धर्म/संस्कृति : साल 2026 में सावन का पवित्र महीना जिसे श्रावण कहते है 30 जुलाई 2026, गुरुवार से शुरू होकर 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को समाप्त हो जायेगा। यह 31 दिनों का महीना पूरी तरह से भगवान शिव की आराधना को समर्पित होता है। इसे शिव का महीना माना जाता है और इस पूरे महीने में भगवान शिव की आराधना की जाती है। जिसमें रूद्राभिषेक के बाद बिल्वपत्र और भस्म चढ़ाने समेत कई परंपराए शामिल हैं, लेकिन ऐसा क्यों है? क्यों शिवजी को सावन का महीना पसंद है और इस महीने का नाम सावन कैसे पड़ा…? आइए समझते हैं शिव पूजा की परंपराएं और कथाओं से…
सावन, दक्षिणायन में आता है। जिसके देवता शिव हैं, इसीलिए इन दिनों उन्हीं की आराधना शुभ फलदायक होती है। सावन के दौरान बारिश का मौसम होता है। पुराणों के मुताबिक शिवजी को चढ़ने वाले फूल-पत्ते बारिश में ही आते हैं इसलिए सावन में शिव पूजा की परंपरा बनी। स्कंद पुराण में भगवान शिव ने सनत्कुमार को सावन महीने के बारे में बताया कि मुझे श्रावण बहुत प्रिय है। इस महीने की हर तिथि व्रत और हर दिन पर्व होता है, इसलिए इस महीने नियम-संयम से रहते हुए पूजा करने से शक्ति और पुण्य बढ़ते हैं।
इस महीने का नाम श्रावण क्यों…? स्कंद और शिव पुराण के हवाले से जानकार इसकी दो वजह बताते हैं। पहली, इस महीने पूर्णिमा तिथि पर श्रवण नक्षत्र होता है। इस नक्षत्र के कारण ही महीने का ये नाम पड़ा। दूसरी वजह, भगवान शिव ने सनत्कुमार को बताया कि इसका महत्व सुनने के योग्य है। जिससे सिद्धि मिलती है, इसलिए इसे श्रावण कहते हैं। इसमें निर्मलता का गुण होने से ये आकाश के समान है, इसलिए इसे नभा भी कहा गया है।
कैसे करें शिव की पूजा? :
सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें। अपने घर के मंदिर या किसी पास के शिवालय (शिव मंदिर) में जाएं। शिवलिंग पर शुद्ध जल चढ़ायें। इसके बाद कच्चे दूध, दही, शहद, घी और चीनी (पंचामृत) से अभिषेक करें। अंत में एक बार फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें। भगवान शिव को तीन पत्तियों वाला साफ बेलपत्र (चिकनी सतह शिवलिंग से स्पर्श करती हुई) और सफेद फूल चढ़ाएं। शिवजी को भांग, धतूरा, मदार (आक) के फूल और भस्म बहुत प्रिय हैं। चंदन का त्रिपुंड लगाएं। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें।
दुर्घटनाओं से रक्षा और बेहतर स्वास्थ्य के लिये करें मन्त्रों का जाप :
कहा जाता है कि दवा के साथ प्रार्थना का भी काफी महत्व होता है, और हिन्दू धर्मों में मन्त्रों का बहुत महत्व है, जो किसी व्यक्ति की ईच्छापूर्ति अथवा रक्षा आदि के लिये महत्वपूर्ण होते है, हिन्दू धर्म में मंत्रों का अर्थ केवल प्रार्थना नहीं, बल्कि विशेष ध्वनि और कंपन है जो मन को शांत करते हैं, भगवान से जुड़ने के लिये एकाग्रता बढ़ाते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। मंत्रों का नियमित उच्चारण आध्यात्मिक जागृति और मानसिक शांति का एक शक्तिशाली माध्यम है।
वर्तमान में जिस तरह से संसार में बीमारियाँ और दुर्घटनायें लगातार बढ़ती ही जा रही है, ऐसे में मन्त्र जाप का बहुत महत्व है, ऐसे सावन मास में भगवान शिव के महामृत्युंजय मन्त्र का जाप बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करता है और बीमार व्यक्ति को जल्द ठीक करता है, यह आस्था विषय है, इस मन्त्र का जाप नियमित रूप से करने से लम्बी आयु और स्वस्थ जीवन प्राप्त होता है, महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥) भगवान शिव जी का सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण मंत्र है। इसका अर्थ है कि हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर ओर सुगंध फैलाते हैं और सभी का पोषण करते हैं। जैसे एक ककड़ी बेल से पककर आसानी से अलग हो जाती है, वैसे ही वे हमें मृत्यु और सांसारिक बंधनों से मुक्त करें।
अकाल मृत्यु से रक्षा : इसे ‘मृत्युंजय’ (मृत्यु को जीतने वाला) मंत्र कहा जाता है। मान्यता है कि इसके निरंतर जाप से अकाल मृत्यु का भय और दुर्घटनाओं का संकट टलता है।
रोग और कष्टों का निवारण : यह मंत्र शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक उपचार के लिए बहुत प्रभावी माना गया है। इसके कंपन से शरीर की नाड़ियां शुद्ध होती हैं और असाध्य रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है।
दोषों से मुक्ति : ज्योतिष में इसे कालसर्प दोष, मांगलिक दोष और अन्य ग्रह-बाधाओं को शांत करने का अचूक उपाय माना गया है
आध्यात्मिक विकास : यह मंत्र केवल जीवन की रक्षा नहीं करता, बल्कि मनुष्य को मोक्ष (जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति) की ओर ले जाता है।
इस मन्त्र का आप जाप करें तो ज्यादा बेहतर है अथवा रोजाना सुबह शाम इस मन्त्र को अपने म्यूजिक सिस्टम पर भी नियमित रूप से चलाकर सुन सकते है, जिससे घरेलू नकारात्मकता दूर होती है। इसके साथ ही श्री हनुमान चालीसा और शनिदेव के मन्त्र का जाप काफी महत्वपूर्ण होता है, जो आपके भाग्य का उदय करता है और आपको मुसीबतों से रक्षित करता है।



