रियाद (सऊदी अरब) : सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को शनिवार को एक बार फिर भीषण हवाई हमले का निशाना बनाया गया। अप्रत्याशित हमले के तुरंत बाद हवाई अड्डा प्रशासन ने संपूर्ण परिसर को आनन-फानन में खाली करा लिया और सुरक्षा के मद्देनज़र सभी वाणिज्यिक तथा गैर-वाणिज्यिक उड़ानों के परिचालन को पूरी तरह ठप्प कर दिया गया।
दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर पुष्टि की है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी आगमन और प्रस्थान उड़ानों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस संवेदनशील विषय पर सीधे तौर पर सार्वजनिक बयान देने की अनुमति नहीं है, इसलिए पहचान गोपनीय रखी गई है।
हमले के बाद एयरपोर्ट प्रबंधन ने ऑनलाईन पोर्टल और मोबाईल अलर्ट संदेशों के माध्यम से यात्रियों के लिए एक आकस्मिक परामर्श जारी किया। यात्रियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे घर से एयरपोर्ट के लिए रवाना होने से पहले अपनी संबंधित एयरलाईन से अपनी उड़ान की अद्यतन स्थिति अवश्य जांच लें, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। हवाई अड्डे के रनवे और एप्रन क्षेत्र को भारी सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है और ग्राउंड ऑपरेशंस की तकनीकी जांच पूरी होने तक किसी भी उड़ान को उतरने की अनुमति नहीं दी जायेगी।
राजधानी के आवासीय क्षेत्र में गूंजे जोरदार धमाके : दहशत में आए नागरिक :
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय नागरिकों के अनुसार, शनिवार को हुए इस हमले के दौरान रियाद का विस्तृत क्षेत्र जबर्दस्त विस्फोटों की आवाज से कांप उठा। रियाद के एक स्थानीय निवासी अहमद सैयद ने स्थिति की भयावहता बताते हुए कहा कि उन्होंने बेहद कम अंतराल में कम से कम दो अत्यंत तीव्र धमाकों की आवाजें स्पष्ट सुनीं। इन गगनभेदी धमाकों से राजधानी का पूरा क्षेत्र दहल उठा और आसमान में धुएं के गुबार उठते देखे गए।
हालांकि शुरुआती क्षणों में सऊदी रक्षा तंत्र की ओर से यह स्पष्ट रूप से रेखांकित नहीं किया गया कि हमला किस विशिष्ट हथियार प्रणाली—बैलिस्टिक मिसाइल अथवा विस्फोटक ड्रोन स्वार्म—से किया गया था और इससे एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे को कितना भौतिक नुकसान पहुंचा है। सऊदी रक्षा अधिकारियों ने नुकसान के सटीक आकलन को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक आंकड़ा साझा करने से इंकार कर दिया है। विस्तृत तकनीकी जांच रिपोर्ट पूरी होने के पश्चात ही नुकसान का आधिकारिक ब्यौरा सार्वजनिक किया जायेगा।
एक सप्ताह के भीतर कई हमले : यमन में बढ़ते सैन्य टकराव की सीधी आंच :
किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यह हमला कोई छिटपुट घटना नहीं है, बल्कि पिछले एक हफ्ते के दौरान सऊदी राजधानी के विमानन हब को निरंतर निशाना बनाए जाने की एक सोची-समझी श्रृंखला का हिस्सा है। इससे महज दो दिन पूर्व हुए एक अन्य घातक हमले में एक पायलट सहित तीन सऊदी नागरिकों की दुखद मौत हो गई थी। वहीं, इसी सप्ताह बुधवार को हुए एक अन्य हमले में सूडान के एक नागरिक की जान चली गई थी।
यह भीषण तनाव उस समय तीव्र गति से भड़का जब सऊदी अरब के नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन ने पड़ोसी मुल्क यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के सैन्य ठिकानों के विरुद्ध व्यापक स्तर पर निर्णायक हवाई कार्यवाही शुरू की। सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकारी सेना को व्यापक हवाई व रणनीतिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है, ताकि लाल सागर के तटीय गलियारों में हूती लड़ाकों की हालिया रणनीतिक बढ़त को पूरी तरह रोका जा सके।
बुधवार के हमलों की जिम्मेदारी हूती मिलिशिया ने औपचारिक रूप से स्वीकार की थी, यद्यपि शनिवार को रियाद एयरपोर्ट पर हुए इस नए हमले को लेकर विद्रोही नेतृत्व की ओर से तत्काल कोई औपचारिक दावा नहीं किया गया है।
लाल सागर और होर्मुज का रणनीतिक विकल्प : जलमार्गों की नाकेबंदी और जवाबी कार्यवाही :
हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के तटीय मुहाने पर हाल ही में हासिल की गई सामरिक स्थिति ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखने और दबाव बनाने की अभूतपूर्व क्षमता प्रदान की है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार और वाणिज्यिक आवागमन के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि इसे सामरिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य के एक प्रमुख वैकल्पिक पारगमन मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
विद्रोही कमांडरों का तर्क है कि वे अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर थोपी गई आर्थिक व नौसैनिक नाकेबंदी के सीधे जवाब में यह कठोर कदम उठा रहे हैं। उनके आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह पूरी कार्यवाही केवल सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और रणनीतिक ठिकानों तक सीमित रखने का दावा किया गया है।
तथापि, खाड़ी और पश्चिम एशिया के रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि यमन में जारी संघर्ष पर कूटनीतिक विराम नहीं लगा, तो आने वाले दिनों में यह सैन्य टकराव केवल सीमावर्ती बंदरगाहों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सऊदी अरब के अन्य ऊर्जा केंद्रों, तेल शोधन कारखानों और दूरस्थ वाणिज्यिक नगरों पर भी व्यापक हमले बोले जायेंगे। पूरे क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के इस नए मोर्चे ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं।



