शराब के नशे में पुलिसकर्मियों पर युवक और उसकी मां से मारपीट का गंभीर आरोप; मोबाईल पर माफी मांगने का वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप।

सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर क्षेत्र में खाकी की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। चंद्रमेढ़ा गांव निवासी विजय दुबे ने ड्यूटी पर तैनात कुछ पुलिसकर्मियों पर शराब के नशे में धुत होकर बर्बरतापूर्वक मारपीट करने और बीच-बचाव करने पहुंची उसकी मां उर्मिला दुबे के साथ घोर अभद्रता व धक्का-मुक्की करने का संगीन आरोप लगाया है। घटना से व्यथित पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर सीधे पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचा, जहां वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आपबीती सुनाते हुए दोषी कर्मियों के विरुद्ध मुकद्दमा दर्ज करने और कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की मांग की गई।

पलमा चौक क्षेत्र में वाहन जांच के दौरान उपजा विवाद :

पीड़ित विजय दुबे की शिकायत के अनुसार, वह अपने निजी कार्य से घर से जरही की ओर जा रहा था। इसी दौरान मुख्य मार्ग स्थित पलमा चौक क्षेत्र में पुलिस बल द्वारा वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही थी। चेकिंग के चलते सड़क पर वाहनों की लंबी लाईन लग गई थी और सामान्य आवाजाही कुछ समय के लिए पूरी तरह ठप्प पड़ गई थी। विजय का आरोप है कि जांच स्थल पर तैनात पुलिसकर्मियों ने बिना किसी ठोस कारण के उसके साथ दुर्व्यवहार शुरू कर दिया। जब उसने इस अनुचित व्यवहार पर आपत्ति जताई, तो शराब के नशे में चूर पुलिसकर्मियों ने तैश में आकर उस पर हमला कर दिया। इस मारपीट में विजय के हाथ में गंभीर चोटें आई हैं।

मां के साथ भी बदसलूकी और मुकद्दमा दर्ज करने की मांग :

घटना के दौरान जब विजय की मां उर्मिला दुबे मौके पर पहुंचीं और अपने बेटे को छुड़ाने का प्रयास किया, तो पुलिसकर्मियों ने उनके साथ भी बदसलूकी और धक्का-मुक्की की। मां उर्मिला दुबे ने एसपी कार्यालय में रोते हुए बयान दिया, “राजकुमार मुंशी शराब के नशे में था और उसने मेरे बेटे को बेरहमी से पीटा। यदि मेरे बेटे की कोई गलती थी तो नियमानुसार चालान काटते या वैधानिक कार्यवाही करते, लेकिन इस तरह पीटने का अधिकार किसने दिया?” पीड़ित परिवार ने साफ कहा कि इस कृत्य के लिए जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से मुकद्दमा दर्ज किया जाना चाहिए।

मोबाईल वीडियो हुआ ऑनलाईन वायरल : घर जाकर माफी मांगते दिखे पुलिसकर्मी :

मामले के तूल पकड़ते ही घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर ऑनलाईन सामने आ गया, जिसे स्थानीय लोगों ने अपने मोबाईल में रिकॉर्ड किया था। इसके अलावा एक अन्य वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि विवाद बढ़ने और मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचने की भनक लगते ही संबंधित पुलिसकर्मी पीड़ित के घर पहुंचे और हाथ जोड़कर मामले को दबाने की गुहार लगाने लगे। वीडियो में पुलिसकर्मी यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि “बात को मत बढ़ाइए, गलती हो गई है, माफ कर दीजिए।” इस घटनाक्रम के सार्वजनिक होने के बाद से पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं और इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि चेकिंग के नाम पर मर्यादाएं तोड़ी गईं।

निष्पक्ष जांच का भरोसा : दोषी पाए जाने पर की जायेगी सख्त कार्यवाही

सूरजपुर जिला पुलिस प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पीड़ित पक्ष की शिकायत, मेडिकल रिपोर्ट तथा मोबाईल से प्राप्त वीडियो साक्ष्यों की तकनीकी जांच कराई जा रही है। पुलिस नेतृत्व का कहना है कि अनुशासनहीनता और नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच पूरी होते ही दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार विधि सम्मत दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।