स्वास्थ्य : हम अक्सर ऐसी घटनायें सुनते रहते हैं कि अमुक व्यक्ति रात में बिस्तर पर साेया और सुबह उसका शव मिला। बाद में पता चलता है कि ह्दयघात से उसकी मौत हुई थी। सर्दी के मौसम में ह्दयघात का खतरा काफी बढ़ जाता है। चिंता की बात यह है कि कम उम्र के युवा भी ह्दयघात की चपेट में लगातार आने लगे हैं। ठंड में ह्दय की धमनियों में सिकुड़न होने लगती है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। इसका मुख्य कारण चिकनाई वाले पदार्थों का ज्यादा मात्रा में सेवन है। पहले लोग मेहनत करते थे तो चिकनाई का असर कम हो जाता था।
सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार की चपेट में लोग आते हैं :
ठंड के मौसम में न सिर्फ सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार की चपेट में लोग आते हैं बल्कि दिल भी बीमार होने लगता है। गर्मी की तुलना में ठंड के मौसम में ह्दयघात का खतरा काफी बढ़ जाता है। अस्पतालों की ओपीडी व कैजुअल्टी में ह्दय रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। ठण्ड में रक्त का प्रवाह भी कम होने लगता है, नींद से सीधा उठने पर रक्त का संचार भी तुरंत सक्रिय नहीं हो पाता है।
ये हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं :
अस्पतालों में रोजाना हार्ट अटैक के मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। छाती में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी होना, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, थकान महसूस होना जैसे लक्षण प्रकट होने पर सतर्क हो जाना चाहिए। ये हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं।
ह्दय रोगियों को ज्यादा ठंड में सैर सपाटा नहीं करना चाहिए :
इस दशा में बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंच जाना चाहिए। ह्दय रोगियों को इस मौसम में सुबह यानी ज्यादा ठंड में सैर सपाटा नहीं करना चाहिए। धूम्रपान व शराब से पूरी तरह दूरी बना लेना चाहिए। भोजन में नमक का प्रयोग कम करना चाहिए। ज्यादा तेल, मसाला व चिकनाईयुक्त भोजन से बचना चाहिए। गर्म वातावरण से एकदम ठंडे वातावरण में जाने से बचना चाहिए। खासकर लोग जिन अण्डों को स्वास्थ्यवर्धक समझते है, वही रोज खाना ह्दयघात का कारण बन सकते है, जबकि आज के समय में अधिकतर चीजें केमिकल युक्त और व्यापारिक फायदे के हिसाब से तैयार होने लगी है।