राजधानी में ‘सूर्यवंश’ बेसन की नकल कर ‘सूर्यवंशी’ नाम से नकली माल खपाने का भंडाफोड़, सचदेव बंधुओं पर ट्रेडमार्क एक्ट में मामला दर्ज।

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रतिष्ठित खाद्य ब्रांड की नकल कर अनधिकृत उत्पाद बाजार में खपाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। माना कैंप थाना क्षेत्र के अंतर्गत बेसन के सुप्रसिद्ध व पंजीकृत ब्रांड ‘सूर्यवंश’ के ट्रेडमार्क, लोगो और पैकेजिंग की हूबहू नकल कर ‘सूर्यवंशी’ नाम से नकली उत्पाद बेचने वाले दो व्यवसायियों के विरुद्ध पुलिस ने कड़ा मुकद्दमा दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। पुलिस द्वारा इस पूरे प्रकरण में विधिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही संबंधित परिसरों पर दबिश देकर जब्ती की कार्यवाही पूरी की जायेगी।

2004 से पंजीकृत है मूल ट्रेडमार्क, दो दशकों की साख पर डाका डालने का प्रयास :

प्राप्त विवरण के अनुसार, रामसागरपारा स्थित ‘मनीष आटा चक्की’ के प्रोपराइटर मनीष शादीजा ने पुलिस में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी संस्था विगत 20 वर्षों से अधिक समय से शुद्ध बेसन, आटा और फरसान उत्पादों का निर्माण एवं विक्रय ‘सूर्यवंश’ ब्रांड नाम के तहत कर रही है।

इस ट्रेडमार्क का विधिवत पंजीयन 21 जुलाई 2004 को कराया गया था, जिसकी वैधानिक वैधता 21 जुलाई 2034 तक प्रभावी है। दो दशकों की निरंतर गुणवत्ता और शुद्धता के बल पर इस ब्रांड ने स्थानीय बाजारों से लेकर ओड़िशा की सीमा से लगे व्यापारिक क्षेत्रों तक अपनी एक मजबूत साख बनाई है। आरोप है कि इसी साख और त्यौहारी सीजन की भारी मांग का अनुचित लाभ उठाने की नीयत से आरोपियों ने यह षड्यंत्र रचा।

नाम, लोगो, डिजाइन और टैगलाईन की हूबहू नकल :

शिकायत के अनुसार, मेसर्स एमएस सिंध बेसन के संचालक धीरज सचदेव और उनके पिता निर्मल सचदेव ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से ‘सूर्यवंशी’ नाम से समानांतर उत्पाद तैयार कर बाजार में उतार दिया।

  • पैकेजिंग समानता : पैकेट का मुख्य रंग संयोजन, फॉन्ट तथा उत्पाद की तस्वीर मूल ब्रांड जैसी ही रखी गई।
  • ट्रेडमार्क का उल्लंघन : पैकेट पर छपे विशिष्ट ‘सूर्य चिह्न’ (सन लोगो) को भी हूबहू कॉपी किया गया।
  • पंचलाईन की चोरी : पैकेट पर दर्ज मूल प्रचार वाक्य ‘शहर गृहणियों की पहली पसंद’ जैसी टैगलाईन को भी ज्यों का त्यों इस्तेमाल किया गया।

शिकायतकर्ता का तर्क है कि दोनों पैकेटों की बनावट इतनी मिलती-जुलती रखी गई है कि बाजार में सामान्य उपभोक्ता के लिए असली और नकली के बीच भेद कर पाना लगभग असंभव हो जाता है। इसका सीधा उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रम में डालकर असली निर्माता का व्यवसाय ठप्प करना था।

माना कैंप और तेलीबांधा क्षेत्र में अवैध निर्माण व भंडारण :

शिकायत में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि इस नकली उत्पाद का अनधिकृत निर्माण और व्यापक भंडारण रायपुर के तेलीबांधा क्षेत्र अंतर्गत रविग्राम तथा माना कैंप स्थित डी-62, जय सदाराम मार्केट में किया जा रहा था। खुदरा दुकानों के साथ-साथ कुछ ऑनलाईन डिलीवरी नेटवर्क के माध्यम से भी इस माल को खपाए जाने की आशंका जताई गई है।

प्राथमिकी में दर्ज नामों की विसंगति पर जांच केंद्रित

माना कैंप पुलिस ने प्रारंभिक जांच और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद 10 अक्टूबर को ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत औपचारिक मुकद्दमा दर्ज किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, एफआईआर के मुख्य कॉलम में धीरज सचदेव और श्रीचंद सचदेव के नाम दर्ज हैं, जबकि शिकायत के विस्तृत मजमून में निर्मल सचदेव का नाम आया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नामों में आए इस अंतर की तस्दीक की जायेगी।

यदि जांच के दौरान आरोपियों द्वारा अपने कृत्यों से इंकार किया जाता है, तो फोरेंसिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जायेगी। इसके अतिरिक्त, यदि इस नेटवर्क के तार किसी अंतर्राज्यीय गिरोह से जुड़े पाए गए, तो आरोपियों के मोबाईल कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल भुगतानों की जांच साईबर सेल के माध्यम से कराई जायेगी। विवेचना पूरी होने के बाद सभी आवश्यक साक्ष्य सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जायेंगे और दोषियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जायेगा।