कुत्तों के आतंक से राजधानीवासी दहशत में और नगर निगम नींद में, बच्चों से लेकर बड़े तक हो रहे शिकार।

राकेश डेंगवानी/रायपुर : बारिश का मौसम आते ही कुत्ते आक्रामक हो जाते है, वहीँ राजधानी में कुत्तों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, पिछले साल नवम्बर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी जिसमें एक ढाई साल की बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी, जहाँ इतनी छोटी बच्ची को आधा दर्जन कुत्तों ने दर्जनभर जगहों पर काटा था। इससे क्षेत्रवासी दहशत में आ गये थे, वहीँ वर्षभर कुत्तों के आतंक से राजधानीवासी डरे सहमे रहते है, खासकर रात के समय में। कुत्ते लगातार बच्चों से बड़ों को काट रहे है, जबकि नगर निगम इसका समाधान नहीं कर पा रहा है, सिर्फ भीमराव अम्बेदक अस्पताल में ही रोज 10 – 15 के स सामने आ रहे है। एक अनुमान के अनुसार राजधानी में 40 हजार से ज्यादा कुत्ते हो चुके है।

रायपुर में नगर निगम प्रशासन ने पिछले वर्ष 12 लाख रुपये का बजट कुत्तों की समस्या के निवारण के लिए रखा था, लेकिन इसके बावजूद लगातार आवारा कुत्तों की संख्या आज भी बढ़ती ही जा रही है। इसका खमियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। आवारा कुत्ते आए दिन राजधानीवासियों को अपना शिकार बना रहे हैं। आवारा कुत्ते सुबह शाम निकलने वाले बच्चे, बड़े-बूढ़े और महिलाओं को अपना शिकार बना रहे हैं। इसके अलावा दोपहिया वा हैहन पर घूमने वाले लोग भी कुत्तों का शिकार होते हैं। कई बार ऐसे वाहन चालक कुत्तों की वजह से हादसे का शिकार होते हैं, जबकि नगर निगम शहर में आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण करने के लिए बधियाकरण किया जा रहा है। बधियाकरण पर हर साल निगम लाखों रुपये फूंक रहा है। उसके बाद भी आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। 

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जब तक आम आदमी जागरूक नहीं होता तब प्रशासनिक अमला भी सोया ही रहता है, पिछले वर्ष के डॉग बाईट केस लगभग प्रतिघंटे के हिसाब से क्षेत्रीय अस्पतालों और अम्बेडकर आने लगे थे, जो कि इस बार भी लगातार बढ़ने शुरू हो गये है, इस वर्ष निगम इनके समाधान के लिये क्या कर रहा है? अभी तक स्पष्ट नहीं है, जबकि पिछले वर्ष रैबीज के इंजेक्शन भी मांग के अनुरूप ख़त्म हो गये थे, जिससे पीड़ित वर्ग मुश्किल में फंस गया था। वहीँ निजी अस्पतालों में रैबीज के इंजेक्शन की कीमत 500/- से 2500/- तक ली जा रही है, जो कि कम से कम 5 बार लगवाना अनिवार्य है। यह खर्च गरीब और मध्यवर्गीय के लिये उठाना काफी मुश्किल है। अब वर्तमान में फिर कुत्तों का आतंक बढ़ना शुरू हो गया है, जिसको लेकर निगम अब तक नहीं जागा है।

आए दिन किसी न किसी को कुत्ता काटने की खबर सामने आ ही जाती है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजधानी के लाखे नगर, कुशालपुर, प्रोफेसर कालोनी, राधास्वामी नगर, अश्वनी नगर, गोल चौक, डंगनियां, सुंदरनगर, रायपुर रोड, गुढ़ियारी, समता कालोनी, फाफाडीह आदि क्षेत्र में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगभग राजधानी के 70 वार्डों में यही हाल है। 

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