ठगी की रकम के लेन-देन के लिये खाते उपलब्ध करवाने वाले 16 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में।

दुर्ग/भिलाई : वैसे तो क़ानूनी तौर पर आर्थिक अपराध को गंभीर आपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है, लेकिन किसी की पूंजी ठग ली जाती है, तो उसका जीना मुश्किल हो जाता है। ऐसे ही साईबर ठगों के खिलाफ दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्यवाही की है। म्युल अकाउंट उपलब्ध कराने वालों को गिरफ्तार किया गया है। भारतीय साईबर अपराध समन्वय केन्द्र के समन्वय से हुई इस कार्यवाही में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो 22 बैंक खातों के जरिए लाखों रुपये की साईबर ठगी को अंजाम दे रहे थे। पूरा मामला थाना मोहन नगर क्षेत्र का है।

मामले के अनुसार 3 नवंबर 2025 को समन्वय पोर्टल से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि कुल 22 बैंक खातों का उपयोग साईबर अपराध से अर्जित रकम के लेन-देन के लिए किया जा रहा था। तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस ने पाया कि इन खातों के जरिए 10 लाख 67 हजार 665 रुपए की ठगी की राशि ट्रांसफर की गई थी, ये सभी खाते कुछ लोगों ने उपलब्ध करवाये थे।

पुलिस के अनुसार खाताधारकों ने जानबूझकर अपने बैंक खाते साईबर अपराधियों को उपलब्ध कराये थे। इन म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल अलग-अलग मामलों में ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था। प्रकरण में थाना मोहन नगर में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर 16 आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश और विवेचना अभी जारी है। ऐसे ही कई लोग लगातार कुछ पैसों की लालच में ऐसा कृत्य कर रहे है।

किसी के साथ साझा न करें ओटीपी, बैंकिंग जानकारी :

पुलिस ने मामले से जुड़े बैंक खातों का विवरण और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किये हैं। दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अपने बैंक खाते, एटीएम, ओटीपी या मोबाईल बैंकिंग की जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साईबर ठगी की सूचना तुरंत हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में दें। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्यवाही जारी रहेगी। वहीँ आपको बता दें कि ऐसे अपराधों के प्रति आपका जागरूक रहना काफी जरुरी है, अन्यथा एक बार ठगी गई राशि वापस मिलना मुश्किल है।