रायपुर : बृजमोहन अग्रवाल एक जमीनी कार्यकर्ता रह चुके है, और उनके जनाधार कम नहीं है, आज भी उनके चाहने वालों की संख्या कम नहीं है, लेकिन पिछली बार की भाजपा की सत्ता छत्तीसगढ़ से जाने के बाद उनकी पकड़ लगातार कम होती जा रही है, सूत्रों की माने तो पिछले चुनाव के समय में उनके ऊपर जो घोटालों के आरोप लगे उनके कारण उसी समय उनकी टिकट कटना तय माना जा रहा था, लेकिन उनकी चुनाव जिताने की क्षमता ने ऐसा नहीं होने दिया, लेकिन एंटीइनकम्बेंसी के कारण भजपा सत्ता से बाहर हो गई थी, मुख्य मुद्दा ये है कि वर्तमान चुनावी प्रक्रिया में केन्द्रीय नेतृत्व ने बदलाव किया है, अब भाजपा के लिये एक – एक सीट का काफी महत्व है, इसलिये इस बार प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया आवेदन के बजाय सर्वे पर आधारित हो गई है, यही कारण हैकि बृजमोहन अग्रवाल जैसे कद्दावर नेता की टिकट खतरे में है, जबकि दूसरी ओर खबर ये है कि बृजमोहन अग्रवाल ने अपने चुनाव की तैयारियों को पूरा कर लिया है, बस टिकट कन्फर्म होने का इंतजार है, अब ये देखना रोचक होगा कि टिकट मिल रही है अथवा नहीं?
उत्तर विधानसभा :
उत्तर विधानसभा में चुनाव दर चुनाव सत्ता पलटती रही है, यहाँ सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात है, कि यहाँ की सत्ता गरीब तबके के हाथ में है, यहाँ अधिकतर मतदाता गरीब है, इनको आमतौर पर पार्टी अथवा प्रत्याशी से कोई मतलब नहीं होता ये अपना त्वरित लाभ देखकर वोट देते है, दूसरी तरफ यहाँ सिन्धी मतदाता भी मजबूत संख्या में है, लेकिन इनके मत एकजूट नहीं है, ये अपने सिन्धी प्रत्याशी की अपेक्षा कुलदीप जुनेजा के समर्थन में ही रहते है, भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व के आंकड़ों के अनुसार इस बार के चुनाव में अब यह सीट वापस भाजपा के पास आती दिख रही है, कारण कुलदीप जुनेजा ने क्षेत्र के लोग नाराज चल रहे है, आरोप है कि इस बार उन्होंने आम आदमी का ध्यान नहीं रखा और दूसरी ओर उनके ऊपर सड़क निर्माण में गड़बड़ी के आरोप लगे है और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल में 200 करोड़ की गड़बड़ी भी सामने आई है। हालाँकि यहाँ भी सीट जीतने का फार्मूला 50 – 50 ही है।
पश्चिम विधानसभा :
पश्चिम विधानसभा में विकास उपाध्याय लगातार सराहनीय कार्य कर रहे है, उनके कार्य पर किसी को कोई संशय नहीं है, लेकिन वो कांग्रेस से जुड़े नेता है, और कांग्रेस को हमेशा से ही हिन्दू विरोधी माना जाता रहा है, हालांकि कांग्रेस ने इस बार हिन्दुओं का काफी ख्याल किया है, लेकिन दिखावे की राजनीति के चलते इस क्षेत्र के मतदाता भाजपा के पक्ष में ही है, इस क्षेत्र के मतदाताओं के अनुसार राजेश मूणत ने इस विधानसभा में सबसे ज्यादा विकास कार्य करवाये लेकिन आम जनता की नजरों में चढ़ नहीं पाये , इसके लिये उनका व्यवहार जिम्मेदार रहा है, इस क्षेत्र के अधिकतर मतदाता राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को सपोर्ट करने वाले है , इस सीट को लेकर 50 – 50 का फार्मूला है, लेकिन यह सीट भी वापस भाजपा के हाथ में जाती दिख रही है।
रायपुर ग्रामीण :
इस सीट का फार्मूला क्या है कह पाना मुश्किल है, लेकिन यह सीट सत्यनारायण शर्मा जैसे पुराने और महत्वपूर्ण नेता की मेहनत का खासा परिणाम है और यह सीट इस बार भी कांग्रेस के पाले में ही जायेगी