रायपुर : 17 नवम्बर आज छत्तीसगढ़ में मतदान का द्वितीय चरण था, जिसमें आम जनता ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया, कई क्षेत्रों के मतदाता शाम को अपना मतदान करने केन्द्रों पर पहुंचे जिसके कारण मतदान शाम के 6 बजे के बाद तक होता रहा। यहाँ राजधानी की राजनीति में भूचाल लाने वाले सिन्धी समाज ने भी अपना दमखम दिखाया। सिन्धी समाज भाजपा का कोर वोटर है, इसलिये समाज के वरिष्ठों का कहना है कि समाज को जितना सम्मान भाजपा से मिलना चाहिये था वो आज तक नहीं मिला है, समाज के लोगों का कहना है कि आज तक समाज के कल्याण के लिये कोई भी कार्य भाजपा की तरफ से नहीं किया गया है, ना ही आज तक सिन्धी समाज के लोग जो 1947 से विस्थापित होकर आये थे, उनको आज तक मालिकाना हक़ नहीं मिला, राष्ट्रीय स्तर पर सभी संस्कृतियों को राष्ट्रीय टीवी चैनल की सौगात है, लेकिन आज तक 20 सालों से लगातार मांग करने के बावजूद सिन्धी समाज को दूरदर्शन का सिन्धी चैनल नहीं मिल पाया है, बंटवारे के समय गुजरात के कच्छ के पास सिन्धी समाज को बसाये जाने की बात हुई थी, आज तक उस पर भी कोई कार्य नहीं हो पाया, जिससे सिन्धी समाज को राज्य के नाम पर अपना कोई स्थान हो सके। राजपथ में आयोजित होने कार्यक्रमों में भी सिन्धी समाज की संस्कृति को प्रदर्शित किया जाये, सिन्धी समाज के लिये एक सरकारी यूनिवर्सिटी की मांग भी की गई जिसे आज तक पूरा नहीं किया गया, अगर ये सब मांगे समाज की जायज नहीं है तो कम से कम से समाज को एकमात्र चेट्रीचंड्र महोत्सव पर तो छूट्टी दी जा सकती है, 15 साल की राज्य की सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा ने इस मांग को पूरा नहीं किया।
मजबूरी में सिन्धी समाज के लोगों ने भाजपा को वोट दिया :
जहाँ सिन्धी समाज बंटवारे के दर्द का जिम्मेदार एक पार्टी को मानता है, जिसके कारण उनके बुजुर्गों और पूर्वजों को विस्थापन का दर्द सहना पड़ा, इसलिये सिन्धी समाज के लोग आमतौर पर उस पार्टी विशेष का समर्थन करना पसंद नहीं करते, फिर भी आज की कुछ युवा पीढ़ी उक्त पार्टी के साथ खड़ी नजर आती है, जो मात्र चंद लोग ही है। लेकिन सम्पूर्ण समाज एक तरफ़ा भाजपा के पक्ष में ही खड़ा नजर आता है। उपरोक्त शिकायतों को लेकर सिन्धी समाज भाजपा से नाराज तो चल ही रहा है, इसमें कोई संशय नहीं है, लेकिन सिन्धी समाज के लोगों का कहना है, की 60-70 साल कांग्रेस के देख लिए, जो कार्य राष्ट्रहित में मोदी की भाजपा सरकार ने किये है, उनका मुकाबला दूर – दूर तक नहीं है। कांग्रेस के लिये उन्होंने कुछ भी कहने से मना किया कम शब्दों सिर्फ इतना ही कहा जो देश के साथ नहीं सिन्धी समाज उसके साथ नहीं। भाजपा से शिकायत होने के बावजूद समाज के लोगों ने मजबूरी में भाजपा को वोट दिया।
ये कहा समाज के लोगों ने :
VIP स्टेट निवासी प्रकाश बजाज ने कहा : मैंने सिन्धी समाज से आव्हान किया है कि 5 साल में एक बार ही सरकार चुनने का मौका मिलता भावना में बहकर राष्ट्रविरोधी पार्टी को वोट ना दें सिर्फ भाजपा को ही अपना वोट दें, मैंने भी अपना वोट भाजपा को ही दिया है।
सिन्धी युवा कपीश खम्हारडीह से वोट देने के बाद बताया : सिन्धी समाज का युवा जागरूक है, वो राजनीति समझता है, मैंने भी अपना वोट भाजपा को ही राष्ट्रहित में दिया है।
अमलीडीह निवासी सुरेश राजवानी ने बताया : मेरे परिवार के लोग पहले कांग्रेस को ही वोट करते आये है, लेकिन जैसे – जैसे युवा पीढ़ी जागरूक हो रही है, हमने अपना वोट लगातार भाजपा को ही दिया है, हम अपने समाज के साथ जरुर खड़े है, लेकिन राष्ट्र हमारे लिये पहले है, इसलिये हमने भाजपा को ही वोट दिया है।
राजेन्द्र नगर निवासी संदीप ने बताया : उनका वोट ग्रामीण में आता है, हमारे लिये कोई धरम संकट नहीं है, हम भाजपा को ही वोट देते है, सिन्धी समाज के बाकी लोग भी भाजपा का ही समर्थन कर रहे है।
