सिन्धी समाज ने दोनों प्रमुख पार्टियों से सीट की मांग की, सीटें ना मिलने की उम्मीद से समाज नाराज, भाजपा को उठाना पड़ सकता है नुकसान।

रायपुर : छत्तीसगढ़ में अगले माह चुनाव होने वाले है, जिसमें उम्मीदवार तो अपना दावा ठोक ही रहा है, लेकिन सभी समाज अपने समाज के लिये भी प्रतिनिधित्व की मांग लगातार कर रहे है, सिन्धी समाज भी अपने सामाजिक प्रतिनिधियों को टिकट दिलाने के लिये लामबंद है, समाज के मुखिया पहले भी श्रीचंद सुन्दरानी को टिकट दिलाने में सफल रहे थे, उनका कहना है, इस बार हमें दोनों प्रमुख पार्टियाँ कम से कम तीन सीटों पर टिकट दें। सिन्धी समाज के एक मुश्त वोट भी उसी पार्टी को जाते है, जिससे समाज के प्रमुख व्यक्ति को टिकट मिलती है। पहले भी सिन्धी समाज ने श्रीचंद सुन्दरानी को टिकट मिलने के कारण पूरे छत्तीसगढ़ में एकमुश्त वोट दिया है।

सिन्धी समाज ने बनाई कोर कमेटी, जरूरत पड़ने पर खड़े करेगी अपने निर्दलीय प्रत्याशी :

सिन्धी समाज ने एक कोर कमिटी बनाई है, जिसमें 111 स्थाई सदस्य है और उनसे 500 सिन्धी युवा जुड़े हुये है, जो सिन्धी समाज के लिये वोटबैंक जुटायेंगे एवम् जरूरत पड़ने पर खुद भी चुनाव लड़ सकते है। सिन्धी समाज ने प्रमुख तौर पर भाजपा से उम्मीद जताई है, कि सिन्धी समाज का वोट बैंक शुरू से ही भाजपा का समर्थक रहा है, और हमेशा समाज के सम्पूर्ण वोट भाजपा को ही दिये गये है, शायद इसलिये ही पार्टी अब सिन्धी समाज को अहमियत नहीं दे रही है, जबकि नवोदित क्षेत्रीय पार्टियाँ लगातार सिन्धी समाज को टिकट देने के लिये लालायित है।

सिन्धी समाज ने दी है भाजपा को करारी चोट :

राजधानी में दो चुनाव पूर्व जब किरणमयी नायक महापौर चुनाव के लिये लड़ी थी , उस समय भी भाजपा ने सिन्धी प्रत्याशियों को दरकिनार किया था, जिसका परिणाम ये हुआ कि सिन्धी समाज ने अपने प्रत्याशियों को निर्दलीय खड़ा किया था और उसमें से कई प्रत्याशी चुनाव भी जीते थे, जो कि उस समय भाजपा प्रत्याशी की हार का कारण बने थे और बाद में उन जीते हुये सिन्धी प्रत्याशियों ने कांग्रेस का समर्थन कर दिया था, अगर उस समय वो प्रत्याशी हार जाते तो उन्हें पार्टी से 6 साल के लिये किनारे भी किया जा सकता था, फिर भी उन्होंने जीतकर दिखाया।

समाज के प्रतिनिधि को टिकट ना मिलने पर किया जायेगा भाजपा का बहिष्कार लगाया भेदभाव का आरोप :

सिन्धी समाज ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि समाज हमेशा से भाजपा के समर्थन में रहा है और हमेशा हर मोर्चे पर भाजपा का साथ दिया है, इतने सालों के समर्थन के बावजूद भाजपा ने सिन्धी समाज को क्या दिया है? आज तक सिन्धी समाज के प्रमुख त्यौहार चेट्रीचंड्र पर सरकारी छुट्टी घोषित नहीं की गई, सभी भाषाओ में सरकार दूरदर्शन के चैनल चला रही है, लेकिन आज तक सिन्धी समाज को कोई टीवी चैनल नहीं दिया गया, भाजपा का ये भेदभाव सहनीय नहीं है, अगर जरुरत पड़ी तो इस बार समाज के युवा सिन्धी बहुल शहरों में जाकर भाजपा को वोट ना देने के लिये समाज के लोगों से अपील करेंगे।

सिंधी समुदाय और राजनैतिक दबाव :

एक अनुमान के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में 7 लाख से अधिक की आबादी सिंधी समाज के लोगों की है। रायपुर शहर की चारों सीटों को मिलाकर, भाटापारा, बिलासपुर, बिल्हा, तिल्दा, राजनांदगांव, दुर्ग, धमतरी यह कुछ ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां बड़ी तादाद में सिंधी समुदाय के लोग रहते हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सियासी दलों के वोट बैंक को प्रभावित भी करते हैं, प्रत्याशी की हार जीत का अंतर तय करने में सक्षम है। इस बार सिंधी समुदाय को उम्मीद थी कि इन जगहों से उनके प्रत्याशियों के नाम सामने आयेंगे। समाज को टिकट ना मिलने की दशा में इन सभी सीटों पर सिन्धी समाज अपने निर्दलीय प्रत्याशी उतारेगा जिनका भाजपा को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।

हालांकि अभी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। जो नाम सामने आए हैं, वे संभावित हैं और ऐसे हैं जो लगभग चर्चा में रहे हैं। मगर इनमें सिंधी समुदाय की ओर से कोई बड़ा नाम सामने नहीं किया गया है, इस वजह से समाज में नाराजगी है। समाज के लोग मानते हैं कि अपने समुदाय की जनसंख्या के अलावा वे अपने साथ कारोबार से जुड़े परिवारों को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी समस्याओं को लेकर वे शिकायत कर सकें, इसके लिए व्यवस्था में उन्हीं के समाज का व्यक्ति होना आवश्यक है।

समाज ने टिकट देने की थी मांग, जो पूरी नहीं हुई :

सिंधी समाज के प्रतिनिधि लगातार भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के संपर्क में रहे। वे इस बात की मांग भी करते रहे कि समुदाय से किसी न किसी व्यक्ति को टिकट जरुर दिया जाए। हालांकि किस सीट से किसे टिकट दिया जाए, समाज की ओर से नहीं बताया गया था, लेकिन समाज के लोगों को प्रत्याशी बनाने की मांग वे जरूर करते रहे। समाज की प्रबल इच्छा है की उनके समाज के प्रतिनिधि को टिकट जरुर मिले।