रायपुर : लगातार शराब घोटाले की जांच होते – होते, यह घोटाला 2000 करोड़ से बढ़कर 3000 करोड़ तक पहुँच चुका है। वहीँ इसको लेकर कार्यवाही अब भी जारी है, जिसमें छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्यवाही की है। ईडी की रायपुर जोनल ऑफिस टीम ने बीते 30 अप्रैल 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत राज्य के रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर जिलों में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान कुल 13 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया है।
ईडी की टीम ने जिन ठिकानों पर कार्यवाही की है, इस मामले में बताया जा रहा है कि वे शराब कारोबारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, व्यापारियों और कॉर्पोरेट संस्थाओं से जुड़े हुये थे। इन पर शराब घोटाले से अर्जित अवैध धनराशि को प्राप्त करने, संभालने, छिपाने या खपाने का संदेह है।
5.39 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त :
इस छापेमारी के दौरान ईडी ने 53 लाख रुपये नगद और करीब 3.234 किलोग्राम सोना एवं बुलियन जब्त किया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 4.86 करोड़ रुपये बताई गई है। कार्यवाही के दौरान कुल मिलाकर लगभग 5.39 करोड़ रुपये की नगदी और कीमती सामान जब्त किया गया है। इसके अलावा कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और डेटा भी बरामद किए गए हैं, जिनकी फिलहाल जांच की जा रही है। इसको लेकर ईडी ने बताया है कि वह आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), रायपुर द्वारा दर्ज मूल एफआईआर के आधार पर PMLA, 2002 के तहत छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच कर रही है। जांच में एक सुनियोजित और संगठित आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें राजनीतिक पदाधिकारी, वरिष्ठ नौकरशाह, शराब डिस्टिलर, FL-10A लाइसेंसधारी और उनके सहयोगी शामिल थे।
अब तक 9 लोगों की गिरफ्तारी :
जांच के दौरान ED अब तक मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत 9 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें एक सेवानिवृत्त IAS अधिकारी, तत्कालीन CSMCL के प्रबंध निदेशक (MD), तत्कालीन आबकारी आयुक्त, पूर्व आबकारी मंत्री, तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र और मुख्यमंत्री के तत्कालीन उप सचिव सहित कई अन्य आरोपी शामिल हैं। जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है, जिसमें शराब निर्माता, नगदी का लेन-देन संभालने वाले, हवाला नेटवर्क के जरिए धन पहुंचाने वाले, FL-10A लाइसेंसधारी और राजनीतिक सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह नेटवर्क वर्ष 2019 से 2022 के दौरान छत्तीसगढ़ में शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री के बदले अवैध कमीशन वसूलने में सक्रिय था। EOW/ACB द्वारा दाखिल चार्जशीट के अनुसार, इस घोटाले से अब तक लगभग 2,883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई होने का अनुमान लगाया गया है।
380 करोड़ की संपत्तियां अटैच :
जांच एजेंसी ने अब तक PMLA के तहत छह प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAOs) जारी किए हैं, जिनके माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी लगभग 380 करोड़ रुपये की चल एवं अचल संपत्तियां अटैच की गई हैं। अटैच की गई संपत्तियों में रिहायशी और व्यावसायिक अचल संपत्तियां, बैंक बैलेंस, वाहन, जेवरात और शेयर शामिल हैं। ये संपत्तियां विभिन्न आरोपियों और उनकी बेनामी संस्थाओं से संबंधित बताई गई हैं। ईडी ने इस मामले में अब तक 81 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ छह अभियोजन शिकायतें भी विशेष अदालत में दाखिल की हैं। मामले की सुनवाई फिलहाल विशेष अदालत, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जारी है। इसके साथ ही ईडी का कहना है कि हालिया छापेमारी में कई नए सबूत मिले हैं और जांच के आधार पर आगे भी अटैचमेंट, अभियोजन और अन्य कानूनी कार्यवाही की जायेगी। कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी और अब भी मामले की जांच जारी है।



