जकार्ता (इंडोनेशिया) : खबर 16 नवम्बर की है, इंडोनेशिया के एचे राज्य के एक समुद्री किनारे पर गुरुवार शाम 250 रोहिंग्या लकड़ी की नाव से पहुंचे थे। स्थानीय लोगों ने उनको वहां उतरने नहीं दिया। दो बार इन लोगों ने वहां रुकने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। इंडोनेशियाई लोगों ने इन्हें उसी लकड़ी की नाव के जरिए गहरे समंदर के सफर पर वापस भेज दिया। फिलहाल, किनारे से वापस समंदर में जाने के बाद इन लोगों की लोकेशन नहीं मिल सकी। शुक्रवार को न्यूज एजेंसी ‘एएफपी’ से बातचीत में स्थानीय लोगों ने घटना की पुष्टि की।
तीन हफ्ते पहले बांग्लादेश से चले थे :
- उत्तरी एचे के लोगों का कहना है कि रोहिंग्या रिफ्यूजियों ने तीन हफ्ते पहले बांग्लादेश से सफर शुरू किया था और इसके बाद यहां पहुंचे थे। इस बोट में कई महिलाएं और बच्चे थे।
- जानकारी के मुताबिक – जैसे ही रोहिंग्या मुस्लिमों से भरी बोट किनारे पहुंची तो स्थानीय लोग जुट गए। इन्होंने रिफ्यूजियों से कहा कि वो फौरन जहां से आए हैं, वहीं लौट जाएं। इसके बाद वहां कुछ झड़प भी हुई।
- कुछ रोहिंग्या इतने थके थे कि वो वापसी के लिए बोट में तो बैठ गए, लेकिन कुछ दूरी पर एक और किनारे पर जाकर आराम करने के लिए लेट गए। स्थानीय लोग यहां भी पहुंच गए और उन्हें जबरदस्ती लकड़ी की उसी नाव में बिठा दिया। इसके बाद इस नौका को समंदर में भेज दिया गया।
- रोहिंग्या जबरन दूसरों देशों में शरण ले रहे है, ये मुस्लिम होने के बाद भी कोई मुस्लिम देश इन्हें शरण नहीं दे रहा है।
नाव की लोकेशन नहीं मिल रही :
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक – इंडोनेशिया के किनारे से भगाए जाने के बाद रिफ्यूजियों से भरी इस नाव का कोई पता-ठिकाना नहीं मिल रहा है। हर साल म्यांमार से ये भगाए गए रोहिंग्या शरणार्थी इसी तरह अलग-अलग देशों में पनाह लेने की कोशिश करते हैं। इनमें से कई की सफर के दौरान मौत की खबरें अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में आती रहती हैं।
- बांग्लादेश में रोहिंग्या मुस्लिमों की बहुत बड़ी आबादी है। ये सभी म्यांमार से ही यहां पहुंचे हैं। अब इन्हें वहां से भी निकाला जा रहा है। इसके बाद इन लोगों की पहली कोशिश मलेशिया या इंडोनेशिया पहुंचने की कोशिश होती है। इसकी वजह यह है कि ये दोनों ही मुस्लिम देश हैं। इसके बावजूद रोहिंग्याओं को किसी तरह की मदद देने के लिए तैयार नहीं हैं। रोहिंग्या मुस्लिमों के हालात बहुत ख़राब है।
बोझ बन गए हैं रोहिंग्या रिफ्यूजी :
- न्यूज एजेंसी से बातचीत में इंडोनेशिया के एचे प्रांत के एक लोकल लीडर सैफुल अफवादी ने कहा- हम इन लोगों से तंग आ गए हैं। वो यहां आते हैं। इनमें से कुछ न जाने कहां गायब हो जाते हैं। सही बात तो ये है कि कुछ एजेंट्स के जरिए मानव तस्करी यानी ह्यूमन ट्रैफिकिंग भी हो रही है। ये लगातार दूसरे देशों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहे है।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक – पिछले तीन सप्ताह पूर्व करीब 600 रोहिंग्या रिफ्यूजी पश्चिमी इंडोनेशिया पहुंचे थे। इसके बाद अगले हफ्ते मंगलवार को 196 और इसके बाद अगले दिन यानी बुधवार को 147 लोग और पहुंचे।
- एक अनुमान के हिसाब से 2022 में करीब दो हजार रोहिंग्या मुस्लिम इंडोनेशिया और मलेशिया पहुंचे। UN की रिपोर्ट के हिसाब से पिछले साल 2 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों की समुद्री सफर के दौरान अलग-अलग वजहों से मौत हो गई।
म्यांमार सरकार इन्हें नहीं मानती अपना नागरिक :
म्यांमार में करीब 10 लाख रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं, लेकिन म्यांमार की सरकार इन लोगों को अपना नागरिक नहीं मानती है। इस तरह इन लोगों का कोई देश ही नहीं है। ये शुरुआत से ही भीषण दमन का सामना करते आ रहे हैं। म्यांमार की सरकार का कहना है कि इन्होने स्थानीय बौद्धों को काफी परेशान किया है, जिसके कारण सरकार इन्हें बाहर कर रही है।
पिछले कुछ समय से देश में लगातार भीषण दंगे हुए, जिसमें जान-माल का सबसे ज्यादा नुकसान रोहिंग्या मुस्लिमों को ही उठाना पड़ा। इसके चलते ये बांग्लादेश और थाईलैंड की सीमा पर स्थित शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं, जहां इनकी हालत बहुत खराब है। बांग्लादेश की सीमा पर ही करीब 3 लाख रिफ्यूजी शरण लिए हुए हैं। ये शरणार्थी भारत में भी शरण लिये हुये है।
भारत में रोहिंग्या की समस्या :
दिल्ली में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए बड़ी संख्या में रहते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में 1,100 से ज्यादा रोहिंग्या घुसपैठिए रहते हैं। बताया जाता है कि ये लोग अवैध तरीके से भारत में घुसे हैं। इन शरणार्थियों ने दिल्ली में अवैध तरीके से आधार कार्ड, पहचान पत्र, राशन कार्ड बनवा लिए हैं। ये देश के संसाधनों का अनुचित लाभ उठा रहे है, साथ ही ये लोग देश की सुरक्षा को लेकर खतरा भी पैदा कर रहे है, इनके पास खुद के कोई संसाधन नहीं है, जिससे इनके द्वारा चोरी और लूट की घटनाओं को अंजाम देने का डर भी बना रहता है।
2003 में दिल्ली पुलिस ने अवैध घुसपैठियों को पकड़ने के लिए एक सेल बनाया था और इस दौरान करीब 40 हजार अवैध घुसपैठिए को पकड़ा भी गया था।