औरंगाबाद(छत्रपति संभाजीनगर)/महाराष्ट्र : आज के समय में मुसलमानों के सबसे बड़े नेता असादुद्दीन माने जाते है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में सभी दल मुस्लिम वोट तो चाहते हैं लेकिन उन्होंने मुस्लिम समुदाय से किसी भी प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा है। छत्रपति संभाजीनगर के आमखास मैदान में सोमवार को एक रैली को खिताब करते हुए कि ओवैसी ने दावा किया है कि औरंगाबाद के उनकी पार्टी के सांसद इम्तियाज जलील को हराने के लिए कई दलों से घेराबंदी कर रहे हैं। वो सभी पार्टियाँ जलील को जीतने नहीं देना चाहती।
मुस्लिमों को नहीं दिया टिकट :
असादुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि “राजनीतिक दल मुसलमानों से वोट मांग रहे हैं लेकिन उन्हें महाराष्ट्र की 48 सीट में से किसी भी सीट पर समुदाय से कोई उम्मीदवार नहीं मिल पाया है. उन्हें अन्य किसी क्षेत्र के परिणाम की चिंता नहीं है, लेकिन दो शिवसेना, दो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और आधी कांग्रेस यहां जलील को हराने के लिए आ गई है।” शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) उम्मीदवार चंद्रकांत खैरे की आलोचना करते हुए AIMIM प्रमुख ने कहा कि खैरे खुद को हिंदुत्व नेता कहते थे लेकिन जब उन्हें मतदाताओं (मुस्लिम) के महत्व का एहसास हुआ तो यहां ईदगाह पहुंच गए। इन्हें सिर्फ मुसलमानों को ठगकर अपनी जीत पूरी करनी है।
बाबरी मस्जिद और शिवसेना :
असादुद्दीन ने कहा, “जिनकी राजनीति पहले ‘खान या बान’ (या तो मुसलमान या हिंदू) पर आधारित थी वह अब नमाज के बारे में बात कर रहे हैं।” शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को “नया धर्मनिरपेक्ष” करार देते हुए ओवैसी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बारे में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए और बताना चाहिए कि यह “पाप था या नहीं।” आपको बता दें कि असदुद्दी ओवैसी AIMIM के उम्मीदवार इम्तियाज जलील के लिए वोट मांगने छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे।
कांग्रेस से नाराज आरिफ नसीम खान :
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इससे पहले कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री पार्टी से नाराज हो गए थे। उनका आरोप था कि कांग्रेस ने महाराष्ट्र से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा है। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से नाराजगी जताई और चुनाव प्रचार समिति से इस्तीफा दे दिया। इस ताल्लुक से उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखा और असंतोष जताया। ये सभी पार्टियाँ लगातार मुसलमानों के वोट लेना चाहती है, लेकिन उम्मीदवारी देने के नाम पर इनके मुंह बंद हो जाते है।



