छत्‍तीसगढ़ सरकार पर 82 हजार करोड़ का कर्ज, खबर हो रही वायरल, रमन सिंह के कार्यकाल में कितना था राज्य पर कर्ज? इस कर्ज से जनता पर क्या पड़ता है असर, जानें?

रायपुर : चुनाव नजदीक है और सोशल मिडिया में भी वार शुरू हो गया है, आम सोशल मिडिया प्रयोगकर्ता ख़बरों को वायरल करते है, बस पार्टीयों के मुद्दे उन्हें सही लगने चाहिये, इसी तारतम्य में बीते 3 दिन से सोशल मिडिया में खबर वायरल हो रही है कि छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान में 82125 करोड़ रूपये का कर्ज हो गया है, जिसका ब्याज सरकार प्रतिमाह लगातार 477 करोड़ रूपये चूका रही है, जो वर्षभर का 5724 करोड़ रूपये होता है, जिसको लेकर भाजपाई समर्थक कह रहे है, कि रमन सरकार में यह कर्ज 2018 के पहले 5000 करोड़ रूपये था और छत्‍तीसगढ़ राज्य उस समय तेलंगाना को बिजली बेचकर पैसा कमाता था, जो वर्तमान सत्ता के बाद बंद हो गया है, रमन सरकार के जाते – जाते यह कर्ज लगभग 10 हजार करोड़ रूपये था। इस आधार पर राज्य की माली हालत ख़राब हो रही है और छत्तीसगढ़ कर्ज की गहरे में डूब रहा है।

कब की है यह खबर और क्या है इसकी वास्तविकता :

यह खबर इस वर्ष 2023 के मार्च महीने की है और इसके अनुसार : छत्त्तीसगढ़ सरकार पर 82125 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसका कर्ज का सरकार हर महीने 477 करोड़ (अपुष्ट) रुपये ब्याज चुका रही है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, शिवरतन शर्मा, बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा में सरकार के कर्ज की जानकारी के लिए सवाल लगाया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बजट सत्र के दूसरे दिन राज्य गठन से लेकर अब तक लिए गए कर्ज के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

मुख्यमंत्री भूपेश ने लिखित जवाब में बताया कि सरकार ने राज्य के समग्र विकास के लिए अलग-अलग संस्थाओं से कर्ज लिया है। वर्ष 2022-23 के बजट में ब्याज के भुगतान के लिए 7222 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया था। जनवरी 2023 तक 4233 करोड़ रुपये का ब्याज के तौर पर भुगतान किया गया है। 2989 करोड़ रुपये का ब्याज का भुगतान बचा है। राज्य गठन के समय एक नवंबर 2000 को 4686 करोड़ रुपये का कर्ज था। इसी के अनुसार राज्य भूपेश सरकार में 82125 कर्जके बोझ से लदा है और रमन सिंह के समय लगभग 5000 करोड़ छत्तीसगढ़ पर था।

किसी राज्य अथवा देश पर कर्ज का क्या असर पड़ता है :

सबसे पहले आपने श्रीलंका का हाल देख लिया, जहाँ पूरा देश आपातकाल में आ गया और आम लोग सड़कों पर उतर आये, श्रीलंका के रूपये की वैल्यू गिर और देश में तेल की कमी हो गई, अराजकता फैलने लगी और देश में जरुरी सामान खत्म होने से आम जनता में हाहाकार मच गया, भोजन दवाई , पानी और तेल की कमी से श्रीलंका जूझने लगा

वहीँ पाकिस्तान में इसी कर्ज के चलते पाकिस्तानी मुद्रा की वैल्यू काफी गिर गई है, जिसके कारण वर्तमान में पाकिस्तान में कोई सरकार नहीं है और कार्यकारी सरकार चल रही है, जिसके कारण महंगाई चरम पर है, पेट्रोल 335/- लीटर, 1 सिंगल बिरयानी का दाम वहां पर 300/- है, आटा 250/- किलो बिक रहा है उसके लिये भी लाइन लगानी पड़ रही है, फल और सब्जियां 300/- किलो के ऊपर हो गई है, बिजली उत्पादन बेहद कम हो गया है , मात्र 4 घंटे की बिजली सप्लाई हो रही है और औसतन वहां का आम आदमी महीने में 25,000 रूपये कमाता है लेकिन बिजली बिल ही 30,000 रूपये आ रहा है, देश की अमिर जनता देश छोड़कर लंदन भाग रही है वीसा 30 लाख में मिल रहा है वो भी बड़ी मुश्किल से, क्यूंकि पाकिस्तानी रूपये की वैल्यू अंतर्राष्ट्रीय स्तर कम हो रही है।