रायपुर : राजधानी रायपुर में प्रधानमंत्री आवास घेराव के विरोध के दौरान कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने से हालात तनावपूर्ण हो गये, जिसे पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। जानकारी सामने आई है कि खम्हारडीह थाना क्षेत्र स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन के बाहर हुए हंगामे के मामले में पुलिस ने कांग्रेस के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। इस पूरे घटनाक्रम में 16 पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायल पुलिसकर्मियों में एक पीएसआई और महिला आरक्षक भी शामिल हैं, जिनको चोटें आई है।
पुलिस के अनुसार 22 जुलाई को भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम के विरोध में राजीव भवन के सामने सुरक्षा व्यवस्था के लिए खम्हारडीह थाना, रक्षित केंद्र तथा अन्य थानों के पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से नारेबाजी करते हुए बैरिकेडिंग की ओर बढ़े। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं रुके और पुलिस बल से उलझ गये, भीड़ में से किसी ने पथराव कर दिया, जिसके बाद हालात बिगड़ गये।
एफआईआर के मुताबिक बताया गया है कि समझाईश के बावजूद प्रदर्शनकारी उग्र हो गये और उन्होंने पुलिस अधिकारियों व जवानों के साथ धक्कामुक्की करते हुए अभद्र व्यवहार किया। जिसको लेकर आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर कांच की बोतलें, पत्थर, लकड़ियां और जूते पुलिस बल पर फेंके, इसी दौरान भाजपा कार्यकर्ता भी चोटिल हुये। इस दौरान दूसरी तरफ पीएसआइ देवराज सिंह के सिर में चोट लगी, जबकि महिला आरक्षक सीमा बंजारे के हाथ में गंभीर चोट आई। इसके अलावा ड्यूटी में तैनात कुल 16 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी घायल हुए, जिनका उपचार कराया गया।
इस मामले में पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई से शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न हुई और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया गया। घटना के बाद थाना प्रभारी निरीक्षक भावेश कुमार गौतम की रिपोर्ट पर खम्हारडीह थाने में एफआइआर दर्ज की गई है।
इनके खिलाफ मामला दर्ज :
एफआइआर में सुनील कुकरेजा, विनोद तिवारी, सकलेन कामदार, आकाश तिवारी, अजीत कुकरेजा, हनी बग्गा, शांतनु झा, गावेश साहू, खुबी डहरिया, सागर दुल्हानी, अजीज भिंसरा, अमित तिवारी समेत अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नामजद आरोपी बनाया गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 191, 121(1), 221 और 132 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। पुलिस घटना के वीडियो फुटेज, सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अन्य शामिल लोगों की भी पहचान कर रही है।
पुलिस कमिश्नर ने घायल पुलिस जवानों का जाना हाल :
इस घटना की जानकारी मिलते ही रायपुर के पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला रामकृष्णा केयर अस्पताल पहुंचे और भर्ती पुलिस जवानों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों से घायल जवानों के स्वास्थ्य एवं उपचार की विस्तृत जानकारी ली तथा सभी घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए। उन्होंने जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। घटना के अनुसार घायल जवान कलेश्वर वर्मा ने बताया है कि बैरिकेटिंग के दौरान भीड़ के बीच फंस जाने से उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल लाया गया। वहीं प्रशिक्षु उप निरीक्षक (पीएसआई) देवराज सिंह के सिर पर बोतल लगने से गंभीर चोट आई है, जिनका उपचार चिकित्सकों की निगरानी में जारी है।
अन्य घायल आरक्षकों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस दौरान पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल, एसीपी नीलेश द्विवेदी, टीआई राजेश मरई सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
बीजेपी-कांग्रेस में हुआ टकराव :
बीते दिन दिल्ली में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास घेराव के विरोध में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भाजपाई कांग्रेस भवन का घेराव करने निकले थे। इस प्रदर्शन में कई कैबिनेट मंत्री भी शामिल हुये। प्रदर्शन के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। भाजपा के कांग्रेस मुख्यालय घेराव के दौरान हुए बवाल में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज किए जाने का कांग्रेस ने विरोध करते हुए इसे सरकार की फांसीवादी नीति बताया,तो वहीं भाजपा ने आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि हर अपराधों के पीछे कांग्रेस के लोग मिलते हैं।



