बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के चर्चित हाईप्रोफाईल रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाईकोर्ट ने अपना विस्तृत आदेश जारी कर दिया है। जिसमें अदालत ने अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, इससे राजनैतिक हल्कों में हड़कम्प मच गया। मामले के अनुसार जून 2003 में हुई इस हत्या ने तत्कालीन अजीत जोगी सरकार को हिलाकर रख दिया था। उस समय इस हत्याकांड को राजनैतिक साजिश बताया गया था, जो इस निर्णय से सही साबित हो रही है।
तत्कालीन NCP के नेता स्व रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा व जस्टिस अरविंद वर्मा की डिवीजन बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। CBI की अपील स्वीकार करने के साथ ही हत्याकांड के प्रमुख आरोपित पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा व एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि न पटाने पर छह महीने अतिरिक्त कठोर कारावास का आदेश दिया है। अमित जोगी को हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह के अंदर आत्मसमर्पण करने का आदेश दे दिया है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में CBI और स्व जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अलग-अलग याचिका दायर कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को निर्देशित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जग्गी हत्याकांड की फाइल रिओपन कर सुनवाई की जा रही है। याचिकाकर्ता सतीश जग्गी के अधिवक्ता बीपी शर्मा ने डिवीजन बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया है।
CBI की ओर से उपस्थित अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन और राज्य की ओर से उपस्थित उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने संयुक्त रूप से निवेदन किया कि राज्य ने 31 मई 2007 को आवेदन पेशकर निचली अदालत द्वारा पारित मुख्य आरोपी अमित जोगी को बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी। उक्त आवेदन को इस कोर्ट की समन्वय पीठ ने 18 अगस्त 2011 को इस आधार पर खारिज कर दिया था। CBI द्वारा जांच किए जा रहे मामले में राज्य द्वारा दायर अपील की अनुमति के लिए आवेदन स्वीकार्य नहीं है।
इसके बाद CBI ने याचिका दायर कर 31 मई 2007 के फैसले और आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की समन्वय पीठ ने 12 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा विलंब के आधार पर इसे खारिज कर दिया था। इसके अतिरिक्त अमित ऐश्वर्या जोगी की बरी होने को चुनौती देने के लिए पुनरीक्षण याचिका को आपराधिक अपील में परिवर्तित करने की मांग करते हुए शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर याचिका को भी 19 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया था। वहीँ इस मामले में अब अंतिम फैसला सामने आया है।
सतीश जग्गी व CBI ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका :
18 अगस्त 2011, 12 सितंबर 2011 और 19 सितंबर 2011 के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सतीश जग्गी व CBI ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। इसके साथ ही आपको बता दें कि एनसीपी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी की हत्या ने उस समय की अजीत जोगी सरकार को हिला दिया था। यह घटना 4 जून 2003 की रात करीब 11 बजे की है, जब जग्गी अपनी कार से घर लौट रहे थे। मौदहापारा थाने के सामने अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं थी। गंभीर रूप से घायल जग्गी को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था, उस समय कई आरोपियों को सजा दे दी गई थी, लेकिन अमित जोगी बच गये थे, जिसे सतीश जग्गी ने मुख्य आरोपी बताया था और तबसे वो इस केस को लगातार लड़ रहे है।



