भुवनेश्वर के प्रसिद्ध लिंगराज मंदिर पहुंचे सीएम विष्णु देव साय, सपत्नीक की पूजा-अर्चना; छत्तीसगढ़ की समृद्धि और खुशहाली के लिए मांगा आशीर्वाद।

रायपुर/भुवनेश्वर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने ओडिशा प्रवास के दौरान सोमवार को राजधानी भुवनेश्वर स्थित ऐतिहासिक एवं सुप्रसिद्ध भगवान लिंगराज मंदिर में शीश नवाया। मुख्यमंत्री ने अपनी धर्मपत्नी के साथ मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि-विधान के साथ देवाधिदेव महादेव की विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने भगवान लिंगराज से छत्तीसगढ़ राज्य की निरंतर उन्नति, चौमुखी विकास तथा समस्त प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।

मंदिर परिसर की दिव्यता ने किया अभिभूत :

दर्शन-पूजन के उपरांत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भगवान लिंगराज की इस पावन भूमि पर आकर शीश नवाने का अवसर मिलना उनके लिए परम सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर की अलौकिक दिव्यता और गहन आध्यात्मिक वातावरण अंतर्मन को असीम शांति तथा नई सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। मुख्यमंत्री ने कामना की कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक नागरिक और परिवार खुशहाल रहे तथा राज्य में सौहार्द्र का वातावरण निरंतर बना रहे।

प्राचीन स्थापत्य कला और सनातन विरासत की सराहना :

मुख्यमंत्री ने लिंगराज मंदिर के भव्य शिल्प वैभव और वास्तुकला की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत के प्राचीन देवालय केवल पूजा-पाठ या धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सहस्रों वर्षों पुरानी भारतीय सभ्यता, समृद्ध संस्कृति और अद्वितीय शिल्प परंपरा के जीवंत प्रतीक हैं। लिंगराज मंदिर की ऐतिहासिक भव्यता और नक्काशीदार संरचना हमारी सनातन संस्कृति के गौरवशाली इतिहास तथा पूर्वजों के उत्कृष्ट निर्माण कौशल का सुंदर दर्शन कराती है।

ओडिशा-छत्तीसगढ़ के साझा सांस्कृतिक रिश्तों पर बल :

दोनों राज्यों के पारंपरिक संबंधों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ सिर्फ भौगोलिक सीमा से जुड़े पड़ोसी राज्य ही नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरातल पर भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। दोनों राज्यों के जनजीवन, लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और आस्था में कई समानताएं देखने को मिलती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रवास दोनों राज्यों के मध्य साझा सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आपसी आत्मीय संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं।