एग्जिट पोल ने छत्तीसगढ़ में भाजपा की जीत को तय कर दिया, जानें कैसे बनेगी भाजपा की सरकार?

रायपुर : सर्वप्रथम आपको ये स्पष्ट कर दें कि एग्जिट पोल सिर्फ एक पूर्वानुमान है, सभी एजेंसियां अपने – अपने हिसाब से ही अलग – अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों की राय और मंशा को जानते है, ये जरुरी नहीं की जिनसे पूछा गया है, वो सभी मतदाताओं की सोच हो, बल्कि वह तो सारांश होता है। सभी एग्जिट पोल ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत बताई है, जबकि आपको बता दें ये एग्जिट पोल पहले भी कई बार फेल हो चुके है। आम तौर पर इसे यूँ समझा जाये कि जनता की उत्सुकता को भुनाते हुये अपने लिये व्यूवरशिप बढ़ाना होता है।

चुनाव आने के पहले तक :

चुनाव की घोषणा होने के बाद चुनाव आते तक छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही थी, क्यूंकि कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री भूपेश ने जिस तरह से नरेंद्र मोदी की केन्द्रीय नीतियों राज्य स्तर पर कॉपी किया, उससे जनता बहुत खुश हुई, खासकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति को लेकर भूपेश ने जैसा दांव खेला वह सराहनीय था, श्री राम मंदिर के मुद्दे की टक्कर में राज्य में राम वन गमन पथ और कौशल्या मंदिर, भगवान राम की मूर्ति का अनावरण जैसे मुद्दों ने भूपेश को अच्छा प्रतिसाद दिया। छत्तीसगढ़ी त्योहारों में छूट्टी देना और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को आगे बढ़ाना। छत्तीसगढ़ी त्योहारों को प्राथमिकता देने से क्षेत्रवासी भूपेश के पक्ष में आ गये। किसानों की कर्जमाफी ने उन्हें बहुत मजबूती दी, जिससे भूपेश के कारण राज्य में कांग्रेस की सत्ता वापसी तय मानी जा रही थी।

चुनाव नजदीक आते ही बदल गये समीकरण :

चुनाव के समय जब भाजपा ने अपने बुझे हुये और जनता को बोर करने वाले चेहरे उतारे तो भाजपा की हार वहीँ से तय हो गई थी। बीते दो वर्षों से भाजपा ने पहले अपनी रणनीति बनाई और फिर बीते एक वर्ष में उस पर काम चालू किया, रणनीति के पत्ते इकट्ठे नहीं खोले जाते, समय पर खोले जाते है, चुनाव नजदीक आते तक भूपेश सरकार के भ्रष्टाचार के मुद्दे भाजपा ने जनता के सामने लाना शुरू कर दिया। दूसरी तरफ दारुबंदी ना होने से महिला वर्ग भूपेश सरकार से खासा नाराज हो गया। किसानों में अधिकतर किसान भूपेश के पक्ष में तो है, लेकिन दूसरी तरफ गरीबों को प्रधानमंत्री आवास ना मिलने से वो भी काफी संख्या में कांग्रेस से नाराज है। वहीँ महादेव एप्प के शुभम सोनी का विडियो सामने आने से राजनैतिक माहौल बदल गया, भूपेश को 508 करोड़ के लेनदेन की बात सामने आई। बिरनपुर में युवक की मौत का मामला भी कांग्रेस के वोट काट गया, यह मुद्दा साम्प्रदायिक बना था, जिसका असर पूरे राज्य पर हुआ।

उपरोक्त दोनों पक्षों के कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर जो औसत निकलती है, उसमें बढ़त तो दोनों पार्टियों की बराबर दिखती है, इसलिये दोनों पार्टियों में कांटे की टक्कर है, लेकिन अगर 44 सीटों में कांग्रेस रुक जाती है तो भाजपा की सरकार तय है।

कैसे बनेगी भाजपा की सरकार ? :

मुद्दे तो बहुत है , लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दे ज्यादा मायने रखते है, उपरोक्त सब मुद्दे जनता से जुड़े हुये थे। अब जानते है राजनैतिक मुद्दे जिनको लेकर सरकार की उठा – पटक होगी , जिसमें सबसे पहले हम आते है, टीएस सिंहदेव के मुद्दे पर, ये ऐसे व्यक्तित्व है, जिन्होंने ने कांग्रेस के 5 साल के शासन में अपनी छवि को स्वच्छ और बरक़रार रखा है, कोरोना में इन्होने अपना बेहतर दायित्व निभाया है। राज्य में सरकार बनाने के लिये इन्होने ने ही सारी व्यवस्थायें की थी, और मुख्यमंत्री पद के लिये ढाई-ढाई साल तय किये गये थे, लेकिन आलाकमान ने भूपेश के 5 साल बरकरार रखे, जिससे टीएस सिंहदेव को चोट पहुंची। चुनाव समय आने तक इन्हें उपमुख्यमंत्री बनाकर संतुष्ट किया गया, और जनता के सामने उन्होंने ख़ुशी जाहिर की, लेकिन अंदरूनी तौर पर वो खुश नहीं थे, आखिर वो भी एक आम इन्सान है। इनको लेकर हमेशा राजनैतिक गलियारों में बातें चली है कि ये भाजपा के साथ जुड़ सकते है, इन्हें रमन सिंह का मित्र भी बताया गया।

कुछ सीटों के अंतर में भाजपा की सरकार बनाने के लिये टीएस सिंहदेव भी अपनी भूमिका निभा सकते है। कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलना मुश्किल है, जिसका फायदा भाजपा उठा लेगी, इस बार निर्दलीय नेताओं की जीत में इजाफा देखने को मिल रहा है, जो कि ऑपरेशन लोटस की सफलता के सूत्रधार बन सकते है।