57वीं GST काउंसिल का ऐतिहासिक निर्णय : करदाताओं को दंडात्मक कार्यवाही से बड़ी राहत, गिरफ्तारी के अधिकार समाप्त।

नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में संपन्न हुई 57वीं जीएसटी परिषद (GST Council) की बैठक में देश के व्यापार जगत, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (MSMEs) तथा आम करदाताओं के हित में कई ऐतिहासिक और दूरगामी फैसले लिए गए हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य कर अनुपालन की जटिलताओं को कम करना, अनावश्यक कानूनी मुकद्दमेबाजी पर अंकुश लगाना और मामूली तकनीकी या लिपिकीय गलतियों के कारण व्यापारियों पर होने वाली कठोर कार्यवाही को समाप्त करना है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि अनजाने में हुई भूल या रिटर्न दाखिल करने में देरी को अब अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे केवल ब्याज, वैधानिक देनदारी और आनुपातिक जुर्माने तक ही सीमित रखा जाएगा।

गिरफ्तारी के अधिकार समाप्त, मुकद्दमा चलाने की वित्तीय सीमा में पांच गुना बढ़ोत्तरी :

जीएसटी व्यवस्था के अंतर्गत कर प्रशासन के ढांचे में सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव अधिकारियों के विवेकाधीन अधिकारों को नियंत्रित करके किया गया है:

  • गिरफ्तारी के अधिकार वापस : जीएसटी कानून के अंतर्गत सामान्य कर मामलों में अधिकारियों के पास उपलब्ध गिरफ्तारी की शक्तियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इससे कारोबारियों में बने रहने वाले प्रशासनिक भय के माहौल का अंत होगा।
  • अभियोजन की सीमा में वृद्धि : किसी भी करदाता के विरुद्ध आपराधिक मुकद्दमा (Prosecution) शुरू करने की न्यूनतम वित्तीय देयता सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर सीधे ₹5 करोड़ कर दिया गया है।
  • अदालती विवेक को प्राथमिकता : कानून से न्यूनतम अनिवार्य कारावास के कठोर प्रावधानों को विलोपित कर दिया गया है। अब किसी भी गंभीर आर्थिक अपराध के मामले में आर्थिक दंड अथवा कारावास का निर्धारण पूरी तरह से न्यायिक अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

पेनाल्टी में 60% की कटौती और छोटे मामलों के पुराने नोटिस होंगे रद्द :

छोटे कारोबारियों को राहत देते हुए जीएसटी परिषद ने प्रक्रियात्मक त्रुटियों के लिए आर्थिक दंड की दरों में भारी कटौती की है:

  • सामान्य जुर्माने में राहत: जिन सामान्य उल्लंघनों के लिए कानून में अलग से कोई विशिष्ट दंड निर्धारित नहीं था, वहां लगने वाली अधिकतम ₹25,000 की पेनाल्टी को घटाकर अब ₹10,000 कर दिया गया है।
  • कम राशि के नोटिस पर रोक: अब ₹10,000 अथवा उससे कम की कर राशि वाले मामलों में कोई नया विभागीय नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी पुराने लंबित नोटिसों को भी आधिकारिक रूप से निरस्त कर वापस ले लिया जाएगा।
  • समान प्रशासनिक मानक: पूरे देश में कर नोटिस और विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए एक सुसंगत गाईडलाईन लागू की जायेगी, ताकि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग व्याख्याओं के आधार पर करदाताओं का उत्पीड़न न हो।

अंतर्राज्यीय माल परिवहन में पारदर्शिता : चौकियों पर मनमानी जब्ती पर पूर्ण विराम :

सड़कों पर वाणिज्यिक माल की आवाजाही को निर्बाध बनाने और अंतर्राज्यीय व्यापार को गति देने के लिए जांच नियमों को अत्यधिक सख्त व पारदर्शी बनाया गया है:

  • अधिकार क्षेत्र का स्पष्ट निर्धारण: किसी भी अंतर्राज्यीय मार्ग पर चल रहे वाहन को रोकने, सामान की भौतिक जांच करने अथवा उसे जब्त करने का अधिकार अब केवल माल भेजने वाले राज्य (सप्लायर राज्य) या गंतव्य राज्य (डेस्टिनेशन राज्य) के सक्षम अधिकारियों को ही प्राप्त होगा। किसी भी मध्यवर्ती राज्य के क्षेत्रीय जांच दल मनमाने ढंग से गाड़ियां रोककर व्यापार ठप्प नहीं कर सकेंगे।
  • उच्चाधिकारियों की पूर्व अनुमति अनिवार्य: किसी भी व्यावसायिक वाहन को केवल तभी रोका जा सकेगा जब विभाग के पास पुख्ता व ठोस खुफिया इनपुट उपलब्ध हो। इसके लिए भी कम से कम संयुक्त आयुक्त (Joint Commissioner) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी की पूर्व लिखित स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। यदि पर्याप्त आधार का अभाव पाया गया, तो जब्ती की अनुमति देने से इंकार किया जा सकेगा।

ऑनलाईन पंजीकरण व निरस्तीकरण में तेजी, कारोबारी सहूलियत पर जोर :

जीएसटी पोर्टल पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण को सुदृढ़ किया गया है ताकि किसी भी व्यापारी को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें :

  • स्वतः अनुमोदन प्रणाली: जीएसटी पंजीकरण में सामान्य संशोधनों—जैसे व्यवसाय के अतिरिक्त परिसर, शाखा या गोदाम को जोड़ने का कार्य—अब पोर्टल पर ऑनलाईन आवेदन करते ही ऑटोमैटिक रूप से स्वीकृत कर दिया जाएगा। व्यापारी इसे अपने कंप्यूटर अथवा मोबाईल इंटरफेस के माध्यम से भी आसानी से अद्यतन कर सकेंगे।
  • पंजीकरण निरस्तीकरण की समय-सीमा में कमी: कारोबार समेटने या पंजीयन रद्द करने के लिए दिए गए आवेदनों के निपटारे की समय-सीमा को 15 कार्यदिवसों से घटाकर अधिकतम 10 कार्यदिवस कर दिया गया है।

वर्किंग कैपिटल को सहारा: 3 कार्यदिवसों में 90% रिफंड जारी करने का लक्ष्य :

व्यापारिक पूंजी (Working Capital) के प्रवाह को बनाए रखने के लिए रिफंड प्रक्रिया को स्वचालित और समयबद्ध किया गया है:

  • जोखिम आधारित त्वरित रिफंड: उन्नत रिस्क असेसमेंट प्रणाली के माध्यम से करीब 90% रिफंड आवेदनों को मंजूरी मिलने के 3 कार्यदिवसों के भीतर सीधे करदाता के बैंक खाते में प्रेषित कर दिया जाएगा।
  • लेजर व अतिरिक्त नकद समायोजन: इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में पड़े अतिरिक्त संतुलन या तकनीकी विसंगतियों से जुड़े रिफंड मामलों का समाधान भी बिना मानवीय हस्तक्षेप के ऑनलाईन माध्यम से स्वतः कर दिया जाएगा।

परिषद के इन फैसलों से न केवल देश भर में व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को बल मिलेगा, बल्कि अनावश्यक मुकदमेबाजी और दंडात्मक कार्यवाही से मुक्त एक पारदर्शी एवं विकासोन्मुख कर व्यवस्था स्थापित की जायेगी।