अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से लगे रनपुर गांव में नाथल दाई का स्थल लंबे समय से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां माता की प्रतिमा खुले आसमान के नीचे विराजमान है। अब इस स्थल पर मंदिर निर्माण की तैयारी की जा रही है। इसके लिये सरकार की ओर से पांच लाख रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई है और भूमिपूजन भी हो चुका है। हालांकि, मंदिर निर्माण के साथ ही पास स्थित मजार को लेकर विवाद शुरू हो गया है। कुछ हिंदू संगठनों ने मजार की उत्पत्ति और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की जांच की मांग की है। ऐसे में रनपुर का यह धार्मिक स्थल अब आस्था के साथ-साथ कानूनी और ऐतिहासिक सवालों को लेकर भी चर्चा में है।
सैकड़ों साल से खुले आसमान तले विराजमान हैं नाथल दाई :
नाथल दाई का स्थल स्थानीय लोगों के लिये गहरी आस्था का केंद्र है। यहां माता की प्रतिमा खुले आसमान के नीचे स्थापित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, नाथल दाई के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। इस स्थल पर बलि देने की परंपरा भी प्रचलित बताई जाती है। इस साल पहली बार नवरात्रि के नौ दिनों तक यहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इससे धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं की गतिविधियां और बढ़ीं।
मंदिर निर्माण के लिये 5 लाख रुपये स्वीकृत, कॉरिडोर की भी योजना :
नाथल दाई स्थल पर अब मंदिर निर्माण की तैयारी की जा रही है। इसके लिये सरकार की ओर से पांच लाख रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई है। मंदिर निर्माण के लिये भूमिपूजन भी हो चुका है। इसके अलावा, इस धार्मिक स्थल को विकसित करने के लिये नाथल दाई कॉरिडोर बनाने की योजना की भी चर्चा है। मंदिर निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं, लेकिन इससे जुड़ा विवाद अब सामने आने लगा है।
मंदिर निर्माण को लेकर अदालत तक पहुंचा मामला :
मंदिर निर्माण की प्रक्रिया के बीच स्थानीय हिंदू संगठनों से जुड़े कुछ लोगों ने विरोध और कानूनी अड़चनों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मंदिर निर्माण के विरोध में मामला अदालत तक पहुंच गया है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान और मामले से जुड़े अदालती दस्तावेज सामने आना जरूरी है। फिलहाल मंदिर निर्माण के समर्थक कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कह रहे हैं। मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिये अदालत में चल रही कार्यवाही, संबंधित पक्षों के बयान और प्रशासन का रुख महत्वपूर्ण होगा।
पास स्थित मजार को लेकर उठे सवाल, डीएनए जांच की मांग :
नाथल दाई का स्थल पास में स्थित एक मजार से लगा हुआ है। इसी वजह से रनपुर को सद्भावना गांव के रूप में भी जाना जाता है। हालांकि, मंदिर निर्माण की तैयारी के बीच अब मजार की उत्पत्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों का दावा है कि यहां पहाड़ी कोरवा जनजाति के एक व्यक्ति को दफनाया गया था और बाद में उस स्थान पर मजार का स्वरूप विकसित हुआ। इन लोगों ने संबंधित व्यक्ति की पहचान और स्थल के इतिहास की जांच कराने की मांग की है। कुछ लोगों की ओर से डीएनए जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। हालांकि, मजार की उत्पत्ति को लेकर किए जा रहे इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ऐतिहासिक दस्तावेजों, प्रशासनिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच आवश्यक है।
आस्था के साथ तथ्यों की जांच और आपसी सद्भाव बनाए रखना जरूरी :
रनपुर का नाथल दाई स्थल लंबे समय से स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। अब मंदिर निर्माण की तैयारी और मजार को लेकर उठे सवालों ने इस मामले को चर्चा में ला दिया है। एक ओर मंदिर निर्माण के समर्थक इसके लिये कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मजार की उत्पत्ति को लेकर उठाए गए सवालों की पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में मामले के समाधान के लिये प्रशासनिक जांच, ऐतिहासिक तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया की अहम भूमिका होगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर आपसी सद्भाव बनाए रखना भी जरूरी है। अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम और मामले से जुड़े तथ्यों के सामने आने पर टिकी हैं।



