बोरवेल से निकल रहा था गर्म पानी, लैब ने जांच की तो सामने आया ये मामला….।

नर्मदापुरम (म.प्र) : जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, कई बार ऐसे मामले सामने आते है जो सोच से परे होते है। वहीँ सामने आये मामले के अनुसार यहां के ग्राम सोमलवाड़ाखुर्द में इन दिनों एक घर का बोरवेल चमत्कार नहीं, बल्कि गंभीर खतरे की घंटी बनकर सामने आया है। गांव निवासी शुभ्रा एवं आकाश महालहा के घर स्थित करीब 25 वर्ष पुराने बोरवेल से पिछले एक माह से लगातार गर्म पानी निकल रहा है, जो लोगों के लिये कौतुहल का विषय है और घर के लोगों के लिये मुसीबत भरा। शुरुआत में इसे लोग कौतूहल से देखने पहुंचे, लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि यह बोरवेल स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा साबित हो रहा है।

लैब रिपोर्ट ने उड़ाये होश :

जब इस पानी की लैब जांच कराई गई तो रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया। जांच में पानी का पीएच लेवल 5.90, टीडीएस 545 और हार्डनेस 600 पाई गई, जो तय मानकों से कहीं अधिक है। जल विशेषज्ञों का कहना है कि यह पानी पीने योग्य तो दूर, लंबे समय तक नहाने या घरेलू उपयोग के लिए भी अनुपयुक्त है। वहीँ इस मामले में विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि पानी में सल्फर तत्व की मात्रा अधिक हो सकती है। ऐसे पानी का लगातार उपयोग करने से चर्म रोग, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी, नया बोरवेल ही विकल्प :

अब परिवार वालों के लिये स्थिति यह है कि घर के सदस्यों को नहाने तक के लिए इस पानी में ठंडा पानी मिलाना पड़ रहा है, जबकि पीने के लिए परिवार को गांव के अन्य लोगों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। दूसरी ओर जल विशेषज्ञों ने प्रभावित परिवार को तत्काल इस बोरवेल का उपयोग बंद करने और नया नलकूप खुदवाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यह सल्फर स्रोत भविष्य में और अधिक गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। वहीँ अगर फिर नये नलकूप में भी यही दिक्कत सामने आई तो बड़ी मुश्किल होगी।

ग्रामीणों में दहशत का माहौल :

इस मामले के सामने आने के बाद से क्षेत्र के सभी ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल है। वहीँ इस मामले में गृहस्वामी आकाश महालहा ने बताया कि “एक महीने से बोरवेल से गर्म पानी आ रहा है। मजबूरी में हमें पीने का पानी दूसरे घरों से लाना पड़ रहा है।” वहीं प्रतीश महालहा का कहना है कि,“रिपोर्ट में पीएच और हार्डनेस का स्तर खतरनाक निकला है। अब घर में इसका उपयोग करना मुश्किल हो गया है।” ग्रामीण सुशांत मेहतो और सौरभ महतो बताते हैं कि गांव में ऐसा पहली बार देखा गया है। दूसरे गांवों से भी लोग इसे देखने आ रहे हैं, लेकिन यह चमत्कार नहीं बल्कि बीमारी को न्यौता है। वहीँ अब इसमें एक मात्र समाधान नया नलकूप खनन करवाना ही है।