रायपुर : मोबाईल और इंटरनेट के बढ़ते प्रयोग के कारण लोग इन्हीं पर निर्भर हो गये है, वो बिना सोचे समझे हर चीज का जवाब गूगल पर ही खोजते है, लेकिन इन सबको लेकर आपको जागरूक और सावधान रहना आवश्यक है, जो जानकारी आप खोज रहे है वो कितनी सही है उसकी अच्छे से जांच कर लें। अधिकांश लोग किसी भी कंपनी या फर्म के कस्टमर केयर का नंबर ढूंढने के लिए गूगल पर ही खोजते हैं। लेकिन उन्हें पता नहीं होता कि यहां पर जो नंबर मिल रहा है वो साईबर ठग का हो सकता हैं। इस प्रकार से लोग जानकारी के अभाव में ठगों के चंगुल में लगातार फंस रहे हैं। साईबर ठगों ने आम लोगों के उपयोग से जुड़ी कंपनियों के नाम से मिलती-जुलती नाम की फर्म बनाकर अपना मोबाईल नंबर दे रखा है।
लोग उन्हीं मोबाईल नंबरों पर काल करते हैं, फिर साईबर ठग उन्हें अपने झांसे में ले लेते हैं। कुछ शातिर ठग तो पीड़ित को मैसेज भी करते हैं कि आपके दो बैंकों का बैलेंस इस बार छोड़ दिया हूं। टिकरापारा क्षेत्र की एक युवती कुछ इसी तरह से ऑनलाईन ठगी का शिकार हो गई। इस मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऐसी ही कई घटनायें लगातार पुलिस के पास पहुँच रही है।
हर साल सैकड़ों लोग हो रहे शिकार :
राज्य में ऑनलाईन ठगी के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। रायपुर जिले में सालभर में 400 से ज्यादा लोग साईबर ठगों के झांसे में फंसे हैं। ऑनलाईन ठगी का शिकार होने की बड़ी वजह जागरूकता की कमी है। साईबर क्राइम और साईबर ठगी को लेकर अधिकांश लोगों को अब भी सही जानकारी नहीं हैं। इससे कैसे बचें और कहां शिकायत करें? इसकी जानकारी का अभाव है। इसी के चलते रायपुर पुलिस साईबर संगवारी जैसे कई अभियान चला चुका है। लोग अधिकतर अपनी लापरवाही से ही शिकार होते है।
ऐसे करें सही नंबर की पहचान :
आमतौर पर किसी भी कंपनी या फर्म का टोल फ्री कस्टमर केयर-हेल्पलाइन नंबर हमेशा 180… से शुरू होता है, न कि सामान्य मोबाईल नंबर।
कंपनी का नंबर खोजने के लिए उसके आफिशियल प्रमुख वेबसाईट पर जाएं। यह सर्च इंजन में कंपनी के नाम के साथ आफिशियल वेबसाईट टाइप करने पर आ जाता है।
कंपनी या फर्म का एप्लीकेशन डाउनलोड कर लेना चाहिए। इसमें कंपनी के सही संपर्क नंबर और ई-मेल आईडी होते हैं।
सर्च करके निकाले गए किसी मोबाईल नंबर पर काल करने पर अगर वो किसी तरह का लिंक भेजकर राशि भुगतान करने को कहता है, तो अलर्ट हो जाएं। कभी भी भुगतान लेने के लिये किसी प्रकार का OTP या पिन बताना नहीं होता।
इनके कस्टमर केयर के नाम पर होती है ठगी :
कोरियर सर्विस, ई-कामर्स कंपनियां, गैस सिलेंडर बुकिंग, मोबाइल-डीटीएच रिचार्ज, इंटरनेट मीडिया में विज्ञापन, बिजली बिल, होटल बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन। इसके अलावा कई कंपनियां अपना संपर्क नंबर नहीं देती बल्कि अपने एप्लीकेशन या वेबसाईट पर ऑनलाईन चैटिंग का ऑप्शन देती है।