कराची (पाकिस्तान) : दुनिया में अगर कोई बदनाम मुल्क है तो वो पाकिस्तान है, पाकिस्तान का मतलब होता है पाक – स्थान। लेकिन दुनिया में सबसे नापाक मुल्क पाकिस्तान ही है। भारत से बंटवारे के बाद से ही इस मुल्क में गैर मुसलमानों को प्रताड़ित तो किया गया ही, लेकिन अब वहां अफगानी मुसलमान भी मुश्किल में है। जो अफगानी मुसलमान वहां वहां बीते चालीस वर्षो से रहते आये है, उन्होंने अपनी जीवनभर की मेहनत से जो संपत्तियां बनाई है, अब वो उन्हें वहां छोड़कर जाना पड़ रहा है। पिछले साल अक्टूबर से करीब छह लाख अफगान लोगों को पाकिस्तान से उनके घर वापस भेजा जा चुका है लेकिन अफगानिस्तान के कम से कम दस लाख शरणार्थी अब भी पाकिस्तान में हैं।
निर्वासन की आशंका में अफगानी लोग लोग छिप-छिपकर रह रहे हैं। पाकिस्तान में रह गए ये लोग अफगानिस्तान नहीं जाना चाहते, क्यूंकि उनकी आजीवन मेहनत की संपत्ति यहाँ बनी हुई है, वहीँ दूसरी तरफ से उन्हें अफगानिस्तान में शरण मिलना भी आसान नहीं रहा है। निर्वासन के डर से उन्होंने सार्वजनिक आवाजाही कम कर दी है, अपनी नौकरियां छोड़ दी हैं। यह लोग अपने घरों के आसपास भी बहुत कम निकलते हैं। उनके लिए आजीविका कमाना, किराए पर घर लेना, खाने-पीने का सामान खरीदना या इलाज कराना बहुत मुश्किल हो गया है। अफगानी मुस्लिमों को डर है कि उन्हें पुलिस उन्हें पकड़ लेगी या फिर पाकिस्तानी नागरिकों उनके बारे में अधिकारियों को सूचना दे देंगे।
कराची पुलिस ने क्या किया :
हाल ही में एक ऐसी ही घटना सामने आई थी जिसमें कराची में पुलिस ने 18 साल के एक किशोर की नकदी, फोन और मोटरसाइकिल छीनकर उसे निर्वासन केंद्र में भेज दिया गया था। वहां से उसे अफगानिस्तान भेज दिया गया। उसके माता-पिता करीब 50 साल पहले अफगानिस्तान छोड़कर यहां आए थे। वह इससे पहले कभी अफगानिस्तान नहीं गया और उसके पास जाते वक्त कपड़ों के अलावा कुछ नहीं था। ऐसे दर्दनाक हालात में वो क्या करे, वहीँ जहाँ आम आदमी अपने व्यापार को जमाने के लिये चिंतित रहता है, वहीँ पूरी जिन्दगी को वापस पटरी पर लाना कैसे संभव होगा?
पाकिस्तान ने चला रखा है अभियान :
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अफगानिस्तान में युद्ध के हालात के बीच ऐसे कम से कम 17 लाख लोगों ने पाकिस्तान में शरण ली थी। हालांकि वो पाकिस्तान में बिना किसी कानूनी अनुमति के रहते रहे लेकिन अब पाकिस्तान ने उन्हें अफगानिस्तान वापस भेजने के लिए अभियान चला रखा है। वहीँ कुछ ऐसे लोग है जो वर्षों से पाकिस्तान में ही पैदा हुये पले बढ़े और उनका दूर-दूर तक अफगानिस्तान से कोई नाता ही नहीं है।
युवक का दर्द :
लगभग 15 साल की उम्र से वाहन मेकेनिक के रूप में काम कर रहे एक युवक ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर बातचीत में गिरफ्तारी और निर्वासन का अंदेशा जताया, वहां मुल्क केके खिलाफ बोलना मतलब मौत को गले लगाना है। उस युवक ने यहां रहने के लिए दस्तावेजों की खातिर आवेदन किया है लेकिन उसे ऐसे कागज मिलने की संभावना बिलकुल भी नहीं है। पाकिस्तान अफगान शरणार्थियों या उनके बच्चों को कागजात जारी नहीं कर रहा है। युवक ने कहा, ‘‘मेरी जिंदगी यहां है। अफगानिस्तान में मेरा कोई दोस्त, परिवार, कुछ भी नहीं है।’’ ऐसी ही हृदय को पीड़ित करने वाली कई कहानियां अफगानी मुसलमानों ने बताई।
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