राजधानी की राशन दुकानों से 15 हजार क्विंटल से ज्यादा चावल की गड़बड़ी, दुकान संचालकों के खिलाफ अब तक दर्ज नहीं हुई एफआईआर।

रायपुर : राशन दुकानों में लगातार गड़बड़ी सामने आ रही है, छत्‍तीसगढ़ के रायपुर जिले की 142 राशन दुकानों से लगभग 17 हजार क्विंटल चावल की गड़बड़ी का मामला सामने आया, इसमें अब तक सिर्फ 8,900 क्विंटल की ही वसूली हो पाई है। इनमें 88 दुकानें शहरी और 54 दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों की हैं। इन राशन दुकान संचालकों के खिलाफ अब तक एफआइआर दर्ज नहीं कराई गई है।

खबर है कि सितंबर 2022 में स्टाक का ऑनलाईन मिलान करने पर राशन कम होने का खुलासा हुआ था। कोरोना के दौरान सबसे ज्यादा गड़बड़ी की बात सामने आई थी। वहीं, खाद्य विभाग के अफसरों के अनुसार राजस्व विभाग द्वारा 86 सौ क्विंटल चावल के लिए आरसीसी जारी की गई है जबकि तीन हजार क्विंटल चावल की वसूली प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसको लेकर लगातार कार्यवाही हो रही है।

प्रदेश में 254 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी, खुले बाज़ार का राशन भी भरा जा रहा :

प्रदेश की राशन दुकानों से 254 करोड़ रुपये के 6.18 लाख टन चावल सहित 8,100 टन शक्कर का घोटाला हुआ था। विभाग का दावा है कि इन राशन दुकानों से गायब हुआ 1.5 लाख टन चावल और 3100 टन शक्कर की भरपाई कर दी गई है। जिन राशन दुकानों से गड़बड़ी सामने आई थी, अब उन्हीं दुकानों में खुले बाजार से राशन खरीदकर भर दिया गया है, जबकि बिना शासन के किसी आदेश के खुले बाजार से चावल और शक्कर खरीदकर राशन दुकानों में नहीं रखा जा सकता। वहीं, इंस्पेक्टर माड्यूल में भी इसकी एंट्री भी करा दी गई है।

बिना गुणवत्ता जांचे खाद्यान्न भरने का नियम नहीं :

विभाग के अनुसार राशन दुकानों में केवल नागरिक आपूर्ति निगम (नान) ही एफसीआइ से शक्कर और राइस मिल से अपने क्वालिटी एक्सपर्ट से चावल फाइनल कर भेज सकता है। इसका भौतिक सत्यापन राशन दुकान की निगरानी समिति द्वारा किया जाता है। राशन दुकानों से गायब हुए चावल और शक्कर को वसूलने के लिए संचालनालय स्तर पर प्रतिपूर्ति का खेल करवा दिया गया है। सरकारी रिकार्ड के अनुसार चोरी हुआ खाद्यान्न दुकानों में ही है। प्रदेश की राशन दुकानों से 254 करोड़ रुपये के 6.18 लाख मीट्रिक टन चावल सहित 8100 मीट्रिक टन शक्कर की पांच हजार से अधिक राशन दुकानों से कालाबाजारी हुई थी। खाद्य नियंत्रक रायपुर कैलाश थारवानी ने बताया कि, राशन दुकानों से वसूली की कार्यवाही चल रही है। राजस्व विभाग द्वारा आरसीसी भी जारी की गई है। प्रयास किया जा रहा है कि सभी दुकानों से वसूली कर ली जाए। अंत में एफआइआर के विकल्प की दिशा में कार्य किया जायेगा, कुल मिलाकर अभी तक इस मामले में FIR दर्ज नहीं हो पाई है।