रायपुर ग्रामीण विधानसभा में भी कांग्रेस और भाजपा दोनों मुसीबत में।

रायपुर :  राजधानी के ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा, यह कह पाना संभव नहीं है, क्योंकि यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशियों को भीतरघात का डर सता रहा है। हालात ऐसे हैं कि बिरगांव, सेजबहार, डूंडा, बोरियकला, बोरियाखुर्द, दतरेंगा, कांदूल, माना बस्ती समेत आसपास के गांवों में कांग्रेस के प्रत्याशी का विरोध उनकी ही पार्टी के पार्षद, नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारी अंदर ही अंदर कर रहे हैं, जबकि भाजपा के पूर्व विधायक रहे नंदकुमार साहू, दावेदार रविंद्र सिंह, ओमप्रकाश देवांगन भाजपा के समर्थन में मोतीलाल साहू के साथ प्रचार तो कर रहे हैं, लेकिन कहीं न कहीं टिकट न मिलने की कमी उन्हें भी खल रही है। लेकिन अन्दर ही अन्दर क्या चल रहा है, ये सब समझ रहे है, हालांकि खुलकर कोई भी विरोध नहीं कर पा रहा है। इससे साफ है कि कांग्रेस-भाजपा दोनों में अंदरूनी कलह और भीतरघात की आग तेजी से फैल रही है। इसका नुकसान दोनों दलों के प्रत्याशियों को उठाने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। इस बार दोनों पार्टियाँ बगावती और असंतुष्ट नेताओं से परेशान है, ऊपर से नई – नई पार्टियाँ भी मैदान में है।

साहू समाज की बहुलता वाली इस सीट पर मोतीलाल साहू की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। वहीं कांग्रेस से टिकट की दावेदारी करने वाले भी चुनाव प्रचार से गायब दिखाई दे रहे हैं। साहू समाज के कई निष्ठावान कांग्रेस कार्यकर्ता, पार्षद, पदाधिकारी समेत अन्य कसडोल से कांग्रेस प्रत्याशी संदीप साहू के चुनाव प्रचार करने शहर छोड़कर कसडोल में डटे हुए हैं। बिरगांव में छत्तीसगढ़ियावाद भी सामने आ गया है। यहां कुछ विभिन्न स्थानीय संगठन कांग्रेस प्रत्याशी का विरोध कर रहे हैं। जहाँ कांग्रेस विरोध को लेकर परेशान है, वहीँ भाजपा भी सुकून नहीं बैठ पा रही है।

रायपुर की चार सीटों में से एक ग्रामीण विधानसभा सीट का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण शर्मा ने यहां से विजय हासिल की थी। इस बार उनकी जगह पर कांग्रेस ने उनके बेटे पंकज शर्मा को प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा ने साहू समाज का कार्ड खेलते हुए मोतीलाल साहू को मैदान में उतारा है। लिहाजा इस बार भाजपा पूरे दम-खम के साथ चुनावी मैदान में चुनौती दे रही है। हालांकि दोनों प्रत्याशी के धुंआधार चुनाव प्रचार को देखते हुए यह कह पाना जरा मुश्किल है कि बाजी कौन मारेगा? ग्रामीण विधानसभा में कांग्रेस या भाजपा किसका सिक्का चलेगा, यह 17 नवंबर को ही साफ होगा। हालांकि अभी तक यह सीट सत्यनारायण शर्मा के खाते में ही जाती रही है।

रोचक होगा मुकाबला :

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में रायपुर ग्रामीण सीट पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा को बतौर प्रत्याशी मैदान में उतारा गया था, वहीं भाजपा की ओर से नंदकुमार साहू चुनाव मैदान में थे। यह चुनाव कांटे की टक्कर का हुआ था, जिसमें कांग्रेस की जीत हुई थी। भाजपा के उम्मीदवार को जहां 68 हजार से कुछ अधिक वोट ही मिल सके थे, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी ने 78 हजार से अधिक वोट लाकर विजयश्री हासिल की। इस साल हो रहे चुनाव में रायपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से दोनों ही पार्टियों से नए प्रत्याशी आमने-सामने हैं। अब देखना रोचक होगा कि किस दल के पक्ष में मतदाता अपना वोट देते हैं। इस बार ज्यादा दम भाजपा का दिख रहा है , क्यूंकि बाहरी प्रत्याशी और छत्तीसगढ़ियावाद का मुद्दा सामने आ गया है।

खामोश है मतदाता :

रायपुर विधानसभा क्षेत्र के सेजबहार, डूंडा, कांदूल, दतरेंगा, मुजगहन,माना बस्ती, भनपुरी आदि झुग्गी क्षेत्र का जायेजा लेकर मतदाताओं की नब्ज टटोलने की कोशिश की। अधिकांश मतदाताओं ने खुलकर तो कुछ नहीं कहा लेकिन इतना जरूर कहा कि जो विकास का काम करेगा, उसे ही विधायक चुनेंगे। क्षेत्र के कई घर ऐसे हैं, जहां एक परिवार के कुछ कांग्रेस तो कुछ भाजपा से प्रभावित दिखाई देते हैं। कुल मिलाकर मतदाताओं के बीच फिलहाल खामोशी है। यह खामोशी 17 नवंबर को होने जा रहे मतदान के दिन ही टूटेगी। अभी इस क्षेत्र को मतदाताओं में मन में क्या चल रहा है, यह स्पष्ट नहीं हो पाया।