ्र.नि.अ. 1988 (संशोधित 2018) एवं धारा 409, 467, 471, 420, 120-बी भादवि के तहत प्रकरण दर्ज है।
इस मामले में एसीबी ने पूरक चालान के जरिए बताया कि तीनों आरोपियों से संबंधित प्रकरणों में प्रथम दृष्टया शासन को कुल ₹39,65, 89, 257 की आर्थिक क्षति सामने आई है। इस प्रकरण में अन्य आरोपियों के विरुद्ध भी विवेचना जारी है, जिसमें अन्य आरोपी भी सामने आ सकते है।
प्रकरण में दर्ज विभिन्न धाराओं में तहत लोकसेवक, मुआवजा प्राप्त करने वाले व्यक्ति एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र कर भारतमाला परियोजना रायपुर- विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के भू-अर्जन प्रकरण में शासन द्वारा अर्जित भूमि को पुनः शासन को विक्रय कर मुआवजा देने, निजी भूमि के गलत मुआवजा देने, बैकडेट में बटवारा एवं नामांतरण करने, भूमि स्वामी के बदले किसी अन्य को मुआवजा देने तथा निजी भूमि के गलत मुआवजा एवं उसके टुकड़े कर उपखंडों में विभाजित कर शासन को हानि कारित करने के आरोप हैं। इन आरोपियों के इस कृत्य से शासन को करोड़ों रूपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
आरोपियों की भूमिका :
अभियुक्त दिनेश पटेल की भूमिका : तत्कालीन पटवारी हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा दिनेश पटेल ने खाता दुरुस्ती/ प्रपत्र-10 / आपत्ति निराकरण आदि के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया है, अवार्ड के समय अधिग्रहीत भूमि को कृत्रिम उपखण्डों में विभाजित दर्शाकर अधिक मुआवजा भुगतान की स्थिति बनाई गई। फलस्वरूप शासन को 30,82,14,868 रुपए की आर्थिक क्षति प्रथम दृष्टया परिलक्षित है, जिसका जिम्मेदार दिनेश को बताया गया है।
अभियुक्त लेखराम देवांगन की भूमिका : तत्कालीन पटवारी (ग्राम टोकरो, हल्का नं. 24) लेखराम देवांगन ने खाता दुरुस्ती/प्रपत्र- 10 / भुगतान प्रतिवेदन आदि के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया। अवार्ड के समय “मूल खसरों को कृत्रिम उपखण्डों में दर्शाकर वास्तविक देय राशि की तुलना में अत्यधिक मुआवजा भुगतान कराया गया। फलस्वरूप शासन को 27,16,26,925 रुपए की आर्थिक क्षति प्रथम दृष्टया परिलक्षित है। जिसको लेकर कार्यवाही आगे बढ़ी है।
अभियुक्त लेखराम देवांगन की भूमिका : तत्कालीन पटवारी (ग्राम टोकरो, हल्का नं. 24) लेखराम देवांगन ने खाता दुरुस्ती/प्रपत्र- 10 / भुगतान प्रतिवेदन आदि के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया। अवार्ड के समय “मूल खसरों को कृत्रिम उपखण्डों में दर्शाकर वास्तविक देय राशि की तुलना में अत्यधिक मुआवजा भुगतान कराया गया। फलस्वरूप शासन को 27,16,26,925 रुपए की आर्थिक क्षति प्रथम दृष्टया परिलक्षित है। इसमें लेखराम भी अभियुक्त है। 40 करोड़ के घोटाले में अभी तक यही तीन प्रमुख आरोपी परिलक्षित है।



