पूर्व मंत्री डहरिया की पत्नी को जमीन आबंटन में चौकाने वाला मामला आया सामने।

रायपुर : पूर्व मंत्री शिव डहरिया की पत्नी शकुन डहरिया की संस्था राजश्री सदभावना समिति वाले भवन और कब्जे वाली जमीन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले को लेकर राजनैतिक गलियारों में बवाल मचा हुआ है। समिति ने उक्त भूमि को निजी बताया है। पंजीयन विभाग के विक्रय विलेख में खुलासा हो रहा है कि साल 2022 में केंद्रीय कर्मचारी गृह निर्माण समिति मर्यादित ने राजश्री सदभावना समिति और अध्यक्ष शकुन डहरिया को सिर्फ 4 लाख रुपए कीमत और 25 हजार रुपए स्टाम्प ड्यूटी पर दे दिया था।

बाद में इसकी रजिस्ट्री समिति के अध्यक्ष सीएस ठाकुर ने कराई। चौंकाने वाली बता यह है कि जब समिति की निजी जमीन थी तो उसका हस्तांतरण मेयर इन काउंसिल से करवाने की जरूरी क्यों पड़ी। इस भवन में लगभग दो करोड़ की मशीनरी सरकारी राशि से किसके आदेश से लगाया गया। बता दें कि पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने खुद बयान दिया था कि मेयर इन काउंसिल से स्वीकृत हुआ था। जोन-10 के आयुक्त ने खुद कहा था कि इस पर साढ़े तीन करोड़ रुपए खर्च किेए गए हैं।एमआईसी से 16 जून को जारी किया गया पत्र भी सामने आया है, जिसमें 3500 वर्ग फीट आवंटन का जिक्र है। जबकि, कब्जा 15000 वर्गफीट में किया गया है। इसके अलावा निगम ने निजी संस्था के लिए 3 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि 24 मार्च 2022 को रजिस्ट्री हुई है तो तीन माह बाद खुद की जमीन के आवंटन के लिए एमआईसी में प्रस्ताव भेजना संदेह का विषय है।

हाईकोर्ट से भवन की सील खोलने का आदेश :

नगर निगम द्वारा राजश्री सदभावना समिति को आवंटित भवन के मामले में समिति ने हाईकोर्ट की शरण ली थी, जिसके बाद न्यायालय ने नगर निगम को सील किए गए भवन का ताला खोलने का आदेश दिया है। आवंटन और पूरे प्रकरण पर आगे 13 मार्च को सुनवाई की जायेगी। इस मामले में पूर्वमंत्री का नाम आने बवाल मच गया है।

एमआईसी में 3500 वर्गफीट जमीन आवंटन का आया था प्रस्ताव :

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इस मामले में 16 जून 2022 को महापौर एजाज ढेबर की अध्यक्षता वाले मेयर इन काउंसिल की बैठक में 3500 वर्गफीट जमीन को राजश्री सद्भावना समिति को आवंटित करने का प्रस्ताव लाया गया। अगर यह जमीन निजी रही, तो नगर निगम की एमआईसी में इस आशय का प्रस्ताव क्यों आया? ये सबसे पहला सुलगता सवाल है।

7 नवंबर और 20 दिसंबर को नगर निगम से अशोका मिलेनियम स्थित ए एंड ए वेंचर्स एजेंसी से सोनी कंपनी की 75 इंच, 55 और 65 इंच की टीवी, वाशिंग मशीन, दर्जनभर महंगी आलमारी सहित 30 लाख के होम एप्लायेंस खरीदने निविदा को स्वीकृति दी गई। यदि ये जमीन निजी है, तो नगर निगम ने वहां लाखों रुपए की सामग्री क्यों लगवाई? सरकारी पैसे का दुरुपयोग क्यूँ हुआ?

एक बड़ा सवाल ये है कि पूर्व मंत्री की पत्नी ने सोसायटी से 3500 वर्गफीट जमीन खरीदी, पर 12 हजार वर्गफीट जमीन पर 20 फीट की ऊंची दीवार उठाकर आम जनता के लिए आवाजाही क्यों बंद की गई?

कब्जे वाले परिसर में लगा बिजली विभाग का ट्रांसफार्मर किसके आदेश पर बंद किया गया? हैरानी की बात ये है कि अगर यह जमीन राजश्री सद्भावना समिति की थी, तो निगम के नोटिस पर कब्जा खाली क्यों हो गया? इसका विरोध न होना भी कई सवालों को जन्म देता है।

नगर निगम की तीन सदस्यीय जांच समिति इस मामले की जांच कर रही है। 10 दिन में इसका प्रतिवेदन सौंपा जाएगा। जांच रिपोर्ट को लेकर लोगों की उत्सुकता बनी हुई है।

पदाधिकारियों ने कहा : जमीन सोसाइटी की है, सोसाइटी के पदाधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कोई गड़बड़ी नहीं है। जमीन सोसाइटी की है, सोसायटी ने प्रस्ताव पारित कर यह जमीन शकुन डहरिया को बेची थी, जो केंद्रीय कर्मचारी गृह निर्माण समिति मर्यादित की सदस्य है।

इस मामले को लेकर विपक्षी पार्षद लगातार सवाल उठा रहे है। मामले को लेकर बवाल मचा हुआ है, वहीँ इस पर कार्यवाही भी हो रही है।

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