रेलवे का नया नियम : अपनी बर्थ पर सोए तो लगा देंगे जुर्माना, सीट दूसरे को दे दी जायेगी, रिफंड डूब जाता है, आम आदमी आक्रोशित।

रायपुर : रेलवे के रोज बदलते नियमों से आम यात्री काफी परेशान है, हमने इसी मुद्दे पर 6 जुलाई को एक सम्पादकीय लिखा था “कितना बदला रेल्वे : लालू की रेल के बाद मोदी की रेल, और जनता की पेलम – पेल। क्या अब भी रेलवे घाटे में चल रहा है?” इस लेख में हमने बदलते हुये रेलवे के काम पर काफी प्रकाश डाला है, यह खबर आप http://machismedianews.com/?p=7730 लिंक पर पढ़ सकते है, आइये पहले हम ताजा खबर पर ध्यान देते है :

रेल मंत्रालय आए दिन नए-नए आदेश जारी कर रहा है। पहले आदेश में 10 मिनट बाद अपनी बर्थ में पहुंचने पर उसे दूसरों को देने की बात कही गई थी। अब कहा जा रहा है कि कोई भी यात्री रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक ही अपनी सीट पर सो सकेगा। इसके बाद सोया पाया गया तो उस पर जुर्माना लगा दिया जाएगा। रेलवे के इन दोनों फैसले पर सवाल उठाते हुए यात्रियों ने कहा है कि इसका मतलब साफ है कि अब ट्रेन अपनी बर्थ में लोग यात्रा के दौरान होने वाली थकावट को दूर करने के लिए आराम भी नहीं कर सकेंगे, क्योंकि ऐसा करने पर उनको जुर्माना देना होगा। ट्रेन में कराया जाने वाला रिजर्वेशन यात्रा के दौरान पूरी तरह से संबंधित यात्री की सुविधाओं के लिहाज से होता है लेकिन इस नियम के आने से बुजुर्ग यात्री, महिलाओं और बच्चों को खासी परेशानी होगी।

यात्रियों का कहना है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन की यात्री ट्रेनों को माल गाड़ियों के आगे तवज्जो नहीं देने की व्यवसायिक सोच ने यात्री ट्रेनों को आम लोगों से दूर करना शुरू कर दिया है। यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी से पहले से परेशान लोग अब निजी टैक्सी और बस का सहारा लेने लगे हैं। हालाँकि रेल्वे से यात्री मुंह नहीं मोड़ सकते क्यूंकि रेल यातायात ही सबसे बेहतर , सस्ता और सुरक्षित है। रेलवे का मुख्य ध्यान अधिकतर महँगी ट्रेनों वन्दे भारत, तेजस, राजधानी और हमसफ़र जैसी ट्रेनों पर है, ऊपर से सरकार को मालगाड़ी से ज्यादा आय होने के कारण यात्री ट्रेनों को रक दिया जाता है, अभी हाल ही में रेलवे की लापरवाही मनमाड स्टेशन से ट्रेन 50 को छोड़कर समय से पहले ही निकल गई, रेलवे की व्यवस्था लगातार गड़बड़ा रही है, और भी काफी ज्यादा रेलवे की लापरवाही जान ने के लिये हमारी पुरानी सम्पादकीय खबर को भी जरुर पढ़ें लीं ऊपर दी गई है।