डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों ने फिर से रचा इतिहास, 63 साल के घायल बुजुर्ग की इस तरह से बचाई जान।

रायपुर : आंबेडकर अस्पताल कई ऐसे इलाज हुये है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर दिया है, यहाँ ऐसे – ऐसे कठिन इलाज हुये है, जो हमें आश्चर्य में डाल देते है, अस्पताल के एसीआई में बीते दिनों सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल 63 साल के बुजुर्ग को लाया गया था। उसकी पसलियां चकनाचूर हो गई थीं। फेफड़ा भी बुरी तरह डैमेज था। ऐसे में डॉक्टरों ने टाइटेनियम की पसली लगाकर मरीज की जान बचाई। इस तरह के ऑपरेशन दुर्लभ हैं। बेहद ही मुश्किल काम को यहाँ के डॉक्टरों ने बखूबी अंजाम दिया है, यह बेहद ही प्रशंसनीय है।

मिली जानकारी के मुताबिक राजिम में रहने वाले शिक्षक का 8 दिन पहले स्कूल से घर लौटते समय एक्सीडेंट हो गया था। पहले उन्हें गरियाबंद जिला अस्पताल ले जाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रायपुर के डीकेएस हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया। मरीज का ऑक्सीजन लेवल लगातार गिरता हुआ देखकर उन्हें आंबेडकर अस्पताल के एसीआई में शिफ्ट कर दिया गया। यहां डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में उनका ऑपरेशन किया गया, जो कि सफल रहा।

डॉ. साहू बताते हैं, मरीज की दाईं छाती की 7 से ज्यादा पसलियां जगह-जगह से टूट गई थीं। इसके कारण फ्लैल चेस्ट बन गया था। ऐसे में मरीज की छाती में टाइटेनियम की कृत्रिम पसली बनाकर छाती को नया आकार दिया गया। इसमें 5 लंबी टाइटेनियम प्लेट का इस्तेमाल किया गया। फेफड़े में आई चोट भी रिपेयर की। यह जटिल और हाई रिस्क आपरेशन है। गिने चुने संस्थानों में किया जाता है। इस ऑपरेशन में 4 यूनिट ब्लड लगा। मरीज की बेटी डीकेएस अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ है। एसीआई की सेवा और दक्षता से वह काफी खुश है। डॉक्टरों के कठिन परिश्रम से 63 साल के बुजुर्ग की जान बच गई।

विशेषज्ञों की टीम में ये रहे शामिल :

सर्जरी करने वाली टीम: डॉ. कृष्णकांत साहू (विभागाध्यक्ष), डॉ. निशांत सिंह चंदेल, डॉ. अजीत, डॉ.संजय त्रिपाठी, एनेस्थेटिस्ट- डॉ. मनिन्दर कौर, टेेक्नीशियन- भूपेन्द्र कुमार, हरीशचंद्र, नर्सिंग स्टॉफ- राजेन्द्र, नरेन्द्र, चोवाराम, मुनेश, किरण, प्रियंका, कुसुम, तेजेन्द्र।