अहमदाबाद/रायपुर : मेनका गांधी द्वारा 2001 में पशुक्रूरता कानून की वकालत की गई थी, 2014 से 2019 तक प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री के रूप में कार्य किया। पशु अधिकारों के लिए अपनी मजबूत वकालत के लिए जानी जाने वाली, वह पीपुल्स फॉर एनिमल्स संगठन की संस्थापक हैं। मेनका गांधी ने पशुओं के साथ होने वाले अत्याचारों को लेकर एक क़ानूनी लड़ाई लड़ी थी, जिसके अंतर्गत किसी भी पशु के साथ अच्छा बर्ताव हो और गलत व्यवहार करने वाले को क़ानूनी तौर पर सजा मिले। इसके अंतर्गत किसी भी पशु को परेशान नहीं किया जा सकता, उसको जख्मी नहीं किया जा सकता, उसको चोट नहीं पहुंचाई जा सकती और ना ही उसके ऐसा कोई कृत्य किया जाए की उसकी मौत हो जाये।
यह कानून सभी पशुओं पर लागू होता है, जिसके अंतर्गत इनको हानि पहुँचाने वाले आरोपी पर कड़ी क़ानूनी कार्यवाही का प्रावधान है, जिसके कारण कुत्तों की संख्या कम करने कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है, और कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, साथ में लोगों में मांसाहार खाना बढ़ गया है, जिसके कारण गली – गली में मटन की दुकाने खुल गई है, जहाँ कुत्ते लगातार मांस और मटन का कचरा खाकर हिंसक होते जा रहे है, जहाँ एक पत्थर उठाने पर ये भाग जाते थे, वहीँ अब ये झुण्ड हमला करने को तैयार रहते है।
मेनका गांधी की वकालत से लागु पशु क्रूरता कानून नहीं लागू होता इन पर :
जहाँ कुत्तों और अन्य पशुओं पर अत्याचार के मामले में कार्यवाही होती है, वहीँ मुर्गे और बकरे पर इस कानून के तहत कोई कार्यवाही नहीं होती, आम आदमी लगातार ये सवाल पूछता है।
कुत्तों के हमले से वाघ बकरी चाय के मालिक पराग देसाई की हुई दर्दनाक मौत :
कई बार आपके सामने सोशल मीडिया में वायरल कई ऐसे विडियो आये होंगे जहाँ झुण्ड में कुत्तों ने हमला कर मासूम बच्चों की जान ले ली और परिवार को आजीवन दुःख मिला, इस कानून को लेकर अभी तक किसी ने उपयुक्त समाधान की मांग नहीं की है, जहाँ कुत्तों के हमलों से लगातार लोग घायल हो रहे है, वहीँ रैबीज के टिके की मांग बढ़ गई है, रायपुर के सरकारी अस्पतालों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार शहर में जितने भी सरकारी अस्पताल है वहां प्रतिघंटे की औसत से कुत्ते द्वारा काटने के केस लगातार आ रहे है।
गुजरात के अहमदाबाद में कुत्तों के हमले से टी प्रोसेसर्स एंड पैकर्स के कार्यकारी निदेशक पराग देसाई का निधन हो गया। हैरान करने वाली बात यह है कि उनकी मौत झुण्ड में शामिल कुत्तों के हमले से हुई है। पराग देसाई लोकप्रिय वाघ बकरी ब्रांड की चाय के लिए जाने जाते थे। इस घटना में उनकी दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पराग देसाई (50) पिछले हफ्ते मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। इसी दौरान उनके ऊपर कुत्तों ने हमला कर दिया। उन्हें घायल अस्पताल में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया। पराग देसाई के परिवार में उनकी पत्नी विदिशा और बेटी परीशा हैं। उनकी इस असामयिक मौत से परिजन और इनसे जुड़े कई व्यापारी गमगीन है, यह घटना अप्रत्याशित है।