चीन के खिलाफ अमेरिका में बड़ी जिम्मेदारी, क्या है बाइडेन की योजना?

देश/दुनिया : अमेरिका में 2024 के नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं उससे पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अहम फैसला लिया है। दरअसल चीन के कट्टर विरोधी कर्ट कैंपबेल को अमेरिकी विदेश मंत्रालय में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। कैंपबेल अब पॉलिटिकल अफेयर्स के अंडर सेक्रेटरी की कमान संभालेंगे। अब विक्टोरिया की जगह कैंपबेल सारा कामकाज देखेंगे. फिलहाल कैंपबेल अमेरिका के इंडो पेसिफिक नीति के प्रभारी है।

कर्ट कैंपबेल की एक पहचान यह भी रही है कि उन्होंने भारत और अमेरिका की दोस्ती को धरती पर सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंध बताया था। कैंपबेल को नंबर दो की पोजिशन देकर बाइडेन ने चीन के साथ अपनी प्रतिस्पर्धा को उजागर किया है। दूसरी तरफ रूस-यूक्रेन संघर्ष, इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष जैसी वर्तमान अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बीच अमेरिका ने ऐसा करके अपने एशिया-प्रशांत सहयोगियों को आश्वासन भी दिया है कि चाहे कोई भी चुनौती हो इंडो पेसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी। बाईडेन इस बार होने वाले चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां कर रहे है, उनके कार्यकाल में भारत और अमेरिका संबंधों में थोड़ी सी तल्खी भी आई थी, जिससे उनकी साख में गिरावट हुई। वहीँ मौके की फ़िराक में बैठे डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत सम्बन्ध सुधारने को लेकर अपना चुनावी कैम्पेन शुरू कर दिया है।

बाइडेन प्रशासन का “एशिया सम्राट” :

कैंपबेल को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन का “एशिया सम्राट” कहा जाता है। वाशिंगटन नीति के अनुभवी हैं, जिन्होंने सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में उपाध्यक्ष के रूप में और न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के सीईओ और सह-संस्थापक के रूप में काम किया है। वह इंडो-पैसिफिक में अमेरिकी पहल को चलाने वाले प्रमुख एजेंट रहे हैं। QUAD यानी क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग को मजबूत और सक्रिय बनाने, चीन के ख़िलाफ़ AUKUS बनाने में कैंपबेल ने ख़ास रोल निभाया है। कैंपबेल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों से काफी समर्थन मिला है, जो आज के हद से ज्यादा पोलराइज्ड वाशिंगटन में काफी दुर्लभ है। वहीँ अब चीन के प्रति कमजोर रवैये से भी बाईडेन की साख को नुकसान पहुंचा है।

क्या है QUAD? :

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क्वाड यानी क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग जिसको चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए बनाया गया था। इस समूह के में चार सदस्य हैं – भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया। ये चारों देशों का चीन विरोधी है। वहीँ इस समूह को बनाने की बात पहली बार 2004 की सुनामी के बाद हुई थी। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को 2006 और 2007 के बीच क्वाड की नींव रखने का श्रेय जाता है। हालांकि कुछ समय बाद ही ऑस्ट्रेलिया इससे अलग हो गया था। फिर 2017 में आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका संवाद के साथ क्वाड वापस अस्तित्व में आया।

AUKUS क्या है? :

AUKUS यानि ऑस्ट्रेलिया, यूके और अमेरिका। तीनों देशों ने कहा कि इंडो पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ईंधन से चलने वाली पनडुब्बियां बनाने में मदद करेंगे। AUKUS समझौते को बनाने के पीछे मकसद था कि पश्चिमी प्रशांत महासागर में ऑस्ट्रेलिया की नौसैनिक ताक़त में ख़ासा इज़ाफ़ा हो और वह इस इलाके में चीन के बढ़ते प्रभाव का जवाब देने की स्थिति में आ जाए। इस फैसले से चीन खासा नाराज हो गया था। वहीँ अब चीन की सबक सिखाने की फ़िराक में बैठे बाईडेन अपने कामों को अंजाम दे रहे है।

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