मुख्यमंत्री निवास में गरबा महोत्सव की धूम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की सुख-समृद्धि की कामना, नारी सशक्तीकरण और सांस्कृतिक एकता पर दिया बल।

रायपुर : मुख्यमंत्री निवास में 16 अक्टूबर को नवरात्रि के पावन अवसर पर भव्य गरबा महोत्सव का आयोजन किया गया। मां दुर्गा की आराधना, भक्ति संगीत और गरबा की थाप के बीच पूरा परिसर उत्सवी माहौल में सराबोर नजर आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, बेटियों और गुजराती समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित प्रतिभागियों ने गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरे आयोजन में उमंग और रंग भर दिये।

मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने नवरात्रि को केवल शक्ति की उपासना ही नहीं, बल्कि नारी सम्मान और सशक्तीकरण का महापर्व बताया।

नारी शक्ति का सम्मान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता :

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को साक्षात शक्ति का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि का पर्व महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को दोहराने का अवसर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और विकास की मुख्यधारा में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये लगातार ठोस कदम उठा रही है।

महतारी वंदन योजना और ‘लखपति दीदी’ से बदल रही महिलाओं की तस्वीर :

महतारी वंदन योजना की सफलता पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की लगभग 68 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सीधी वित्तीय सहायता दी जा रही है। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित होती है, जिससे महिलाओं को परिवार के संबल, बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने में बड़ा सहयोग मिल रहा है।

उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ में अब तक लगभग 14 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। यह उपलब्धि राज्य की महिलाओं की कड़ी मेहनत, अदम्य आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सरकार का मुख्य ध्येय है कि महिलाएं केवल शासकीय योजनाओं के लाभ तक सीमित न रहें, बल्कि वे प्रदेश के नवनिर्माण में आगे बढ़कर नेतृत्वकारी भूमिका निभायें।

गरबा से सुदृढ़ हो रही है सामाजिक और सांस्कृतिक एकता :

मुख्यमंत्री ने गरबा को आदिशक्ति मां दुर्गा के प्रति अनन्य आस्था और गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का पावन प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि गुजरात की पावन धरा से निकली गरबा की यह अनुपम परंपरा आज देश के कोने-कोने में अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विभिन्न समाजों और संस्कृतियों के बीच आपसी सौहार्द व जुड़ाव को और प्रगाढ़ करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हमारे देश के तीज-त्योहार केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने के साथ ही युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों व परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। छत्तीसगढ़ में गरबा के प्रति निरंतर बढ़ता आकर्षण और इसमें महिलाओं-बेटियों की व्यापक भागीदारी इस आयोजन को विशेष पहचान दे रही है।

छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आदिशक्ति उपासना की गौरवशाली परंपरा :

प्रदेश की समृद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अनादिकाल से शक्ति आराधना की अटूट परंपरा विद्यमान है। मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी जैसे पवित्र शक्तिपीठ पूरे प्रदेश की अटूट आस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख केंद्र हैं।

उन्होंने बताया कि नवरात्रि के पावन दिनों में दंतेवाड़ा, डोंगरगढ़, रतनपुर और चंद्रपुर सहित राज्य के तमाम प्रमुख देवी मंदिरों में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है। राज्य सरकार इन ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की विरासत को संजोने और वहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा व सहूलियत का विस्तार करने के लिये पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

विकास और सांस्कृतिक विरासत का समन्वय :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरा देश विकास के नए कीर्तिमान गढ़ने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संजोने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ भी अपने गौरवशाली मूल्यों और पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए चौतरफा विकास के मार्ग पर निरंतर अग्रसर है।

विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प में गुजराती समाज का अहम योगदान :

समारोह के समापन पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास में गुजराती समाज की सकारात्मक भूमिका की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गुजराती समुदाय ने व्यापार, उद्योग, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में अपने अथक परिश्रम और उद्यमशीलता से राज्य की आर्थिक तरक्की में अमूल्य योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी खूबी सभी समाजों, संस्कृतियों और परंपराओं को स्नेहपूर्वक आत्मसात करना है। गुजराती समाज ने भी छत्तीसगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाकर यहां के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक ताने-बाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। एक समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में समाज के सभी वर्गों की एकजुटता और सहभागिता अत्यंत अनिवार्य है।