हाथ में पेन लेकर शिक्षिका ने बनाई फ़िल्मी गानों पर रील, नैतिकता और जिम्मेदारी पर उठा सवाल।

सारंगढ़ : हर जगह की अपनी मर्यादा होती है, रील बनाने के शौक़ीन जगह और मर्यादा का पालन नहीं करते, कोई रेल्वे स्टेशन में धक्कामुक्की करके रील बना रहा है, तो कोई मंदिर में अश्लील गानों पर, वहीँ कई सरकारी नौकरी और स्थानों पर भी रील बना रहा है, जिसके कारण उक्त स्थान की नैतिकता और मर्यादा के साथ अनुशासन की उम्मीद की जाती है, ऐसे ही बीते दिनों बिलासपुर के मस्तूरी थाने में पदस्थ आरक्षक देवानंद कैवर्त ने पुलिस वर्दी में अपनी पत्नी के साथ संबलपुरी गाने ‘हाय रानी, हेलो रानी’ पर डांस करते हुए रील बनाई थी, जिसके बाद काफी बवाल हुआ और आरक्षक को निलम्बित भी किया गया, ऐसे कई मामले सामने आ चुके है। वहीँ अब आपको बताते है तजा मामला, शिक्षकों की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने और शैक्षणिक माहौल बनाए रखने की होती है, लेकिन सारंगढ़ में सामने आए एक वायरल वीडियो ने इसी जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक शासकीय कन्या प्राथमिक शाला कुटेला मे पदस्थ शिक्षिका स्कूल परिसर में हाथ में पेन लेकर छत्तीसगढ़ी गानों पर रील बनाती हुई नजर आ रही हैं। 

ऐसे में सवाल उठता है कि शिक्षक बच्चों को क्या ज्ञान देगा जब वह खुद ही मर्यादा और अनुशासन का पालन नहीं करता है, ऐसे में बच्चों को क्या शिक्षा मिल सकेगी? ये बड़ा सवाल खड़ा होता है।

स्कूल परिसर में फिल्मी गानों पर रील वायरल :

यह वीडियो सामने आने के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि, आखिर यह वीडियो स्कूल समय में बनाया गया था या नहीं और यदि ऐसा हुआ, तो उस दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई किस तरह प्रभावित हुई अथवा नहीं? बताया जा रहा है कि, वायरल वीडियो सारंगढ़ क्षेत्र के एक स्कूल परिसर का है। वीडियो में शिक्षिका हाथ में पेन लेकर फिल्मी गानों पर वीडियो बनाती दिखाई दे रही हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रहे हैं, वहीँ प्रशासनिक कार्यों पर आम जनता पहले ही कई बार सवाल उठाती रहती है ,ऐसे में यह मामला शर्मनाक है।

स्कूल टाइम में रील बनाने का दावा :

इस वायरल वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि, इसे स्कूल समय के दौरान बनाया गया। हालांकि, इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि वीडियो वास्तव में शिक्षण कार्य के निर्धारित समय में बनाया गया है, तो यह गंभीर विषय हो सकता है। स्कूल में शिक्षक की प्राथमिक जिम्मेदारी विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों के प्रति होती है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि वीडियो बनाए जाने के दौरान कक्षा में शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ था या नहीं। वहीँ अब मामले में अब तक स्कूल प्रबंधन या शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। अब देखने वाली बात होगी कि, क्या संबंधित शिक्षा अधिकारी इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर मामले की जांच कराते हैं? यदि जांच में स्कूल समय में शिक्षिका द्वारा गैर-शैक्षणिक गतिविधि किए जाने की पुष्टि होती है, तो क्या विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा या कोई कार्यवाही की जायेगी। हालाँकि इस प्रकार के कृत्य एक शिक्षक द्वारा स्वीकार योग्य नहीं है, मानते है, हर इन्सान की अपनी ईच्छा और दुनियां भी होती है, लेकिन ओहदे का सम्मान भी बरकरार रखना पड़ता है।