पर्यटन : भारत के अधिकतर लोग विदेश यात्रा में थाईलैंड को प्राथमिकता देते है, इसका मुख्य कारण यह कम खर्च में बेहतरीन पर्यटन स्थल है। थाईलैंड ने पीक सीजन करीब आते ही अपने यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया है। थाइलैंड ने भारत और ताइवान से आने वाले सैलानियों के लिए वीजा सेवा में ढील दी है। एक सरकारी अधिकारी के बयान के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य अधिक पर्यटकों को आकर्षित करना और पर्यटन को बढ़ावा देने है। मंगलवार को थाईलैंड सरकार के प्रवक्ता चाई वाचरोन्के ने कहा कि भारत और ताइवान देश के सैलानियों को बिना वीजा के एक महीने की अवधि तक रहने की अनुमति है। पहले वीजा चार्ज 2000 थाई बाहट था जो भारतीय रुपयों में लगभग 5000 रूपये होता है।
इस साल 1.2 मिलियन सैलानी पहुंचे थाईलैंड :
इससे पहले सितंबर महीने में थाईलैंड ने चीन से आने वाले पर्यटकों के लिए वीजा अनिवार्यता को समाप्त कर दिया था। इस साल अब तक लगभग 1.2 मिलियन पर्यटक भारत से थाईलैंड पहुंचे हैं, जो दक्षिण कोरिया, चीन और मलेशिया के बाद पर्यटन बाजार में चौथे पायदान पर है। थाईलैंड आमतौर पर विदेशी पर्यटकों पर ही निर्भर है।
श्रीलंका ने भी वीजा अनिवार्यता को किया खत्म :
बता दें कि बीते सप्ताह श्रीलंका ने अपने देश में पर्यटन को जीवंत करने के लिए वीजा सेवाओं में छूट का ऐलान किया है। श्रीलंका ने भारत, चीन और रूस समेत छः देशों के पर्यटकों के लिए पायलट स्कीम के तहत बिना वीजा के देश में प्रवेश की इजाजत दी है। विदेशी सैलानियों के लिए ये ढील अगले छ महीने यानी 31 मार्च 2024 तक लागू रहेगी। श्रीलंका का मुख्य आय का स्रोत पर्यटन के साथ चाय निर्यात, परिधान, कपड़ा, चावल उत्पादन और अन्य कृषि उत्पाद हैं।