रायपुर : गणेशोत्सव के समापन के साथ ही राजधानी रायपुर में 26 सितंबर से पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) की शुरुआत होने जा रही है। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का यह महापर्व 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ संपन्न होगा। पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध संपन्न किया जाएगा, जबकि 27 सितंबर को प्रतिपदा तिथि के साथ मुख्य श्राद्ध कर्मों की शुरुआत होगी। पर्व को लेकर शहर के धार्मिक स्थलों और बाजारों में तैयारियां जोरों पर हैं।
16 दिनों तक धरती पर आते हैं पितर, तर्पण की विशेष मान्यता :
वेदाचार्य प्रदीप शुक्ला और भोला तिवारी के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में यह माना गया है कि पितृपक्ष के इन 16 दिनों में पितर धरती पर आते हैं और वंशजों द्वारा अर्पित किए गए तर्पण व अन्न दान से तृप्त होते हैं। यही कारण है कि यजमान पितृपक्ष शुरू होने से पहले ही पूर्वजों के सत्कार की तैयारियों में जुट जाते हैं। लोग अंतिम समय की भागदौड़ से बचने के लिए अभी से पूजन सामग्री की खरीदारी और अनुष्ठान के नियमों की जानकारी लेने आचार्यों के पास पहुंच रहे हैं।
सामाजिक आयोजनों और पारिवारिक भोज के लिए खरीदारी शुरू :
पितृपक्ष के दौरान शहर में बड़े पैमाने पर धार्मिक व सामाजिक गतिविधियां देखने को मिलती हैं। कई सामाजिक संगठनों द्वारा पितरों की शांति के लिए वर्षों से भव्य भोग-भंडारे आयोजित करने की परंपरा निभाई जा रही है। ऐसे आयोजनों के लिए संस्थाओं के प्रतिनिधि थोक बाजारों से राशन और अन्य सामान जुटाने लगे हैं। वहीं, पारिवारिक स्तर पर पितृ भोज कराने वाले लोग भी फुटकर बाजारों का रुख कर रहे हैं, जिससे किराना और दैनिक उपभोग के बाजारों में ग्राहकी में उल्लेखनीय उछाल आया है।
शास्त्री बाजार और गोलबाजार में रौनक, कीमतें स्थिर :
शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों—शास्त्री बाजार, गोलबाजार और इमरतराई में पूजन सामग्री की विशेष दुकानें सज चुकी हैं। श्राद्ध और तर्पण के लिए आवश्यक सामग्री जैसे काला तिल, जौ, कुशा, सफेद चंदन, रोली, जनेऊ, कपूर और मिट्टी के दीयों का भरपूर स्टॉक व्यापारियों ने जुटाया है। व्यापारियों का कहना है कि इस वर्ष उपभोक्ताओं के बजट को ध्यान में रखते हुए बेहतर गुणवत्ता का सामान किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में सामग्रियों के दाम लगभग स्थिर बने हुए हैं, जिससे आम खरीदारों को बड़ी राहत मिली है।



