टाटा ग्रूप ने हराया ममता बैनर्जी को, ममता सरकार देगी टाटा ग्रूप को इतने करोड़ रूपये….।

कोलकाता (बंगाल) : टाटा नैनो को लेकर रतन टाटा ने हर गरीब के पास कार का सपना लेकर प्रोजेक्ट बनाया था, यह प्रोजेक्ट उनका एक ड्रीम प्रोजेक्ट था जिसको लेकर वे चाहते थे भारत की तरक्की हो और ज्यादा से ज्यादा भारतीय दो पहिया से कार में सफ़र शुरू करें, इस प्रोजेक्ट को लेकर उन्होंने प. बंगाल के सिंगुर में किसानों से जमीन खरीदी थी, जिसे उन्हें छोड़ना पड़ा था और अपना अरबों रूपये का प्लांट स्थानांतरित करने की उन पर मुसीबत आ गई थी, जिसको लेकर नरेंद्र मोदी ने उनसे बात की और कहा कि आप अपना प्लांट गुजरात में स्थानांतरित आपको कोई दिक्कत नहीं होगी , जिसको लेकर नरेंद्र मोदी ने उनको पूरा सहयोग दिया था , जिसके बाद उन्होंने बंगाल के सिंगुर से अपना प्लांट गुजरात में स्थानांतरित किया, जिसके कारण गुजरात में रोजगार बढ़ गया और उसके बाद बड़ी – बड़ी कंपनियां गुजरात में आना शुरू हो गई। वर्तमान खबर के अनुसार टाटा मोटर्स को पश्चिम बंगाल की ममता सरकार 766 करोड़ रुपये का मुआवजा देगी। सिंगुर जमीन विवाद में देश के सबसे पुराने कारोबारी घराने टाटा ग्रुप को बड़ी जीत हासिल हुई है। सोमवार (30 अक्टूबर) को कंपनी ने दावा किया है कि तीन सदस्यीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने उसके पक्ष में यह फैसला लिया है।

कंपनी का आया बयान :

टाटा ने एक बयान में बताया कि कंपनी अब प्रतिवादी पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) से 11 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ 765.78 करोड़ रुपये की राशि वसूलने की हकदार है। एक नियामक फाइलिंग में टाटा ग्रुप की ओर से ये जानकारी दी गई। टाटा मोटर्स ने कहा कि इस सुनवाई पर एक करोड़ रुपये के खर्च की भी वसूली करने का आदेश ट्राईब्यूनल ने दिया है। यह केस काफी समय से चल रहा था।

क्या है पूरा विवाद…

सिंगुर जमीन विवाद ने बंगाल की सत्ता का स्वाद ममता बनर्जी को पहुंचने में बड़ी मदद की। इस विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब बंगाल में पूर्ववर्ती वाममोर्चा सरकार ने साल 2006 में टाटा को सिंगुर में लखटकिया नैनो कार कारखाना लगाने की अनुमति दी थी। प्रोजेक्ट के लिए जरूरी 1 हजार एकड़ जमीन की खरीद की प्रोसेस भी शुरू हो गई। उस दौरान ममता बनर्जी विपक्ष में हुआ करती थी। जिन्होंने इस आंदोलन को शुरू किया था।

तब आरोप लगा कि टाटा के इस प्रोजेक्ट के लिए ‘जबरन’ भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, जबकि आम आदमी समझ रहा था ऐसा नहीं हो सकता। देखते ही देखते इस विवाद ने बड़े आंदोलन का रूप ले लिया, जिसका नेतृत्व टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने किया।  इस प्रोजेक्ट के विरोध में ममता बनर्जी भूख हड़ताल पर भी बैठ गई थी। इस दौरान कई बार सिंगुर में हिंसा भी हुई। इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अपील पर ममता बनर्जी ने भूख हड़ताल खत्म की थी। 

गुजरात शिफ्ट करना पड़ा था प्लांट :

इस पर विरोध इतना बढ़ गया कि टाटा मोटर्स को साल 2008 में सिंगूर से अपना निर्माणाधीन संयंत्र गुजरात स्थानांतरित करने पड़ा। तब तक टाटा ने सिंगूर में 1 हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश कर दिया था। वहीं, साल 2011 में सत्ता में आने पर ममता बनर्जी सरकार ने सिंगूर में टाटा की जमीन को किसानों को वापस लौटाने का फैसला किया था। इसके बाद टाटा मोटर्स ने सिंगुर में हुए नुकसान के कारण मुआवजे की मांग को लेकर यह मामला किया था। इसके बाद जब ममता बनर्जी की सरकार बनी और वह सत्ता में आई तो ममता बनर्जी ने एक कानून बनाकर सिंगुर की जमीन किसानों को वापस लौटाने का फैसला किया था, जिसके एवज में यह केस आगे बढ़ा और आज सिंगुर रोजगार की कमी से गुजर रहा है।