महादेव रेड्डी बैट बुक 23 के चार और सट्टेबाज गिरफ्त में, अब तक नौ गिरफ्तार।

रायपुर : छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर पुलिस लगातार कार्यवाही कर रही है। इस दौरान पुलिस ने कार्यवाही कर ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले 4  अंतरराज्यीय सटोरियों को गिरफ्तार किया है। महादेव रेड्डी बैट बुक 23 के नाम से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा चलाया जा रहा था। प्रार्थी के नाम से बैक में अकाउंट खुलवाकर खाते का उपयोग सट्टे में करता था। जिसको लेकर पहले भी कार्यवाही की गई है। 

अब तक 9 आरोपी गिरफ्तार :

बताया जा रहा है कि, इस मामले में पहले भी 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी पुणे में  बैठकर ऑनलाइन सट्टा संचालित करते थे। पकडे़ गए आरोपियों के कब्जे से 22 मोबाईल, 3 लैपटॉप, 12 पासबुक, 24 चेकबुक, 72 ए.टी.एम. कार्ड और  सट्टा के पैसों जप्त किए गए है। सामान की कुल कीमत 5 लाख रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

जिसमें पुलिस ने अतुल भगवान पराते निवासी इतवारी रेलवे स्टेशन के पास झाड़े चौक थाना लालगंज जिला नागपुर (महाराष्ट्र), विक्रांत रंगारे निवासी भिलाई जिला दुर्ग, अंशुल रेड्डी निवासी सेक्टर-10 भिलाई जिला दुर्ग, देवेंद्र कुमार विशाल उर्फ टिंकू निवासी सेक्टर -4 भिलाई जिला दुर्ग और कुशल ठाकुर निवासी सेक्टर -5 भिलाई जिला दुर्ग को गिरफ्तार किया गया। इन पर नए कानून के तहत धोखाधड़ी और जुआ एक्ट के तहत कार्यवाही की गई। प्रकरण के अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी पतासाजी कर गिरफ्तार करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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गुरुवार को एएसपी क्राइम संदीप मित्तल ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि प्रार्थी दशरथ निषाद ने थाना मौदहापारा में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वे फूल चौक, मौदहापारा रायपुर में रहते हैं। गैलेक्सी इंटरनेशनल इंटरप्राइजेज प्रा.लि. में कार्य करते हैं। उनके साथी बढ़ईपारा निवासी मोहित विश्वकर्मा ने कहा कि उसे एक बैंक खाते की आवश्यकता है। इस पर दशरथ ने बैंक आफ महाराष्ट्र में अपना खाता खुलवा दिया।

मोहित विश्वकर्मा ने उक्त बैंक खाते में दशरथ के आधार कार्ड से एयरटेल की सिम खरीद कर रजिस्टर्ड करा दी और खाते की पासबुक, चेकबुक के साथ एटीएम कार्ड अपने पास रख लिया। 30 अप्रैल को मोहित विश्वकर्मा ने दशरथ को फोन करके कहा कि उक्त बैंक खाता फंस गया है, उसे बंद कराना है। इस पर दशरथ को शंका हुई। बाद में उन्हें पता चला कि मोहित विश्वकर्मा ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर उसे झांसा दिया है। इसी तरह कई अन्य लोगों के भी खाते खुलवाये गये है, जिनका प्रयोग सट्टे के पैसे के लेनदेन को लेकर प्रयोग होता रहा है।