सालभर में दो हजार लोगों से चौंकाने वाली ठगी का नये तरीके का मामला आया सामने, आरोपी रंजीश कुमार गौड़ पुलिस की गिरफ्त में।

रायपुर : अलग-अलग तरह से ठगी के कई मामले सामने आते रहते है, कुछ सामान्य होते है तो कुछ चौंकाने वाले, ऐसे में अगर आप भी सोशल मीडिया पर शादी के लुभावने विज्ञापन देखकर अपनी जीवनसंगिनी तलाश रहे हैं, तो जरा ठहरिये, हम आपको बताने जा रहे है, इसके पीछे का काला सच, सोशल मीडिया पर चमकती एक खूबसूरत तस्वीर और उसके नीचे लिखा मोबाईल नंबर आपको वैवाहिक बंधन में तो नहीं, लेकिन कंगाल जरूर बना सकता है। कानपुर पुलिस ने एक ऐसे ही हाईटेक ‘शादी गिरोह’ का खुलासा किया है, जो मैरिज ब्यूरो की आड़ में देश के कुंवारों को अपना शिकार बना रहा था। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का रहने वाला रंजीश कुमार गौड़ है, जिसे पुलिस ने कानपुर में तीन कॉल सेंटरों पर छापा मारकर दबोच लिया है, जो अब पुलिस की गिरफ्त में है।

सुंदरियां बनकर 23 युवतियों करती थीं बातें :

इस मामले को लेकर पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया है कि आरोपी रंजीश ने कानपुर के नौबस्ता और किदवईनगर इलाके में ‘परफेक्ट रिश्ते’, ‘शादी मैच इंडिया’ और ‘शादी मैच’ नाम से तीन कॉल सेंटर खोल रखे थे। उसने एमएसएमई विभाग में रजिस्ट्रेशन भी कराया था। इन कॉल सेंटरों में 23 युवतियां काम करती थीं। इन युवतियों का काम सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर मैरिज ब्यूरो की खूबियां और विज्ञापन पोस्ट करना था, जिससे लोग उनके सम्पर्क में आयें। जब कोई इच्छुक व्यक्ति शादी की चाह में इनसे संपर्क करता, तो ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर बेहद खूबसूरत और आकर्षक युवतियों की फर्जी तस्वीरें उन्हें भेजते थे। जैसे ही कोई ग्राहक इस जाल में फंसता, उसका खेल शुरू हो जाता था।

पेनाल्टी का नियम और फर्जी रसीदों का खेल :

इस मामले में बताया जा रहा है कि ग्राहकों की प्रोफाईल बनाने, रजिस्ट्रेशन करने और लड़की का नंबर देने के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी। भुगतान के भरोसे के लिए ‘प्रैंक पेमेंट’ नाम के एक खास ऐप से नकली रसीदें बनाकर ग्राहकों को भेजी जाती थीं। लड़की से बात कराने के नाम पर एक मोटी ‘सुरक्षा राशि’ ली जाती थी, जिससे कार्य आगे बढ़ाया जाता था।

24 घंटे में एक बार ही बात :

इनके नियम इतने कड़े थे कि टेलीकॉलर युवतियां खुद ही ग्राहक की मंगेतर या प्रेमिका बनकर बात करती थीं। नियम के मुताबिक, 24 घंटे में सिर्फ एक बार ही बात कराई जाती थी। अगर कोई उत्सुक दूल्हा दिन में दूसरी बार फोन कर देता, तो उस पर भारी-भरकम ‘पेनाल्टी’ (जुर्माना) ठोंक दिया जाता था। इस तरह से बाराबंकी के रहने वाले चंद्रेश कुमार से इस गिरोह ने सिर्फ तीन महीनों में चार लाख ठग लिये। इस घटना के दौरान जब चंद्रेश को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत की, तब जाकर इस करोड़ों के हैरानजनक साम्राज्य का खुलासा हुआ।

साईबर विशेषज्ञ वकील के संरक्षण का आरोप :

एडीसीपी क्राइम अंजलि विश्वकर्मा की जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने पिछले एक साल में करीब 2,000 लोगों से 5 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। इस काले धंधे में रंजीश के साथ छत्तीसगढ़ के ही अमित और करम पटेल भी शामिल हैं। इनमें से अमित एक ‘साईबर एडवोकेट’ (वकील) है। जब भी किसी ठगी के खिलाफ पुलिस में शिकायत होती या बैंक खाता फ्रीज होता, तो अमित कानूनी दांव-पेंच का इस्तेमाल कर और पैसे वापस करने का नाटक कर बैंक खातों को दोबारा चालू करवा लेता था। इस तरह से इनका कारोबार चलता रहता था।

43 कीपैड, 13 एंड्रायड फोन बरामद :

वहीँ कार्यवाही के दौरान पुलिस ने कॉल सेंटरों से 43 कीपैड मोबाईल, 13 एंड्रॉइड फोन, 500 पंपलेट और कई फर्जी दस्तावेज जब्त किए हैं। फिलहाल मुख्य आरोपी रंजीश पुलिस की गिरफ्त में है, जबकि उसकी महिला मित्र जागृति (जो उन्नाव में ऐसा ही सेंटर चलाती है) और साईबर वकील अमित फरार हैं। दुर्ग के एसपी सत्य प्रकाश तिवारी ने बताया है कि आरोपी रंजीश का छत्तीसगढ़ में फिलहाल कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं मिला है, लेकिन पुलिस उसके आपराधिक इतिहास को खंगाल रही है। इससे और भी खुलासे होने की उम्मीद जताई गई है।