महावीर नगर निवासी विकास मोटवानी वोट देकर जब बाहर निकले तो उन्होंने कहा : हमने भी अपना वोट भाजपा को ही दिया है, हम अजीत कुकरेजा के समर्थन में है, लेकिन पहली प्राथमिकता राष्ट्रवाद है।
शांति नगर निवासी गोपाल माखीजा ने बताया कि समाज के आपस के छोटे वर्ग ने भाजपा को ही वोट देना तय किया है, हम भाजपा को ही वोट दे रहे है।
वरिष्ठ समाजसेवी जवाहर नागदेव ने कहा : हमारा वोट भी भाजपा के पक्ष में ही है, समाज को पार्टी विरोधी माहौल बनाना जरुरी था, इन्होने सिन्धी समाज को मुफ्त का वोटर जो समझ रखा है। इसलिये पार्टियों को बैकफुट पर लाना जरुरी था।
कटोरा तालाब के सुरेन्द्र खेमानी ने बताया हम सिर्फ मोदी के चेहरे पर ही वोट करेंगे, और मोदी मतलब भाजपा, स्थानीय मुद्दों में इन्होने कुछ भाजपा नेताओं से कड़ी नाराजगी जताई, लेकिन वोट वो कमल को ही देंगे। समाज के मुद्दे पर उन्होंने कहा समाज खुद भाजपा के समर्थन में ही है। मात्र चार लोगों के कहने से समाज नहीं चलता।
भोईपारा के प्रेम बिरनानी ने बताया की वो अपने परिवार सहित पूरे वोट भाजपा को ही देंगे, इसमें कोई संशय नहीं है।
DD नगर के 40 वर्षीय नरेश कुकरेजा और सोनम कुकरेजा ने कहा कि समाज की आड़ में कुछ लोग ही कांग्रेस प्रत्याशी को निर्दलीय के नाम से जितवाना चाहते है, हमने भी भाजपा को ही अपना वोट दिया है। धर्म हित से बढ़कर कुछ नहीं है। सिंध छोड़ा है अब हिन्द नहीं।
अवन्ती विहार की कविता साधवानी ने कहा सिर्फ और सिर्फ ही महत्वपूर्ण है, आगे कुछ कहने का मतलब नहीं है। हालाँकि भाजपा से नारजगी जरुर है।
अवन्ती विहार के ही हितेश वाधवानी ने कहा समाज की अहमियत को नकारा नहीं जा सकता लेकिन पहले देश और धर्म, चुनावी रेवड़ी की लालच के बारे में पूछने पर कहा इसलिये तो पिछली बार भाजपा हारी थी जो 2100/- के मोबाईल फ़ोन लेकर 6000/- के बताये और हमारी गाढ़ी कमाई को बाँट दिया।
ऐसे ही सिन्धी समाज के कई मतदाता वोट देकर निकलने के बाद धर्मसंकट के कारण कुछ भी साफतौर पर कहने से बच रहे थे, कि कहीं उनकी बातों पर विवाद ना खड़ा हो जाये, कई लोगों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि हम सामाजिक तौर पर तो अजीत कुकरेजा के पक्ष में है, अगर वो जीत जाये तो समाज की जीत ही होगी, लेकिन राज्य को इस समय भाजपा की आवश्यकता है तो हम भाजपा को ही वोट देंगे। उन्होंने भाजपा के वो चेहरे गिनवाये जिनसे सिर्फ सिन्धी समाज ही नहीं बल्कि आम जनता ही नाराज है, जिसमें उन्होंने राजेश मूणत, बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर, अमर अग्रवाल, रमन सिंह, प्रेम प्रकाश पाण्डेय, श्रीचंद सुन्दरानी सहित लगभग 12 नाम गिनाये।
गौसेवक ओमेश बिसेन ने कहा कि सिन्धी समाज एक विश्वसनीय समाज है, जिस तरह से सिन्धी समाज ने अपनी एकजुटता दिखाई वो पार्टियो के लिये एक कड़ा सबक है, हमेशा भाजपा के नेताओं ने सिन्धी समाज को छला है, लेकिन किसी राष्ट्रविरोधी पार्टी को सिन्धी समाज कभी समर्थन नहीं दे सकता इसलिये, समाज ने अपना वोट एक तरफ़ा भाजपा को दिया है, सिन्धी समाज की इस एकजुटता से बड़ी पार्टियाँ सकते में आ गई, समाज का यह तरीका बेहद ही प्रशंसापूर्ण रहा।
ओमेश बिसेन ने कहा भाजपा नेता कह रहे थे कि श्रीचंद सुन्दरानी हारा हुआ प्रत्याशी है तो हारे हुये प्रत्याशी राजेश मूणत को टिकट कैसे दे दिया? और अगर सुन्दरानी की रिपोर्ट सही नहीं थी तो मूणत की कौन सी सही थी? इन बहानों के बजाये भाजपा सिन्धी समाज के अपने किसी अन्य सक्रिय सिन्धी कार्यकर्त्ता को टिकट दे सकती थी, जिसमें नामों की कोई कमी नहीं है, कुल मिलाकर एक राष्ट्रवादी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है।
उपरोक्त तौर पर सिन्धी समाज ने भाजपा से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुये भाजपा को अपना 90% समर्थन दिया है। कुछ लोगों ने ही पुख्ता मजबूती के साथ सिन्धी सामाज के प्रत्याशियों को अपना वोट देने की सहमति जताई है।